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Saturday, March 21, 2026
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‘नेहरू नाम से नहीं, काम से जाने जाते थे…’ मेमोरियल का नाम बदलने पर बोले राहुल गांधी

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नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने पर शुरू हुई सियासत के बीच अब इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बयान सामने आया है. राहुल गांधी ने कहा है कि नेहरूजी की पहचान उनके नाम से नहीं, बल्कि उनके कर्म (काम) के कारण है.वहीं, कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने पर सरकार का घेराव किया है. उन्होंने कहा,’यह नाम इसलिए नहीं बदला गया है किृ दूसरे प्रधानमंत्रियों का काम दिखाना चाहते हैं, बल्कि वह नेहरूजी का नाम दबाना चाहते हैं.’

बदला नहीं जा सकता इतिहास
उन्होंने कहा कि आप (सरकार) आलीशान प्रधानमंत्री निवास बना रहे हैं तो आप आलीशान प्रधानमंत्री संग्रहालय भी बना सकते थे. हर कोई कहता है कि नेहरू मेमोरियल फंड अच्छा काम करता था. मनगढ़ंत कहानियों से इतिहास नहीं बदला जा सकता है. संदीप दीक्षित ने आगे कहा, ’17 साल में नेहरूजी ने जो काम किया, उसकी व्यापकता बाकी प्रधानमंत्रियों की तुलना में दिखती नहीं है. इसलिए यह बहुत ही चालाकी से किया गया है. नेहरूजी की क्रांतिकारी उपलब्धियां हैं, वह उस संग्रहालय में दिखती ही नहीं है.’

15 अगस्त पर किया था ऐलान
बता दें कि केंद्र सरकार ने नेहरू मेमोरियल (NMML) का नाम बदल दिया है. अब NMML का नाम बदलकर पीएम म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (PMML) कर दिया गया है. स्वतंत्रता दिवस पर नाम परिवर्तन को औपचारिक रूप दिया गया था. मोदी सरकार के इस फैसले से कांग्रेस पार्टी बुरी तरह से भड़की हुई है. कांग्रेस नेता इसे पंडित जवाहरलाल नेहरू की विरासत मिटाने का प्रयास बता रहे हैं. वहीं, सरकार ने इस फैसले का बचाव करते हुए अपने तर्क दिए हैं.

नेहरू की विरासत को नकार रहे
एक दिन पहले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा था कि मोदी के पास भय, कठिनाई और असुरक्षा का एक बड़ा बंडल है. खासतौर पर जब बात भारत के पहले और सबसे लंबे समय तक देश सेवा करने वाले प्रधानमंत्री नेहरू की होती है, तो वे चीजें साफतौर पर नजर आ जाती हैं. जयराम ने आरोप लगाया था कि उनका (BJP) एकमात्र एजेंडा नेहरू और नेहरूवादी विरासत को नकारना, बदनाम करना और नुकसान पहुंचाना है.

सपा ने भी साधा था निशाना
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार के इस कदम पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि नाम बदलने की जो राजनीति हो रही है, वह दिल्ली वालों ने उत्तर प्रदेश से सीखी है. यहां इकाना स्टेडियम, जो भगवान विष्णु के नाम पर था. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किया गया. हमें इससे कोई नाराजगी नहीं है. हमें खुशी तब होती, जब उनके गांव बटेश्वर में भी एक यूनिवर्सिटी बन जाती. उनके परिवार के लोगों को और शुरुआती समय में जिन्होंने उनको राजनीति में आगे बढ़ाया उनका भी सम्मान हो जाता.

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