स्थिति ऐसी भयंकर हो चुकी थी जिसको बयां तक कर पाना मुश्किल है। हमारी ही धरती है हमारा ही मंदिर है और यह तो हरियाणा का ही क्षेत्र है। लेकिन जहां पर एक विशेष समुदाय के लोग रहते हैं, वहां पर तो जाने की सोच भी नहीं सकते। मैं खुद भी यात्राएं लेकर जाता रहा हूं। लेकिन ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। ऐसा मंजर सिर्फ फिल्मों में देखा था, मौत को बड़े नजदीक से देखा। यह कहना है करनाल के हनुमान मंदिर के पुजारी अजीत शास्त्री का, जो नूंह में विश्व हिंदू परिषद की जलाभिषेक रैली में शामिल हुए थे।
उन्होंने बताया कि हरियाणा के नूंह में विश्व हिंदू परिषद की यात्रा में शामिल होने के लिए प्रदेश भर से श्रद्धालु गए थे। लेकिन जब वहां हिंसा भड़की तो काफी लोग वहां फंस गए थे। करनाल के हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित अजीत शास्त्री भी इस हिंसा के दौरान नूंह में फंस गए थे। उन्होंने बताया कि यहां से भव्य यात्रा धार्मिक स्थानों के लिए जाती रहती है। मेवात में भी यात्रा गई थी। वहां पर नलहड़ गांव है, वहां पर महानलेश्वर मंदिर है और माता मनसा देवी मंदिर है। उस स्थान पर एक विशेष समुदाय के लोगों की संख्या बहुत अधिक है और वो वहां पर मंदिरों पर कब्जा करने व हटाने की कोशिश में लगे रहते है।
कोशिश रहती है कि वहां कोई कब्जा न हो इसलिए विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल व अन्य संस्थाएं एक दूसरे का सहयोग करती है। धार्मिक यात्रा में हिंदूओं की संख्या पहले से कई हजार गुणा बढ़ती जा रही है वहीं एक विशेष समुदाय के लोगों का प्रभाव कहीं न कहीं कम ना हो जाए। इसको लेकर उन्होंने पहले से ही प्लानिंग बना ली थी। करीब 15 से 20 हजार की संख्या में वहां इक्कठे हुए थे और अलग अलग जो 3 मंदिर है वहां पर जा रहे थे। वहां पर एक विशेष समुदाय की तरफ से हिंदूओं पर हमला कर दिया जाता है।
नलहड़ के पास शिव मंदिर है वहां पर फंसे हुए थे
साढ़े 12 बजे के आसपास पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। जिसके बाद वहां पर अफरा तफरी मच गई और हम लोग वहां पर गांवों में फंसे हुए थे। इसके बाद पत्थरबाजी इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि वहां पर जो कुछ पुलिसकर्मी थे वे भी वहां से जा चुके थे। पुलिस को भी कॉल करते रहे लेकिन सात बजे तक न तो पुलिस आई थी और न ही कोई आर्मी आई हुई थी। हम नलहड़ के पास शिव मंदिर है वहां पर फंसे हुए थे। वहां पर भारी संख्या में लोग फंसे हुए थे। सभी ने वहां पर मंदिर के अंदर ही रहकर भगवान का नाम लेना शुरू किया। आसपास पहाड़ियां हैं , जहां से फायरिंग और पत्थरबाजी लगातार हो रही थी।
ऐसे बची जान
जब उपद्रवियों को पता चला कि वहां पर मंदिर के अंदर ही लोग फंसे हुए है और वहीं पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें कुछ को गोली लगी और अफरा तफरी वहां पर मच गई। कई वाहनों में एक साथ आग लगा दी गई। उपद्रवियों की सिर्फ एक ही प्लानिंग थी कि मंदिर में जो भी हैं वह बचे नहीं। आठ बजे के आसपास वहां पर पुलिस आई और वहां फंसे लोगों को पुलिस लाइन लेकर गए। वहां पर हर जगह फोर्स तैनात रही। जिसके बाद लोग वहां से निकल पाए।
