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डिटर्जेंट बनाने वाले केमिकल से बना दी कफ सिरप! मैरियन बायोटेक पर गंभीर आरोप, 19 बच्चों की हुई थी मौत

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नई दिल्ली

पिछले साल उज्बेकिस्तान में कफ सिरप पीने से 19 बच्चों की मौत हो गई थी। दावा किया गया था कि यह कफ सिरप नोएडा की कंपनी मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने बनाई थी। अब रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस कफ सिरप को बनाने में लीगल फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट की बजाय जहरीले इंडस्ट्रीयल-ग्रेड इनग्रेडिएंट का इस्तेमाल हुआ था। मामले से जुड़े दो सूत्रों ने एजेंसी को यह जानकारी दी।

माया केमटेक से खरीदे थे इनग्रेडिएंट
रिपोर्ट के अनुसार मैरियन बायोटेक ने माया केमटेक इंडिया से प्रोपलीन ग्लाइकोल (PG) इनग्रेडिएंट खरीदा था। लेकिन मैरियन इन्वेस्टिगेशन की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार, माया के पास फार्मास्युटिकल-ग्रेड इनग्रेडिएंट बेचने का लाइसेंस नहीं था। वह केवल इंडस्ट्रीयल-ग्रेड इनग्रेडिएंट में ही ट्रेड करती है। मामले की जांच के चलते पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर सूत्र ने कहा, ‘हमें नहीं पता था कि मैरियन इसका उपयोग कफ सिरप बनाने के लिए करने जा रहा है। हमें नहीं बताया गया था कि हमारे इनग्रेडिएंट कहां यूज हो रहे हैं।’

डिटर्जेंट बनाने में यूज होता है यह इनग्रेडिएंट
दो सूत्रों ने बताया कि कफ सिरप इंडस्ट्रीयल ग्रेड पीजी से बनाया गया था। यह एक ऐसा जहरीला पदार्थ है, जिसका यूज लिक्विड डिटर्जेंट, एंटीफ्रीज, पेंट, कोटिंग्स के साथ ही कीटनाशकों की प्रभाशीलता बढ़ाने के लिए किया जाता है। एक दूसरा सोर्स जो इन्वेस्टिगेटर भी है, ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘मैरियन ने कमर्शियल-ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकोल खरीदा था।’ फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए राष्ट्रीय मानकों का हवाला देते हुए इसने आगे कहा, ‘उन्हें इंडियन फार्माकोपिया-ग्रेड लेना चाहिए था।’

यूज करने से पहले नहीं की जांच
इन्वेस्टिगेटर ने कहा कि मैरियन ने उज्बेकिस्तान को बेचे जाने वाले सिरप में यूज करने से पहले इनग्रेडिएंट का टेस्ट भी नहीं किया था। भारत के औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन नियम कहते हैं कि निर्माता अपने द्वारा उपयोग की जाने वाली सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं।

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