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कद्दावर प्रदीप सिंह वाघेला से गुजरात बीजेपी ने क्यों किया किनारा? जानिए इनसाइड स्टोरी

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अहमदाबाद

गुजरात के बीजेपी के सबसे पावरफुल प्रदेश महामंत्री प्रदीप सिंह वाघेला के इस्तीफे के बाद राजनीति गर्म है। राजनीतिक हल्कों में अटकलें लग रही हैं कि आने वाले दिनों में बीजेपी में कुछ और इस्तीफे देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश महामंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद वाघेला  ने दावा किया है कि अगले कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा। कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक दावा किया जा रहा है कि राज्य सरकार के एक मंत्री का भी इस्तीफा हो सकता है। 2024 के चुनावों की तैयारियों में बीजेपी में एकाएक इस्तीफों से जमीनी कार्यकर्ता हतप्रभ हैं। अब देखना होगा कि पार्टी इस महीने के आखिर तक कैसे अंदरुनी चुनौतियों से पार पाकर आगे निकलती है।

दूसरे महामंत्री का इस्तीफा
अप्रैल महीने में प्रदेश बीजेपी के महामंत्री भार्गव भट्‌ट की विदाई हुए थी, लेकिन तब इतनी चर्चा नहीं हुई जितनी चर्चा प्रदीप सिंह वाघेला के इस्तीफे को लेकर हो रही है। इसकी बड़ी वजह है कि प्रदीप सिंह वाघेला कड़ा संघर्ष करके ऊपर पहुंचे थे। गुजरात में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) के मजबूत संगठन को श्रेय उनको दिया जाता है। अहमदाबाद जिले की साणंद तालुका के बकराना गांव में जन्में प्रदीप सिंह का शुरुआत से झुकाव संघ की तरफ था। वे संघ की विचारधारा से प्रभावित थे। यही वजह रही कि गुजरात यूनिवर्सिटी में पहुंचे पर वाघेला एबीवीपी से जुड़ गए। आगे चलकर वे एबीवीपी के पूर्णकालिक संगठन मंत्री बने।

फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा
संगठन मंत्री बनने के बाद वाघेला को कच्छ में एबीवीपी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई। वाघेला ने कच्छ में वडापाव और दावेली खाकर वहां लगातार प्रवास करके कच्छ में एबीवीपी को मजबूत किया। इसके बाद वाघेला अहमदाबाद लौटे और फिर अहमदाबाद में एबीवीपी के लिए काम किया। युवा छात्र नेता की छवि बना चुके वाघेला की बीजेपी युवा मोर्चा में एंट्री कार्यकारिणी के सदस्य के तौर पर हुई। मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी को जब भाजयुमो गुजरात का अध्यक्ष बनाया गया तो वाघेला उपाध्यक्ष बने। इसे दौरान भी वाघेला ने मजबूती से काम किया। इस नतीजा यह हुआ कि उन्हें भाजयुमो गुजरात का अध्यक्ष बना दिया गया। अच्छे काम को देखते हुए वाघेला को एक और कार्यकाल का विस्तार दिया गया।

लगातार दो बार संभाला मोर्चा
बीजेपी युवा मोर्चा गुजरात के अध्यक्ष की दो बार जिम्मेदारी संभाल चुके वाघेला को इसके बाद बीजेपी के मुख्य संगठन में एंट्री मिली और उन्हें प्रदेश मंत्री बनाया गया। तीन साल पहले जब राज्य की कमान नवसारी के सांसद सीआर पाटिल के हाथों में आई तो पाटिल ने वाघेला को अपनी टीम में जगह देते प्रदेश महामंत्री बना दिया और उन्हें पार्टी के प्रदेश कार्यालय श्री कमलम् का भी चार्ज सौंप दिया। इसके बाद वाघेला सबसे ज्यादा पावरफुल महामंत्री बन गए। राज्य में निकाय चुनावों और उप चुनावों में वाघेला ने मजबूती से काम किया। इसके बाद 2022 के चुनावा में उन्होंने पाटिल की रणनीति को जमीन पर उतारा।

कहां पर गलती कर बैठे?
कहते हैं वाघेला ने जिस तरह से कमलम् और पार्टी के संगठन पर अपनी पकड़ बनाई। उससे एक तबका खुश नहीं था, वह लगातार वाघेला पर नजर रखे हुए था। चर्चा है कि गुजरात यूनिवर्सिटी के सीनेट सदस्य रहे वाघेला से पहली गलती यह हुई कि वे खुद यूनिवर्सिटी से बाहर नहीं निकाल पाए। यूनिवर्सिटी में दखलंदाजी उनके लिए परेशानी का सबब बन गई। इसी साल जून महीने में यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. हिमांशु पंड्या ने कार्यकाल पूरा करके यूनिवर्सिटी से निकल गए। चर्चा है कि इसके बाद जीयू के पूर्व वीसी पंड्या ने बीजेपी ही एक बड़े नेता की मदद से उच्च स्तर पर शिकायत की। इसके बाद वाघेला को इस्तीफा देना पड़ा। यह भी कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले की जांच अहमदाबाद पुलिस की एसओजी कर रही है।

तो फिर क्यों हुआ इस्तीफा?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वाघेला के ऊपर सीधे आक्षेप नहीं थे फिर क्यों उनका इस्तीफा लिया गया? इसके उत्तर है कि वाघेला के पद पर रहने से स्थितियां और बिगड़ सकती थीं। वे पूरे कमलम् को संभाल रहे थे। ऐसे में आने वाले दिनों में विपक्ष इसे मुद्दा बना सकता था। इससे पार्टी को अधिक नुकसान हो सकता है। पार्टी ने अतरिक्त सर्तकता के तौर पर वाघेला से इस्तीफा लिया। वाघेला को इस्तीफे को लेकर जो दूसरी एक और चर्चा है उसके अनुसार वाघेलाप्रदेश बीजेपी प्रमुख सीआर पाटिल के सबसे करीबी थे। ऐसे में पहले पाटिल को खिलाफ पर्चा कांड (गुजराती में पत्रिका कांड) हुआ। इसके बाद वाघेला को मामले को तूल दिया गया। यह एक अंदरुनी राजनीति का हिस्सा है। प्रदेश बीजेपी में एक ऐसा वर्ग है जो पाटिल को प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पसंद नहीं करता है। इसकी बड़ी वजह है कि पाटिल एक सेंट्रल फोर्स के तौर पर काम करते हैं।

इस्तीफे के पीछे क्या है संदेश?
प्रदीप सिंह वाघेला के इस्तीफा भले ही चौंकाने वाला लग रहा है, लेकिन पार्टी संगठन से जुड़े नेताओं का कहना चूंकि गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य ऐसे में पार्टी ने मामला गंभीर नहीं होने के बाद एक झटके इस्तीफा लेकर कड़ा संदेश देने की कोशिश की है, ताकि 2024 के चुनाव से पहले पार्टी को और अधिक किसी मामले में परेशानी का सामना न करना पड़े। वाघेला की कमलम् से विदाई की भरपाई करना पार्टी के लिए आसान नहीं है। प्रदेश में कुल पांच महामंत्री हैं। इनमें रत्नाकर संगठन के महामंत्री हैं। भार्गव भट्‌ट और प्रदीप सिंह वाघेला के इस्तीफे के बाद अब सिर्फ दो महामंत्री बचे हैं। इनमें रजनीभाई पटेल और विनोद चावड़ा शामिल हैं। अब देखना दिलचस्प होता है कि पार्टी दो महामंत्रियों के स्थान किसे मौका देती है या फिर आधे भरे गिलास के साथ आगे बढ़ती है।

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