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ईडी के एक्शन पर बिलबिला उठा चीन, भारत को बताया अमेरिका का पिछलग्गू, जमकर उगला जहर

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बीजिंग

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को चीन मुक्त बनाने के लिए अमेरिका का पिछलग्गू बन गया है। इससे भारत को केवल नुकसान ही होगा। ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा कि हाल ही में भारत ने चीनी कंपनियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। जून में, भारत सरकार ने कहा कि श्याओमी और ओप्पो जैसी कंपनियां बारतीय नागरिकों को अपने भारतीय मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स में सीईओ, सीओओ, सीएफओ, सीटीओ और अन्य प्रमुख पदों पर नियुक्त करे। इसके अतिरिक्त, 2022 में भारतीय वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने श्याओमी की भारतीय सहायक कंपनी को सीधे लगभग 4.8 बिलियन युआन ($725 मिलियन) का जुर्माना लगाया। 2020 के बाद से भारत ने चीन के खिलाफ मजबूत रुख दिखाते हुए सैकड़ों चीनी ऐप को प्रतिबंधित कर दिया है।

जयशंकर और वांग यी की मुलाकात का किया जिक्र
ग्लोबल टाइम्स ने शुक्रवार को इंडोनेशिया में भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेता वांग यी के साथ मुलाकात का जिक्र किया। उसने लिखा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और सीपीसी केंद्रीय समिति के विदेश मामलों के आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी ने जयशंकर से मुलाकात के दौरान भारत से चीनी कंपनियों के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल प्रदान करने का आग्रह किया। दोनों देशों के नेताओं के बीच यह मुलाकात आसियान शिखर सम्मेलन के इतर हुई है।

भारत पर नियमों के खिलाफ कार्रवाई का लगाया आरोप
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का पिछलग्गू ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया कि भारत ने अर्थशास्त्र के नियमों के विरुद्ध चीनी उद्यमों के खिलाफ कार्रवाई की है। उसने जहर उगलते हुए कहा कि भारत का ये कदम चीन से आगे निकलने की संकीर्ण आर्थिक भावना को प्रदर्शित करता है। ग्लोबल टाइम्स ने शेखी बघारते हुए कहा कि चीन एक प्रमुख ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग वाला देश है। ऐसे में भारत का उद्योग मेड इन चाइना के बिना प्रगति नहीं कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने चीन से बड़ी संख्या में उत्पादों और दूसरे कंपोनेंट्स का आयात किया है। यह प्रभावी रूप से भारतीय कंपनियों की उत्पादन लागत को कम करता है, उत्पादन क्षमता में सुधार करता है, भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाता है और यूरोपीय और अमेरिकी देशों में भारत के निर्यात को बढ़ाता है।

चीनी कंपनियों के भारत के विकास में योगदान का किया जिक्र
ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा कि दुनिया में स्मार्ट फोन उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली चीनी कंपनियों ने हाल के वर्षों में भारत में निवेश किया है। इससे भारत को मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा मिला है। इसके साथ ही भारत के कार्यबल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। चीन और भारत के बीच यग पूरक सहयोग संरचना आर्थिक वैश्वीकरण के तहत आर्थिक विकास के समग्र कानूनों के अनुरूप है। ग्लोबल टाइम्स ने तो चीनी कंपनियों को भारत में विदेशी निवेश को बढ़ाना मिलने और भारत में आई डिजिटल क्रांति के लिए भी जिम्मेदार बता दिया।

भारत के खिलाफ जमकर उगला जहर
ग्लोबल टाइम्स ने भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए लिखा कि भारत डिजिटल आर्थिक विकास के क्षेत्र में चीन, अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देशों और क्षेत्रों से बहुत पीछे रहने की अपनी मौजूदा स्थिति को नजरअंदाज करता है। भारत सेल फोन जैसे प्रमुख प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में चीन के साथ तेजी से आगे बढ़ने और अर्थव्यवस्था के डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। भारत स्मार्ट फोन मैन्यूफैक्चरिंग में चीन की स्थिति को खत्म करना चाहता है। ग्लोब टाइम्स ने यहां तक लिखा कि इसके विपरीत बाहरी दुनिया आम तौर पर भारत की महत्वाकांक्षाओं को अधिक महत्व नहीं देती है।

ग्लोबल टाइम्स ने बीजेपी पर भी साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया कि भारत की चीन विरोधी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। साल 2024 भारत में चुनावी साल है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तीसरा कार्यकाल जीतने के लिए उत्सुक है। भाजपा लगातार राष्ट्रवाद का झंडा लहरा रही है और समर्थन जुटाने के लिए “चीन विरोधी” कार्ड खेलने का प्रयास कर रही है। वास्तव में, दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देशों और शाश्वत पड़ोसियों के रूप में, चीन और भारत के बीच स्पष्ट रूप से मतभेदों की तुलना में अधिक साझा हित हैं। चीन ने हमेशा चीन-भारत संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा और संभाला है। मुश्किल समय में भी चीन की स्थिति कभी डगमगाई नहीं है।

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