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Wednesday, April 29, 2026
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चीन का मिशन मंगल फेल, NASA ने बताया- महीनों से एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा चीन का मार्स रोवर

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बीजिंग

चीन के जुरॉन्ग मार्स रोवर के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। धूल भरी आंधी और ठंड के तापमान के कारण, सौर ऊर्जा से चलने वाला रोवर पिछले साल मई से निष्क्रिय पड़ा हुआ है। नासा के मार्स रिकॉनेनेस ऑर्बिटर की ली गई तस्वीरों की एक सीरीज के अनुसार, चीनी रोवर कम से कम सितंबर 20 सितंबर 2022 की शुरुआत से एक इंच भी नहीं चला है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि चीन का जुरॉन्ग मार्स रोवर खराब हो चुका है और अब यह कभी भी काम नहीं करेगा। मंगलवार को एरिजोना विश्वविद्यालय में हाईराइज टीम ने जुरॉन्ग मार्स रोवर को लेकर तीन अलग-अलग तरह के दृष्टिकोण पेश किए। मार्स रिकॉनेनेस ऑर्बिटर के हाईराइज कैमरे में जुरॉन्ग मार्स रोवर गुलाबी रंग के बिंदु के रूप में दिखाई देता है।

सभी तस्वीरों में एक जगह ही दिखा चीनी रोवर
तस्वीरों में मंगल के यूटोपिया प्लैनिशिया के आसपास के क्षेत्र में रोवर और एख गढ्ढे को देखा जा सकता है। पहली तस्वीर 11 मार्च, 2022 को, दूसरी 8 सितंबर, 2022 को और सबसे ताज़ा तस्वीर 7 फरवरी, 2023 को ली गई थी। पिछली दो तस्वीरों में रोवर उसी स्थान पर दिखाई दे रहा है, जहां वह तीसरी तस्वीर में नजर आया। हालांकि, चीन ने अभी तक जुरॉन्ग मार्स रोवर से संबंधित कोई जानकारी साझा नहीं की है। चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी अपनी गतिविधियों के बारे में बेहद गोपनीय है। ऐसे में उनके अंतरिक्ष मिशनों से संबंधित औपचारिक बयान दुर्लभ हैं।

रोवर खराब होने पर चीन की चुप्पी
चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी अपनी संचालन को गुप्त रखने को लेकर बदनाम है। ऐसे में उन्होंने जुरॉन्ग रोवर को लेकर चुप्पी साध रखी है। चीन इसके अलावा चंद्रमा पर भी कम से कम तीन रोवर मिशन को ऑपरेट कर रहा है। चीन ने पिछले साल ही चंद्रमा की सतह से 3 किलोग्राम मिट्टी धरती पर उतारी थी। चीनी वैज्ञानिक आने वाले दिनों में मंगल और चंद्रमा को लेकर और ज्यादा मिशन संचालित करने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा चीन की कोशिश अपने अंतरिक्ष स्टेशन को पूरी तरह से सक्रिय करने की भी है।

क्यूरियोसिटी रोवर सुर्खियां बटोर रहा है
नासा का क्यूरियोसिटी रोवर लगभग एक दशक से मंगल के गेल क्रेटर की खोज कर रहा है। यह मंगल ग्रह का सबसे अनुभवी रोवर हो सकता है। इस रोवर ने शानदार चट्टानों की छवियां लीं जो मंगल के अतीत से पानी के अचूक निशान प्रकट करती हैं। नासा ने बुधवार को एक बयान में बताया कि अरबों साल पहले, मंगल के सतह पर एक छोटी झील थी, जिसकी लहरें तल पर मौजूद सामग्री को मथती थीं। इससे अंत में झील के नीचे मौजूद चट्टानों की सतहों पर पानी का पैटर्न छप गया।

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