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Friday, March 13, 2026
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चुराचांदपुर से इंफाल वैली तक ‘बंट’ गया मैतेई और कुकी समुदाय? डराने वाले मणिपुर के हालात

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इंफाल

मणिपुर में लगभग एक महीने से जातीय संघर्ष चला आ रहा है। लगातार हिंसा हो रही है। इन जातीय हिंसाओं ने मैतेई और कुकी का इतना अधिक ध्रुवीकरण कर दिया है कि दोनों समुदायों का सह-अस्तित्व समाप्त हो गया है। शीर्ष सुरक्षा सूत्रों की मानें तो यह अस्थिर स्थिति और बदतर हो जाएगी जब तक केंद्र संकट को हल करने के लिए बड़े कदम नहीं उठाता। भूमि पर नियंत्रण और अतीत में अपनी पहचान हासिल करने के लिए समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ संघर्ष करते देखा गया है। मणिपुर में 3 मई से ताजा हिंसा में अब तक सौ से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं तो अनगिनत लोग बेघर हो गए हैं। लोगों को खाने और जरूरत के सामानों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

पूरी तरह से टूटे कुकी और मैतेई के रिश्ते
एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि स्थिति बाहरी तौर पर नियंत्रण में आती दिख रही है, लेकिन अंदर से यह बेहद अस्थिर है। मणिपुर में मैतेई और कुकी दोनों समुदायों के बीच विश्वास पूरी तरह से टूट चुका है। दोनों एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हो गए हैं।

अपने गढ़ों में कुकी और मैतेई
सूत्र ने कहा, ‘बड़ी मात्रा में लोगों को स्थानांतरित किया गया है। अधिकांश कुकी समुदाय के लोग कुकी गढ़ क्षेत्रों में भाग गए हैं। इसी तरह अधिकांश मैतेई चुराचंदपुर जैसे कुकी क्षेत्रों से इंफाल घाटी में मैतेई ठिकानों पर लौट आए हैं। आलम यह है कि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी इसी पैर्टन पर चल रहे हैं और बिना नौकरी की पहवाह किए जान बचाकर अपने इलाकों में आ गए हैं।

एन बीरेन सिंह सरकार पर आरोप
कुकी लोग जारी हिंसा के लिए मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह सहित राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य पुलिस बदमाशों की मदद कर रही है। दूसरी ओर, एमईआईटीवाई केंद्र और राज्य सरकार के साथ निलंबन के संचालन समझौते के तहत कुकी उग्रवादी समूहों पर उनकी जमीन और संपत्ति पर हमलों के लिए आरोप लगा रहे हैं।

‘बिना ठोस कदम के मणिपुर में नहीं आएगी स्थिरता’
सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि जब तक केंद्र कुछ ठोस कदम नहीं उठाएगा, तब तक अस्थिरता बनी रहेगी। हम अपने अधिकतम स्तर पर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम हर ठिकाने पर जवान तैनात नहीं कर सकते। सेना के शीर्ष कमांडर गांवों का दौरा कर रहे हैं और दोनों समुदायों के नागरिक समाज संगठनों से बात कर रहे हैं, लेकिन इस समय कोई बैठक का आधार नहीं है।

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