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कर्नाटक में आरएसएस को दी गई जमीन की होगी समीक्षा, बीजेपी बोली- 1947 से करिए रिव्यू

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नई दिल्ली,

कर्नाटक में कांग्रेस और बीजेपी एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं. RSS और हेडगेवार को लेकर शुरू हुआ ये मसला अब भूमि आवंटन तक पहुंच चुका है, जिसके लिए एक बार फिर 1947 से लेकर अब तक के इतिहास को खंगालने की बात उठने लगी है. हुआ यूं कि, हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक रहे केशव बलिराम हेडगेवार को कायर कहकर स्कूल सिलेबस से हटाने की बात कही गई थी. अब सामने आया है कि राज्य सरकार जमीन आवंटन की समीक्षा करने जा रही है.

कई निविदाएं की गईं रद्द
सरकार का प्लान है कि, बीजेपी कार्यकाल में किन-किन संस्थाओं (संघ या उसके जैसी या संघ से जुड़ी) को जमीन दी गई. इस मामले के सामने आते ही सियासत तेज हो गई. बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि रिव्यू करना ही है तो सिर्फ बीजेपी के 4 साल का नहीं , पर साल 1947 से रिव्यू किया जाए कि किसे किसने कितनी जमीन दी थी. बता दें कि कर्नाटक सरकार आरएसएस से संबद्ध संगठनों सहित कई संगठनों को किए गए भूमि आवंटन पर पिछली भाजपा सरकार के फैसले की समीक्षा करने की योजना बना रही है. बीजेपी सरकार द्वारा जारी ऐसी कुछ निविदाएं रद्द कर दी गई हैं जबकि अन्य पर विचार किया जाएगा. वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार 1947 से शुरू होने वाले भूमि आवंटन पर गौर करे. न कि केवल 2019-2023 से.

बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
असल में कर्नाटक सरकार में मंत्री दिनेश गुंडू राव ने इस मामले को उठाते हुए कहा था कि ‘आरएसएस से जुड़े संस्थानों और संगठनों को राज्य सरकार की बहुत सारी संपत्तियां दी गई हैं.वहीं मंत्री, कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि ‘सरकार विभिन्न संगठनों को दी गई भूमि पर भी विचार करेगी. उन्होंने कहा कि यह जल्दबाजी में किया गया फैसला है. उधर, सरकार के इस फैसले के सामने आते ही बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने आ गए. पूर्व शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने जमीन आवंटन मामले में सरकार पर पलटवार करते हुए निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अगर समीक्षा की ही जानी है तो वह अभी के बीते चार-पांच सालों की नहीं, बल्कि 1947 से अब तक आवंटित की गई जमीनों पर की जाए.

असल में इस पूरे मामले की शुरुआत कर्नाटक सरकार के पाठ्यक्रम में बदलाव किए जाने की फैसले के साथ हुई थी. कांग्रेस एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने कहा था कि ‘बीजेपी और आरएसएस बताएं कि हेडगेवार ने 6 बार अंग्रेजों को मर्सी लेटर्स (दया याचिका पत्र) क्यों लिखे? यह उनकी अपनी दास्तां है कि उन्होंने ये पत्र क्यों लिखे? इसलिए हम इस तरह के कायरता पूर्ण पाठ को अपनी पाठ्य पुस्तक में नहीं रखना चाहते हैं.’इस मामले के सामने आने के बाद से बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए थे. जमीन आवंटन का मामला इसी कड़ी को आगे बढ़ा रहा है.

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