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जॉब से प्यार मत करो, आधी सैलरी बचाओ… मंदी में काम आएंगे चेतन भगत के तीन फंडे

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गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा (फेसबुक), ऐमजॉन और ट्विटर में कॉमन क्या है? ये सभी दुनिया की सबसे बड़ी टेक्‍नोलॉजी कंपनियों में गिनी जाती हैं। इन सबने हाल ही में बड़े पैमाने पर छंटनी का ऐलान किया है। देखा जाए तो, टेक सेक्टर में लाखों क्वालिफाइड कामगारों की नौकरी छिन गई है। एक वक्‍त पर इन्‍हें दुनिया की सबसे शान वाली नौकरियों में गिना जाता था। इन कंपनियों के नाम अक्षर ‘बेस्‍ट प्‍लेसेज टू वर्क’ वाले सर्वे में दिखते थे। आलीशान ऑफिस, फ्री लंच, आसमान छूती सैलरी और स्टॉक के विकल्‍प भी… इन कंपनियों ने एंप्लाइज को कई सुविधाएं दीं- पेट्स को वर्कप्लेस पर ले आइए, कहीं से भी काम कीजिए, अनलिमिटेड छुट्टियां और खूबसूरत जगहों के टूअर। लेकिन देखिए कितनी जल्दी सब कुछ बदल गया। दशकों से इन कंपनियों में काम कर रहे लोगों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। देश के भीतर भी छंटनियां हुई हैं और माना जा रहा है कि अभी और नौकरियां जाएंगी।

प्रॉफिट आए, बाकी सब जाए भाड़ में!
फ्री-मार्केट इकॉनमी में आपका स्वागत है। हम अक्‍सर ही आर्थिक उदारीकरण के फायदे गिनाते हैं और प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देते हैं, लेकिन दूसरा पहलू भी है। यह प्रॉफिट्स, ग्रोथ और शेयरहोल्डर्स के लिए रिटर्न से चलता है। प्राइवेट कंपनियां ‘अच्छा’ बनने की कोशिश नहीं करतीं। वे अपने कर्मचारियों की देखभाल और सहानुभूति रखने वाली हो सकती हैं लेकिन * लगा हुआ है- केवल अच्छे दौर में। अगर परिस्थितियां गड़बड़ाईं और कंपनी की परफॉर्मेंस पर असर पड़ा तो वह उसे ठीक करने के लिए जो बन पड़ेगा, करेगी… लोगों को नौकरी से निकालना भी।

आमतौर पर सरपट दौड़ने वाले टेक सेक्टर में ऐसा क्‍यों हो रहा है, इसकी दो मुख्य वजहें है। पहला- कोविड के वक्‍त टेक में आया बूम लोगों ने जितना सोचा, उससे कम वक्‍त के लिए रहा। उस दौर में टेक कंपनियों ने ओवर-हायरिंग कर ली, यह सोचकर कि दुनिया हमेशा ऑनलाइन डिलीवरी और वर्चुअल मीटिंग्‍स में चिपकी रहेगी। वे गलत थे। दूसरा- स्टार्टअप सेक्टर रीकैलिबरेट हो रहा है। बूम के दौर में रेवेन्‍यू और ग्रोथ देखी जाती रही, प्रॉफिट्स और कैश फ्लो को नजरअंदाज किया गया। अब जब ब्याज दरें बढ़ी हैं, इनवेस्‍टर्स इन कंपनियों से प्रॉफिट्स मांग रहे हैं। नतीजा, कॉस्‍ट कट और छंटनी। अगर आपकी नौकरी गई है तो भावनात्मक रूप से आपके लिए बेहद मुश्किल वक्‍त है।

क्‍या करें तो ऐसे उतार-चढ़ाव में संभले रहें
इन हालात में कोई क्‍या करें? क्‍या प्राइवेट सेक्टर में दिल नहीं? क्‍या ये ऐसी जगह है जहां से आपको जब मर्जी हो, निकाला जा सकता है? कुछ हद तक इन सवालों के जवाब ‘हां’ में हैं। प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां आखिरकार अपने शेयरहोल्डर्स की सेवा करती हैं। जब से छंटनियों की घोषणा हुई है, बड़ी टेक कंपनियों के शेयर चढ़े हैं जिससे शेयरहोल्डर्स और अमीर हुए। हालांकि, प्राइवेट सेक्टर अपने कर्मचारियों को खूब भुगतान कर सकते हैं और करते भी हैं। छंटनी में जिनकी नौकरियां बच गईं हैं, वे अब भी इतनी सैलरी कमाते हैं जो सरकारी नौकरी के मुकाबले पांच से 10 गुना है। जिनकी नौकरी गई है, उनके लिए भी नई नौकरियां पाने की अच्‍छी संभावनाएं हैं, बशर्ते उनमें धैर्य रहे और तैयारी पुख्ता रहे। प्राइवेट सेक्टर में करियर बचाने के कुछ तरीके यूं है:

1. सैलरी जितनी है, उसकी आधी मानें और बाकी बचाएं: प्राइवेट सेक्‍टर में आपको खूब पैसा मिलता है पर आप निकाले भी जा सकते हैं। ऐसे में, बेस्‍ट यही रहेगा कि आप सैलरी का बड़ा हिस्‍सा बचाएं, कम से कम जबतक आपने अच्‍छी-खासी रकम न जुटा ली हो। आपकी उम्र, खर्च और आश्रितों के हिसाब से आपको एक या दो साल के लिए इंतजाम करने चाहिए, ताकि नई नौकरी मिलने तक काम चल जाए।

2. किसी सेक्‍टर को बेस्‍ट न समझें: बिजनेस एक चक्र की तरह है और यह सभी सेक्‍टर्स पर लागू होता है। कंपनियां कुछ वक्‍त अच्‍छा करती हैं और बाकी टाइम नहीं। दुनिया की कोई कंपनी या सेक्‍टर ऐसा नहीं जो पूरे वक्‍त सफलता की गारंटी दे सके। टेक का एक वक्‍त जलवा था, इस वक्‍त नहीं है। फायनेंस और रीयल-एस्‍टेट ने भी उतार-चढ़ाव देखा है। जरूरत पड़ने पर सेक्‍टर बदलने में कोई बुराई नहीं है। वक्‍त बदलता है, आपको भी बदलना चाहिए।

3. अपनी नौकरी से भावनात्‍मक जुड़ाव न रखें: प्राइवेट सेक्‍टर की नौकरी से प्‍यार करना मतलब सीरी और एलेक्‍सा जैसे डिजिटल असिस्‍टेंट के प्‍यार में पड़ जाता। यह सच नहीं है। कंपनियां अपने कर्मचारियों को खूब सुविधाएं देती हैं जब वक्‍त अच्‍छा होता है। समय बदलता है तो HR उनसे मुक्ति पा लेता है और जरूरत होती है तो आपसे भी। प्राइवेट सेक्‍टर की नौकरी से पैसे कमाएं, बस। इमोशंस को लोगों के लिए बचाकर रखें। अंत में वही मैटर करता है। कभी किसी को मौत के करीब आकर कहते सुना है, ‘काश मैं ऑफिस में ज्‍यादा वक्‍त दे पाता’ या ‘काश मैंने और अच्‍छा पापरपॉइंट प्रजेंटेशन बनाया होता।’ गीता जीवन में अनासक्ति पर जोर देती है। आपकी मल्‍टीनैशनल जॉब में इसकी बहुत जरूरत पड़ेगी।

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