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क्या दशमत के पैर धोने से धुल जाएगा पाप? समझिए शिवराज के पश्चाताप की इनसाइड स्टोरी

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भोपाल

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेशाब कांड पीड़ित दशमत रावत को सीएम हाउस में बुलाकर माफी मांगी। शिवराज ने दशमत के पैर धोये, तिलक लगाया, फूल माला पहनाई और चरण रज को सिर से लगाया। दशमत का यह स्वागत सीएम का आदिवासी समाज से प्यार से ज्यादा डैमेज कंट्रोल दिखा। सीएम शिवराज को ऐसा करना पड़ा, क्योंकि प्रवेश शुक्ला की पेशाब करने वाली हरकत ने आदिवासी समाज के वोटर में पैठ बनाने की बीजेपी के प्लान को धो दिया था। सवाल यह है कि क्या सीएम शिवराज पैर धोकर प्रवेश के पाप को धो पाएंगे। सबसे बड़ा सवाल, दशमत से सीएम शिवराज की माफी उन आदिवासी वोटरों को बीजेपी की ओर वापस ले आएगी, जो 2018 में पार्टी से दूर हो गए थे।

मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटरों की अहमियत
मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटर महत्वपूर्ण हैं। प्रदेश की 47 सीट शिड्यूल ट्राइव के लिए रिजर्व है। 2018 के विधानसभा चुनाव में इनमें 31 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। बीजेपी के खाते में महज 16 सीटें आई थीं। इससे पहले हुए 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 31 सीटें मिली थीं। 2003 में तो बीजेपी को 37 सीटों पर जीत मिली थी। आदिवासी वोटरों के छिटकने के कारण ही बीजेपी को 2018 में 15 साल बाद विपक्ष में बैठना पड़ा था। कमलनाथ सरकार के जाने के बाद बीजेपी ने आदिवासी वोटरों को लुभाने के लिए खास प्लानिंग की। कोल महोत्सव जैसे आयोजन हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भी विंध्य क्षेत्र में जनसभा के लिए उतारा। अमित शाह सतना के शबरी महोत्सव में आदिवासी वोटरों को रिझाने उतरे थे। नरेंद्र मोदी पिछले 3 महीने में चार बार मध्यप्रदेश का दौरा चुके हैं। इन दौरों में वह आदिवासी इलाकों में ही फोकस करते रहे। चार दिन पहले भी नरेंद्र मोदी शहडोल के पकारिया में आदिवासी बच्चों को दुलारते-पुचकारते नजर आए थे।

आदिवासी माफ करेंगे या नहीं, चार महीने में पता चल जाएगा
आंकड़ों के नजरिये से देखें तो मध्यप्रदेश में ट्राइबल पॉपुलेशन करीब 1.5 करोड़ है। रिजर्व सीटों के अलावा ट्राइबल वोटर प्रदेश की 35 सीटों पर प्रभावी हैं। इस तरह आदिवासी वोटरों की अहमियत मध्यप्रदेश की करीब 85 विधानसभा सीटों पर है। इन वोटरों का जलवा है कि कांग्रेस भी इन सीटों पर कार्यक्रम कर रही है। 2018 में जीत से उत्साहित कांग्रेस किसी भी सूरत में अपने वोट को खोना नहीं चाहती है। ऐसे में प्रवेश शुक्ला ने आदिवासी पर पेशाब कर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस मसले पर शिवराज सरकार की लानत-मलामत कर दी। खुन्नस में सरकार ने प्रवेश के घर पर बुलडोजर चलवा दिए। पुलिस से धक्के लगवाने वाले वीडियो भी सामने आया। अब सीएम शिवराज सिंह चौहान खुद दंडवत की मुद्रा में आए। दशमत से माफी मांगने के बाद क्या आदिवासी समाज बीजेपी को माफ करेगा, इसका पता तो चार महीने बाद ही पता चल जाएगा। अभी तो देखना यह है कि प्रवेश शुक्ला को इसकी सजा क्या मिलेगी ?

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