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छह घंटे इंतजार, दो लाइनों में आया फैसला तो कोर्ट रूम में छलके आंसू… लगे जय श्रीराम के नारे

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अहमदाबाद

आंखों में आंसू, भारत माता की जय और जय श्री राम का उद्घोष… अहमदाबाद की विशेष अदालत ने जब 21 साल पुराने नरोदा गाम नरसंहार केस में फैसला सुनाया तो कोर्ट के अंदर और बाहर का माहौल भावुक हो गया। कोर्ट के अंदर मौजूद 65 आरोपियों ने ताली बजाकर फैसले का स्वागत किया और जय श्री राम के उद्घोष के साथ्ज्ञ खुशी व्यक्त की। जब वे बाहर निकले तो परिजनों के गले लिपट गए। कुछ आरोपियों के चेहरे खुशी थी कि आखिर 21 बाद ही सही वे आरोप मुक्त हुए तो वहीं कुछ के चेहरे पर इस बात का संतोष था कि अब उन्हें कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। तो वहीं कोर्ट के बाहर मौजूद परिजनों ने जय श्री राम का उद्घोष किया। आरोपियों ने रुंधे हुए गले और नाम आंखों से न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया।

आंखों में छलके आंसू
अहमदाबाद सेशंस कोर्ट की विशेष कोर्ट से जैसे ही कोर्ट का फैसला बाहर आया कि सभी आरोपियों को बरी किया गया। इसके बाद आरोपियों को परिजनों ने जय श्री राम और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ खुशी व्यक्त की। वे एक दूसरे के लिपट गए। सुबह से कोर्ट के बाहर इंतजार करे आरोपियों के परिजनों के चेहरे खुशी से खिल गए तो वहीं कोर्ट के फैसले को जानने के लिए पहुंचे पीड़ितों के चेहरे मायूस हो गए। तो वहीं 21 साल बाद आरोप मुक्त होने पर आरोपियों और उनके परिजनों की आंखों में आंसू छलक आए।

माया कोडनानी ने जोड़े हाथ
सुबह 11 बजे से ही कोर्ट रूम में फैसले का इंतजार कर रहे आरोपियों को छह घंटे का इंतजार करना पड़ा। विशेष जज एस के बक्शी ने शाम 5:25 बजे जैसे ही अपना डायस पर आए और कहा कि सभी आरोपियों को सभी आरोपों से बरी किया जाता है, तो कोर्ट रूम तालियों की गड़गड़ाहट से भर गया। कोर्ट रूम में मौजूद आरोपियों और उनके वकीलों ने जय श्री राम का उद्घोष करके खुशी व्यक्त की। कोर्ट रूम में मौजूद माया कोडनानी ने अपने हाथों को जोड़कर जज की तरफ देखा और कुछ धीमे स्वर में कहा। इसके बाद उन्होंने कोर्ट की जमीन को टच करने नमन किया। कोर्ट रूम से निकलते हुए पूर्व मंत्री माया कोडनानी ने भी फैसले पर खुशी जताई कोडनानी ने कहा कि मैं भगवान का शुक्रिया अदा करती हूं। सत्य की जीत हुई। तो माया कोडनानी के पति सुरेंद्र ओल्ड सिटी स्थित मद्रकाली के मंदिर पहुंचे।

65 आरोपियों ने सुना फैसला
कोर्ट ने जब फैसला सुनाया तो उस वक्त 65 आरोपी कोर्ट रूम में मौजूद थे। दो आरोपी उपस्थित नहीं रह पाए। इस मामले में कुल 86 लोगों के एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें 18 की ट्रायल के दौरान मौत हो गई, जब व्यक्ति को कोर्ट ने छोड़ दिया था। 20 अप्रैल को आए फैसले में 67 आरोपियों के परिवारों को बड़ी राहत मिली। तो वहीं पीड़ियों ने इंसाफ के लिए हाईकोर्ट जाने की बात कही। गोधरा कांड के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों में से कुल 9 की जांच सुप्रीम कोर्ट की एसआईटी ने की थी। यह दूसरा केस है जिसमें आरोपियों को बरी किय गया है। इससे पहले नरोदा पाटिया केस में माया कोडनानी बरी हुई थी, लेकिन बाबू बजरंगी का दोषी करार दिया गया था।

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