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जुबैर के ALT News को बनाया फैक्‍ट-चेक का ‘चौधरी’… थिंक टैंक को ‘बुराई’ के लिए दान, सोरोस की ‘स्‍ट्राइक टीम’ पहचानिए

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नई दिल्‍ली

लुटियंस के नंबर-1 थिंक टैंक को सरकार ने हिला दिया है। इसकी फॉरेन फंडिंग फ्रीज कर दी गई है। केंद्र सरकार ने सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) का एफसीआरए लाइसेंस सस्‍पेंड कर दिया है। विदेशी चंदा पाने के लिए यह लाइसेंस जरूरी है। यह फॉरेन कॉन्ट्रिब्‍यूशन रेगुलेशन ऐक्‍ट यानी एफसीआरए के अधीन आता है। सीपीआर को फंडिंग करने वालों में Namati Inc का नाम भी शामिल है। Namati Inc को दिग्‍गज अमेरिकी निवेशक जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशंस (OSF) से पैसा मिलता है। सोरोस OSF के जरिये दुनियाभर के थिंक टैंक और सिविल सोसाइटी ग्रुप्‍स को वित्‍तीय मदद मुहैया कराते हैं।

सोरोस वही हैं जिन्‍होंने कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि वह लोकतांत्रिक नहीं हैं। सरकार ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। उसने इसे विदेशी धरती से भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश करार दिया था। पीस रिसर्च इंस्‍टीट्यूट ओस्‍लो (PRIO) और द पोयंटर इंस्‍टीट्यूट फॉर मीडिया स्‍टडीज को भी सोरोस की OSF से वित्‍तीय मदद मिलती है। द पोयंटर इंस्‍टीट्यूट फॉर मीडिया स्‍टडीज ही इंटरनेशनल फैक्‍ट-चैकिंग नेटवर्क (IFCN) चलाती है। आईएफसीएन ने ही मोहम्‍मद जुबैर की ऑल्‍ट न्‍यूज को इंटरनेट पर फैक्‍ट-चेक का ‘चौधरी’ बनाया था।

कनेक्‍शन उलझा है!
हमारे सहयोगी चैनल टाइम्‍स नाउ ने सोरोस के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। सोरोस से जुड़ा संगठन यह भी चाहता था कि जुबैर को नोबेल शांति पुरस्‍कार मिले। बुधवार को जब सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च का एफसीआरए लाइसेंस सस्‍पेंड करने की खबर आई तो चैनल ने दोबारा सोरोस के नेटवर्क की कड़‍ियों को जोड़ा। टैक्‍स देनदारी को लेकर सीपीआर पर ऐक्‍शन हुआ है। टाइम्‍स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, IFCN ने ऑल्ट न्यूज को 2019 में इंटरनेट पर फैक्‍ट-चेक के लिए स्थापित मीडिया हाउस के रूप में मान्यता दी थी। सोरोस से जुड़े संगठन ने ही ‘द वायर’ को ‘फ्री मीडिया पायनियर’ का अवार्ड दिया था।

मोदी सरकार के ख‍िलाफ एजेंडा?
सीपीआर पर सरकार के ऐक्‍शन को लेकर टीवी पर चर्चा में शामिल वरिष्‍ठ पत्रकार राज गोपालन ने यह कदम उठाने के लिए मोदी सरकार की तारीफ की। उन्‍होंने इस ऐक्‍शन का कारण भी बताया। टाइम्‍स नाउ के प्रोग्राम में उन्‍होंने कहा कि विदेशी चंदे में से कुछ हिस्‍सा टैक्‍स के तौर पर सरकार को देना होता है। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पिछले पांच साल से ऐसा नहीं कर रही थी। चाणक्‍यपुरी में बैठकर सीपीआर का एजेंडा सिर्फ मोदी सरकार की नीति‍यों की आलोचना करना था। यह चीन, सोरोस और कम्‍युनिस्‍ट समर्थक संगठन है। जो कुछ भी मोदी सरकार ने किया वह सही है।

सीपीआर को Namati Inc के अलावा भी कई विदेशी संस्‍थानों से डोनेशन मिलता है। आधिकारिक दस्‍तावेजों के अनुसार, बिल एंड मिलिंडा गेट्स ने थिंक टैंक को अक्‍टूबर 2022 से दिसंबर 2022 के बीच सबसे ज्‍यादा दान दिया। द ओक फाउंडेशन और वर्ल्‍ड रिसोर्सेज इंस्‍टीट्यूट भी उसे दान देने वाले संस्‍थानों में शामिल हैं।

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