नई दिल्ली
सांसदी जाने के बाद राहुल गांधी को अपना दिल्ली का 12 तुगलक लेन वाला बंगला छोड़ना पड़ा था। इसके बाद 4 अगस्त को कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें बंगला दोबारा आवंटित हो गया था। लेकिन खबर है कि राहुल गांधी 12 तुगलक लेन वाले अपने बंगले में नहीं रहेंगे। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो राहुल ने इस बंगले को ठुकरा दिया है। इसके पीछे की वजह तो सामने नहीं आई है लेकिन, कुछ दिन पहले वह 7 सफदरजंग लेन के पास रहने का विकल्प ढूंढ़ रहे थे।
बता दें कि राहुल गांधी की सदस्यता बहाल होने के बाद 8 अगस्त को लोकसभा की हाउसिंग सोसायटी ने उन्हें 12 तुगलक लेन वाला बंगला अलॉट कर दिया है. हालांकि जब उनसे बंगला को लेकर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कहा था पूरा हिंदुस्तान ही मेरा घर है.
राहुल गांधी को इस साल की शुरुआत में सांसद के रूप में अयोग्य घोषित किए जाने के बाद अपने आधिकारिक आवास 12 तुगलक लेन को खाली करना पड़ा था। लेकिन, 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अयोग्यता को रद्द कर दिए जाने के बाद, राहुल को वही आवास आवंटित किया गया था। इस्टेट ऑफिस ने राहुल गांधी से 8 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा था कि क्या वह उसी घर में रहना चाहते हैं या नहीं। हालांकि, राहुल गांधी ने राजधानी दिल्ली में एक और बंगला देखा है। उन्होंने अपनी बहन और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ लुटियन जोन में 7 सफदरजंग लेन का घर देखा था।
7 सफदरजंग लेन का घर 1980 में सांसद के रूप में महाराजा रंजीत सिंह गायकवाड़ के कानूनी उत्तराधिकारियों को आवंटित किया गया था। महाराजा 27 नवंबर, 1989 तक सांसद रहे और 27 दिसंबर, 1989 को आवंटन रद्द कर दिया गया था। राहुल गांधी ने 22 अप्रैल को अपना आवास खाली कर दिया था, एक महीने बाद सूरत अदालत ने उन्हें 2019 के मोदी उपनाम के मानहानि के मामले में दोषी ठहराया था। राहुल तब अपनी माँ और पूर्व पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के घर 10 जनपथ में शिफ्ट हो गए थे।
19 साल से यही था राहुल गांधी का घर
यह बंगला राहुल गांधी को तबसे मिला था, जब वह पहली बार अमेठी से सांसद चुनकर आए थे. वह बतौर सांसद बीते 19 साल से इसी 12, तुगलक लेन में रह रहे थे. बंगला खाली करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि मैंने सच बोलने की कीमत चुकाई है.
किस मामले में हुई थी राहुल गांधी को सजा?
राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, ‘नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?’ राहुल के इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ धारा 499, 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था. इसके बाद राहुल की सदस्यता गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर लगाई थी रोक
राहुल गांधी ने सांसदी जाने के बाद सजा पर रोक के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन राहत नहीं मिली. फिर वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां सजा पर रोक लग गई. इसके बाद राहुल गांधी की सदस्यता बहाल हो गई और वह फिर से वायनाड के सांसद बन गए.
