वॉशिंगटन
धरतीवासियों के लिए पर्यावरण से जुड़ी एक गुड न्यूज है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने सोमवार को पुष्टि की है कि पृथ्वी के सुरक्षा कवच ओजोन लेयर का होल अब सिकुड़ रहा है। यह होल 1980 के दशक से इंसानों को डरा रहा है। हमारे ग्रह को अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन से बचाने वाले गैसीय सुरक्षा कवच में होल ने एक ‘ग्लोबल अलार्म’ और सामूहिक कार्यवाई को ट्रिगर किया था। 1975 और 1984 के बीच ब्रिटिश भूभौतिकीविद (जोसेफ फार्मन ने मौसम के गुब्बारों का इस्तेमाल करके रिसर्च की थी।
उन्होंने अंटार्कटिक में हैली बे साइंटिफिक बेस के ऊपर समताप मंडल में ओजोन परत में एक धीरे-धीरे और चिंताजनक गिरावट का खुलासा किया था। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के दो केमिस्ट मारियो मोलिना और शेरवुड रॉलैंड की रिसर्च में इस होल के बारे में पता चला। 1974 में उन्होंने तर्क दिया था कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) गैस, जिसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर रेफ्रिजेरेशन के लिए किया जाता है, ओजोन परत को कम कर रही है। दोनों शोधकर्ताओं को उनके शोध के लिए 1995 में नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार मिला था।
अस्तित्व में आई वियना संधि
मार्च 1985 में 28 देशों ने ओजोन परत के संरक्षण के लिए वियना संधि पर साइन किया। यह इस मुद्दे पर पहली अंतरराष्ट्रीय संधि थी जिसके तहत सदस्य देश ओजोन परत के क्षरण और मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसके प्रभावों की निगरानी करने के लिए प्रतिबद्ध थे। वियन संधि ने दो साल बाद मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का रास्ता साफ किया। यह ओजोन का क्षरण करने वाले पदार्थों के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करता है। इसका लक्ष्य 10 वर्षों में सीएफसी और हैलोन गैसों के इस्तेमाल को आधा करना था।
ग्लोबल वॉर्मिंग फेर सकती है मेहनत पर पानी
सामूहिक प्रयास चल रहे थे लेकिन ओजोन का होल धीरे-धीरे बड़ा हो रहा था। सितंबर 2006 में अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में अब तक का सबसे बड़ा होल देखा गया था। जून 2016 में अमेरिका और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने साइंस मैग्जीन में लिखा है कि अंटार्कटिका पर होल कम हो रहा है। उन्हें उम्मीद है कि 2050 तक यह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। 9 जनवरी 2023 को संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की कि ओजोन परत चार दशकों के भीतर पूरी तरह से ठीक होने की राह पर है। लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग को ट्रिगर करने वाली मानवीय गतिविधियां इस सुधार को रोक सकती हैं।
