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दो कार्यकारी अध्यक्ष क्यों बनाए, क्या नाराज हैं अजित… सवालों के शरद पवार ने दिए जवाब

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नई दिल्ली,

एनसीपी के 25वें स्थापना दिवस पर पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कई बड़ी घोषणाएं कीं. उन्होंने सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया. इसके बाद उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस की. यहां उन्होंने कई सवालों के जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया कि सभी लोगों के पास कोई न कोई जिम्मेदारी पहले से ही है. इसलिए किसी के खुश होने या न होने का कोई सवाल नहीं है.

शरद पवार ने कहा कि जयंत पाटिल महाराष्ट्र में एनसीपी के अध्यक्ष हैं. अजीत पवार विपक्ष के नेता हैं और उनके पास यह जिम्मेदारी है. किसी को खुश/नाखुश कहना गलत है. जिन लोगों का चयन किया गया है, उनके नाम पिछले महीने के दौरान वरिष्ठ लोगों द्वारा दिए गए थे और आज घोषणा की गई है. कुछ साथियों को ज़िम्मेदारी देनी चाहिए, यही सोचकर हमने फ़ैसला किया है. हमें ख़ुशी है कि हमारे साथियों ने ये ज़िम्मेदारी ले ली है.

सुप्रिया सुले को इसलिए दी केंद्रीय जिम्मेदारी
सुप्रिया सुले को केंद्रीय जिम्मेदारी दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अजित पवार महाराष्ट्र की कमान संभाल रहे हैं. सुप्रिया सुले का यह तीसरा कार्यकाल है. वह लोकसभा में अनुभवी हैं. वह संसदीय जिम्मेदारी निभा सकेंगी. वह आस-पास के राज्यों का काम देख सकती हैं. जो सांसद हैं, उनकी यहां (दिल्ली) जरूरत है. प्रफुल्ल पटेल को उन राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है, जिनके वे करीब रहते हैं, जहां उनके काफी निजी संपर्क हैं.

शरद पवार ने कहा कि अगले महीने में एक जेनरल बॉडी की मीटिंग बुलाएंगे. अजीत पवार के बारे में जो कहा जा रहा है कि वो नाराज़ है वो बिल्कुल ग़लत है. अजित पवार के पास महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता की ज़िम्मेदारी है. दोनों कार्यकारी अध्यक्ष का नाम साथियों ने ही सुझाया था तब इनका नाम फाइनल किया गया है.

23 जून को पटना में विपक्षी दल करेंगे बैठक
उन्होंने कहा कि जब लोकसभा के लिए और 3-4 राज्यों में विधानसभा के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी, तो हम विपक्षी दलों के साथ चर्चा करेंगे और साथ काम करेंगे. आप जानते हैं कि हम 23 जून को पटना में बैठक कर रहे हैं. हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि हम लोकसभा के लिए मिलकर कैसे काम कर सकते हैं. मुझे लगता है कि हम कुछ मुद्दों पर सहमत हो सकते हैं.

पटना की बैठक हमें नई दिशा देगी: पवार
पवार ने कहा कि एक सुझाव है कि जहां बीजेपी मजबूत है, वहां हमें गैर-बीजेपी से एक उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए. इस पर पटना में चर्चा होगी. पटना की बैठक हमें नई दिशा देगी. हम लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ईमानदारी से काम करेंगे. हमने फैसला किया कि 3-4 राज्यों में अगर एक सहयोगी काम करता है, तो इससे मदद मिलेगी. आम चुनाव के लिए हमारे पास लगभग एक साल है.

एनसीपी के दो कार्यकारी अध्यक्ष क्यों?
एनसीपी के दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पिछले 2 महीने से हम चर्चा कर रहे थे कि देश के हिसाब से दो कार्यकारी अध्यक्ष हों और उन्हें 3-4 राज्यों की जिम्मेदारी दी जाए. लोग चाहते थे कि जिन लोगों को चुना गया है, उन्हें जिम्मेदारी दी जाए. मैं चाहता था कि मैं खुद उन्हें जिम्मेदारी दूं. इससे पार्टी/संगठन को मजबूत करने में मदद मिलेगी. बेशक, मैं लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करूंगा. मैं गैर-बीजेपी ताकतों को एक साथ लाने पर ध्यान केंद्रित करूंगा. वहीं मेरा ज्यादातर काम होगा.

कौन होगा विपक्ष का पीएम फेस?
पीएम फेस कौन होगा? इस पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा हमारे सामने नहीं है. इसकी (पीएम चेहरे की) कोई जरूरत नहीं है. 1976/77 में किसी को प्रोजेक्ट नहीं किया गया था. चुनाव के बाद जनता पार्टी बनी और जो चुने गए, उन्होंने मोरारजी देसाई को चुना. अगर 1977 में हो सकता है तो अब भी हो सकता है. क्या तय हुआ है, अभी मुझे नहीं पता. विचार लोगों को एक विकल्प देने का है. ऐसा तभी हो सकता है जब हम साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला करें.

‘गैर बीजेपी पार्टियों को साथ आना चाहिए’
उन्होंने कहा कि मैं उस गठबंधन का प्रस्ताव इस आधार पर कर रहा हूं कि जहां भी कोई पार्टी मजबूत है, जहां कांग्रेस मजबूत है, वहां कांग्रेस से गठबंधन करना चाहिए. जहां क्षेत्रीय ताकतें मजबूत हैं, उनके साथ गठबंधन करें. हम देखेंगे कि उस बैठक में कौन-कौन आते हैं (23 जून). मुझे लगता है कि ममता आ रही हैं. जहां तक केजरीवाल की बात है, हम कहते हैं कि गैर-बीजेपी पार्टियों को एक साथ आना चाहिए, यही हमारा प्रयास होगा.

‘महाराष्ट्र में ध्रुवीकरण कर रही बीजेपी’
10-12 महीने की बात है, रोडमैप तैयार किया जा सकता है. प्रमुख मुद्दा यह है कि क्या चुनाव मिलकर लड़ना है. बाकी की रणनीति बनाई जा सकती है. कर्नाटक में उन्होंने (बीजेपी) हनुमान के नाम का इस्तेमाल किया. आप चुनाव परिणाम देख सकते हैं, लोगों ने इसे कैसे स्वीकार नहीं किया. महाराष्ट्र में, उन्होंने ध्रुवीकरण करने की कोशिश की है. एक अभियान है. मुझे विश्वास है कि महाराष्ट्र के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे.

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