9 C
London
Saturday, April 18, 2026
Homeराज्यबेगूसराय वाले कन्हैया के बहुरेंगे दिन... कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनकर...

बेगूसराय वाले कन्हैया के बहुरेंगे दिन… कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनकर बजाएंगे सियासी ‘बांसुरी’

Published on

बेगूसराय

बिहार के कन्हैया कुमार के दिन फिरने वाले हैं। कन्हैया कुमार को तो आप जानते ही होंगे। जेएनयू में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे और बेगूसराय से 2019 का सीपीआई के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 2021 में उनका सीपीआई से मोह भंग हो गया और उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। कांग्रेस में उनकी ज्वाइनिंग भी राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई थी। जेएनयू के टुकड़े-टुकड़े गैंग से कन्हैया चर्चा में आए थे। उसके बाद उनके बारे में लोगों को जानने की उत्सुकता बढ़ गई। लोगों की उत्सुकता तब शांत हुई, जब कन्हैया को सीपीआई ने बेगूसराय से लोकसभा का उम्मीदवार बना दिया। चुनाव में उन्हें खासा वोट मिले थे, लेकिन वे तीसरे नंबर पर रहे। बीजेपी के गिरिराज सिंह ने मैदान मार लिया था।

कन्हैया कांग्रेस में जाकर गुम हो गए हैं
कन्हैया को शायद लगा कि देश में वाम दलों का भविष्य अब नहीं है। उन्हें अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा कांग्रेस में पूरी होने की संभावना दिखी। वे कांग्रेस में गए, लेकिन उसके बाद कहीं कोई चर्चा उनके बारे में नहीं हो रही थी। अपनी सभाओं में भारी भीड़ जुटाने का माद्दा रखने वाले कन्हैया कांग्रेस में जाकर बिला गए। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में कन्हैया कभी-कभी जरूर दिख जाते थे, लेकिन जिन लोगों ने उनका भाषण सुना है, उन्हें उनकी गुमशुदगी खल रही थी। तर्कसंगत बातें रखने की कन्हैया में जबरदस्त प्रतिभा है। वे सामने बैठे श्रोताओं को आकर्षित कर लेते हैं, भले ही उनकी मानसिकता कन्हैया से मेल नहीं खाती हो।

कन्हैया दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष बनेंगे ?
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव और दिल्ली में 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी दल सांगठनिक फेरबदल करने लगे हैं। कोई अपने प्रकोष्ठ को ठीक कर रहा तो कोई जिला से लेकर प्रदेश इकाई के पदधारकों को बदल रहा है। बिहार में आरजेडी ने अपनी जिला इकाइयों का पहले पुनर्गठन किया तो बाद में बीजेपी और कांग्रेस ने भी जिला इकाइयों में फेरबदल किया। जेडीयू ने भी अपने प्रकोष्ठों का पुनर्गठन किया है। कांग्रेस अब अन्य प्रदेशों में सांगठनिक फेरबदल करने वाली है। इसी क्रम में कन्हैया कुमार का नाम चर्चा में उभरा है। कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के लिए तीन-चार नामों पर चर्चा चल रही है। इनमें शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित के साथ कन्हैया कुमार के नाम की भी चर्चा है।

कन्हैया दिल्ली के लिए फिट माने जा रहे
कन्हैया कुमार को कांग्रेस दिल्ली के लिए फिट कैंडिडेट मान रही है। दिल्ली में बिहार-यूपी के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। अरविंद केजरीवाल की जीत के पीछे बिहार-यूपी के लोगों की बड़ी भूमिका मानी गई थी। उसके बाद बीजेपी ने इसकी काट निकाली। गायक-अभिनेता से राजनीति तक का सफर करने वाले सांसद मनोज तिवारी को बीजेपी ने दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बना दिया। बीजेपी को इसका फायदा इस रूप में मिला कि बीजेपी ने दिल्ली की सभी सात सीटें जीत लीं। कांग्रेस अब बीजेपी की राह चलने की कोशिश कर रही है। इसलिए कन्हैया कुमार के दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे कन्हैया ?
पहले यह माना जा रहा था कि कन्हैया कुमार को कांग्रेस बिहार से लोकसभा चुनाव में उतारेगी। इसमें दो दिक्कत दिख रही हैं। पहली यह कि बेगूसराय से चुनाव लड़ना उनके लिए मुफीद होता। कांग्रेस के महागठबंधन में रहने से बेगूसराय के लिए उनकी संभावना इसलिए नहीं बन सकती कि वहां से सीपीआई दावा कर रही है। बिहार के दो क्षेत्रों- बेगूसराय और मधुबनी सीपीआई के प्रभाव वाली सीटें मानी जाती हैं। गठबंधन होने के कारण कांग्रेस को दोनों में से कोई भी सीट मिलने की संभावना नहीं है। आरजेडी उम्मीदवार भी बेगूसराय में दूसरे नंबर पर था, इसलिए वह अपनी दावेदारी शायद ही छोड़े। तेजस्वी यादव को कन्हैया वैसे भी पसंद नहीं आते। विपक्षी एकजुटता का फार्मूला अभी तक तय तो नहीं, लेकिन अधिकतर विपक्ष शासित राज्यों से यह मांग उठती रही है कि जिस सूबे में जो दल मजबूत है, वहां उसी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। ऐसे में महागठबंधन के दो ही नेता- नीतीश और तेजस्वी चुनाव की सारी चीजें बिहार में तय करेंगे।

राज्यसभा जा सकते हैं कन्हैया कुमार !
कांग्रेस के अंदरखाने चर्चा यह है कि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी कन्हैया कुमार का पुनर्वास कर सकती है। चार राज्यों में कांग्रेस की अब सरकार हो गई है। बिहार के महागठबंधन ने मदद की तो कन्हैया को बिहार कोटे से ही राज्यसभा भेजा जा सकता है। ऐसा नहीं हो पाया तो किसी भी राज्य से उन्हें राज्यसभा भेजने की कांग्रेस कोशिश करेगी। तब तक उनके लिए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है।

Latest articles

54 वोट से गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा बिल: पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298

मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल से...

जशपुर में ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर का लोकार्पण, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुजुर्गों संग खेला कैरम

जशपुर। विष्णु देव साय ने जशपुर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विकसित अत्याधुनिक डे-केयर...

राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिलाई शपथ

जयपुर। भजनलाल शर्मा ने कहा कि शासन सचिवालय राज्य प्रशासन का सबसे बड़ा निकाय...

More like this

जशपुर में ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर का लोकार्पण, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुजुर्गों संग खेला कैरम

जशपुर। विष्णु देव साय ने जशपुर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विकसित अत्याधुनिक डे-केयर...

राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिलाई शपथ

जयपुर। भजनलाल शर्मा ने कहा कि शासन सचिवालय राज्य प्रशासन का सबसे बड़ा निकाय...