नई दिल्ली
एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को शनिवार रात सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने जमानत दे दी। इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने सीतलवाड़ की जमानत अर्जी खारिज करते हुए तत्काल सरेंडर करने को कहा था। सीतलवाड़ इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच में मामले पर मतभेद होने पर इसे तीन जजों की बेंच के पास भेज दिया गया। तीन जजों की बेंच ने सीतलवाड़ को तत्काल राहत दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि एक जस्टिस ने हाई कोर्ट में आदेश दिया और हफ्ते भर का प्रोटेक्शन नहीं दिया जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम प्रोटेक्शन दिया था। इसे एक हफ्ते के लिए एक्सटेंड करना आदर्श स्थिति है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा ये साधारण केस नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा 8 दिन अंतरिम प्रोटेक्शन बढाने में क्या दिक्कत है। कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर अंतरिम जमानत बढ़ा दी गई तो आसमान नहीं गिर जाएगा। इससे पहले तीस्ता की ओर से सीयू सिंह और अपर्णा भट्ट ने जमानत की मांग की, वहीं सॉलिसिटर जनरल ने विरोध किया।
क्या है पूरा मामला
सीतलवाड़ पर 2002 के गुजरात दंगों के बारे में गलत सबूत गढ़ने के आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने की साजिश रची थी। मामले में गुजरात पुलिस ने सीतलवाड़ को 25 जून, 2022 को अरेस्ट भी किया था। लेकिन, सितंबर 2022 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी। अब गुजरात हाई कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने को कहा है, जिसके खिलाफ सीतलवाड़ ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है।
