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Wednesday, March 18, 2026
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होलोकॉस्ट क्या था जिसे ‘गलत’ दिखाने पर भारत की इस फिल्म पर भड़का इजरायल, प्रतिबंध की मांग

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तेल अवीव

इजरायल में बॉलीवुड फिल्म बवाल को लेकर बवाल मचा हुआ है। वरुण धवन और जान्हवी कपूर की इस फिल्म में होलोकॉस्ट को गलत तरीके से दिखाने का आरोप है। इजरायल के कई यहूदी संगठनों ने अमेजन को पत्र लिखकर अपने प्लेटफॉर्म से इस फिल्म को हटाने की मांग की है। इस फिल्म पर भारत में इजरायली दूतावास ने भी बयान जारी किया है और भावनाओं का सम्मान करने की अपील की है। कई यहूदी संगठनों का आरोप है कि लाखों लोगों की सुनियोजित हत्या और अत्याचार को फिल्म में बहुत संवेदनहीन तरीके से दिखाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि होलोकॉस्ट क्या था और इजरायल में इसे लेकर लोगों में ऐसी भावनाएं क्यों हैं।

इजरायली दूतावास ने क्या कहा
इजरायली दूतावास ने ट्वीट में लिखा कि हालिया फिल्म ‘बवाल’ में होलोकॉस्ट के महत्व को तुच्छ बताए जाने से इजरायली दूतावास परेशान है। फिल्म में कुछ शब्दावली का गलत इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, हम मानते हैं कि इसके पीछे कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था। हम उन सभी से आग्रह करते हैं जो होलोकॉस्ट की भयावहता के बारे में पूरी तरह से जागरूक नहीं हैं, वे इसके बारे में खुद को शिक्षित करें। हमारा दूतावास इस महत्वपूर्ण विषय पर शैक्षिक सामग्री का प्रचार-प्रसार करने के लिए लगातार काम कर रहा है और हम होलोकॉस्ट से प्राप्त सार्वभौमिक सबक की बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए सभी व्यक्तियों के साथ बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

इजरायली राजदूत ने जताया दुख
भारत में इजरायल के राजदूत नोर गिलोन ने कहा कि मैंने बवाल फिल्म नहीं देखी और न ही देखूंगा, लेकिन जो मैंने पढ़ा है, उसमें शब्दावली और प्रतीकवाद का खराब चयन किया गया है। होलोकॉस्ट का तुच्छीकरण सभी को परेशान करना चाहिए। मैं उन लोगों से आग्रह करता हूं जो होसोकॉस्ट की भयावहता के बारे में पर्याप्त नहीं जानते हैं कि वे इसके बारे में खुद को शिक्षित करें।

होलोकॉस्ट क्या था
होलोकॉस्ट समूचे यहूदी समुदाय को जड़ से खत्म कर देने का सोचा-समझा और योजनाबद्ध प्रयास था। इजरायल इसे नाजी जर्मन शासन और उसके सहयोगियों के द्वारा लगभग साठ लाख यहूदियों का व्यवस्थित, सरकार प्रायोजित उत्पीड़न और हत्या बताता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया थी जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय 1933 और 1945 के बीच पूरे यूरोप में हुई। होलोकॉस्ट की आधिकारिक शुरुआत 1933 से मानी जाती है, जब जर्मनी में हिटलर की नाजी पार्टी सत्ता में आई। इसका अंत 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के खात्मे के साथ हुआ। इन मारे गए यहूदियों की याद में इजरायल समेत पूरी दुनिया में हर साल 27 जनवरी को होलोकॉस्ट मेमोरियल डे मनाया जाता है।

होलोकॉस्ट कहां हुआ?
होलोकॉस्ट की शुरुआत नाजी जर्मनी में हुई थी, जो देखते ही देखते पूरे यूरोप में फैल गया। खासकर उन देशों में जो हिटलर और नाजी जर्मनी का समर्थन कर रहे थे। इसने यूरोप की लगभग पूरी यहूदी आबादी को प्रभावित किया। उस वक्त यानी 1933 में यूरोप में यहूदियों की संख्या 90 लाख के आसपास थी। जनवरी 1933 में एडॉल्फ हिटलर को चांसलर नियुक्त किए जाने के बाद जर्मनी में होलोकॉस्ट शुरू हुआ। उसने यहूदियों को जर्मन आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन से बाहर कर दिया और उन पर देश छोड़ने का दबाव बनाने लगा। धीरे-धीरे यहूदियों का उत्पीड़न जर्मनी से बाहर भी फैल गया। 1938 में हिटलर ने नाजी जर्मनी का विस्तार करना शुरू किया और जर्मनी के पड़ोसी ऑस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक और सुडेटेनलैंड पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सितंबर 1939 में जर्मनी ने पोलैंड पर हमला शुरू किया। अगले दो साल में जर्मनी ने सोवियत संघ के पश्चिमी हिस्से पर कब्जा कर लिया। उसने इटली, हंगरी, रोमानिया और बुल्गारिया के साथ गठबंधन बनाया जिसमें जापान भी शामिल था।

ऑश्वित्ज में सबसे ज्यादा यहूदियों की हुई हत्या
हिटलर ने पोलैंड का ऑश्वित्ज में यहूदियों के लिए सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर खोला था। हिटलर के किलर मशीन कहे जाने वाले एसएस के सैनिक पूरे यूरोप से यहूदियों को पकड़कर यहां लाते थे। उनमें से जो कोई काम लायक नहीं होता था, उसे गैस चेंबर में डालकर मार दिया जाता था। जो काम लायक बचता था, उससे अमानवीय तरीसे के सिर्फ काम के लायक रहने के लिए जिंदा रखा जाता था। कैंप में सभी यहूदियों की पहचान मिटाकर उनके हाथों पर एक नंबर लिख दिया जाता था। यहूदियों को न तो खाना दिया जाता था और ना ही पानी। बीमार पड़ने पर उन्हें मार दिया जाता था। जो कोई विरोध करता था, उसे इतनी खौफनाक मौत दी जाती थी, जिसे देखकर कोई बगावत की जुर्रत न कर सके।

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