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‘जयशंकर ने कभी महसूस नहीं होने दिया…’, PAK मीडिया से बिलावल भुट्टो ने क्या-क्या कहा?

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नई दिल्ली,

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भु्ट्टो जरदारी भारत में हैं. उन्होंने गोवा में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी मीडिया को संबोधित करते हुए जयशंकर के हाथ नहीं मिलाने के बजाए नमस्ते करने के सवाल का भी जवाब दिया.

एससीओ बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने बिलावल से हाथ मिलाने के बजाए हाथ जोड़कर नमस्ते किया था जबकि उन्होंने रूस और चीन के विदेश मंत्रियों से हाथ मिलाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था. इसी घटना पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बिलावल ने कहा कि हम सिंध में एक-दूसरे का इसी तरह स्वागत करते हैं. यह एक सभ्य तरीका है.बिलावल ने कहा कि जयशंकर ने मुझे कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों की वजह से एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में हमारे बीच दूरी आ गई है.

भारत दौरे को लेकर इमरान खान की पार्टी पीटीआई बिलावल और पाक सरकार की आलोचना कर रही है. इससे जुड़े सवाल पर बिलावल ने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री के तौर पर मैं पूरे पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करता हूं. हम सबसे पहले देशहित को रखते हैं. दिल से बहुत से पाकिस्तानी और भारतीय शांति से जीना चाहते हैं. हम नहीं चाहते कि इतिहास हमें कमतर नजर से देखे. हम अपना इतिहास खुद लिखेंगे.

कैसे रहे हैं दोनों देशों के रिश्ते?
1947 में दोनों देशों के आजाद होने के बाद से ही रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. दोनों देश अब तक तीन युद्ध लड़ चुके हैं. इनमें से दो युद्ध कश्मीर के लिए हुए हैं.भारत और पाकिस्तान के रिश्ते काफी तल्ख भरे रहे हैं. आखिरी बार 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के तब के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत आए थे. उनके बाद से किसी भी पाकिस्तानी नेता ने भारत का दौरा नहीं किया है.

हालांकि, इसके बाद 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवाज शरीफ की नातिन मेहरुन्निसा की शादी में शामिल होने पाकिस्तान पहुंचे थे. उसी दिन नवाज शरीफ का जन्मदिन भी था. प्रधानमंत्री मोदी का ये दौरा अचानक हुआ था.2016 में उरी हमला और फिर 2019 में पुलवामा हमले के बाद रिश्ते और बिगड़ गए. पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात बन गए थे. अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइस पॉम्पियो ने दावा किया था कि इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध के करीब आ गए थे.

कितना ताकतवर है SCO?
SCO का गठन 15 जून 2001 को हुआ था. तब चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने ‘शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन’ की स्थापना की. इसके बाद नस्लीय और धार्मिक तनावों को दूर करने के अलावा कारोबार और निवेश बढ़ाना भी मकसद बन गया.शंघाई सहयोग संगठन में 8 सदस्य देश शामिल हैं. इनमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान हैं. इनके अलावा चार पर्यवेक्षक देश- ईरान, अफगानिस्तान, बेलारूस और मंगोलिया हैं.

इस संगठन में यूरेशिया यानी यूरोप और एशिया का 60% से ज्यादा क्षेत्रफल है. दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी इसके सदस्य देशों में रहती है. साथ ही दुनिया की जीडीपी में इसकी एक-चौथाई हिस्सेदारी है.इतना ही नहीं, इसके सदस्य देशों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य (चीन और रूस) और चार परमाणु शक्तियां (चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान) शामिल हैं.

2005 में कजाकिस्तान के अस्ताना में हुई समिट में भारत, पाकिस्तान, ईरान और मंगोलिया ने भी हिस्सा लिया. ये पहली बार था जब SCO समिट में भारत शामिल हुआ था. 2017 तक भारत SCO का पर्यवेक्षक देश रहा. 2017 में SCO की 17वीं समिट में संगठन के विस्तार के तहत भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दिया गया. SCO को इस समय दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन माना जाता है. इस संगठन में चीन और रूस के बाद भारत सबसे बड़ा देश है.

 

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