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अडानी ग्रुप पर खुलासे के पीछे ये चेहरा, PM मोदी पर भी दे चुके हैं बेतुके बयान

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नई दिल्ली,

अडानी ग्रुप करीब 7 महीने में दूसरी बार आरोपों के घेरे में है. हिंडनबर्ग के बाद अब बुधवार को नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने अडानी ग्रुप पर एक रिपोर्ट जारी कर कई खुलासे किए हैं. वैसे अधिकतर आरोप वही हैं, जो हिंडनबर्ग ने भी लगाए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि गलत तरीके से शेयरों की कीमत बढ़ाई गई हैं. अडानी ग्रुप का भी बयान आ चुका है, अडानी ग्रुप ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि OCCRP ने हिंडनबर्ग के आरोपों को ही दोहराने का काम किया है. हालांकि गुरुवार को अडानी ग्रुप के सभी शेयरों में दबाव देखने को मिल रहा है.

हिंडनबर्ग के बारे में हर किसी को पता है कि वो एक शॉर्ट सेलिंग फर्म है, जो गिरते शेयरों पर दांव लगाकर कमाई करता है. लेकिन अबकी बार अडानी ग्रुप पर OCCRP ने आरोप लगाए हैं. हर कोई जानना चाह रहा है कि ये कहां की एजेंसी है और इसका अडानी मामले से क्या लेना-देना है? बता दें, ये भी विदेशी फर्म है, और हिंडनबर्ग भी विदेशी है. इस बीच जैसे ही OCCRP ने अडानी ग्रुप पर सवाल उठाए, हिंडनबर्ग अपनी पीठ थपथपाने लगा. वहीं नए खुलासे को लेकर भारत के राजनीतिक गलियारों में हलचलें तेज हो गई हैं.

OCCRP के पीछे जॉर्ज सोरोस का हाथ?
लेकिन अब ये जानना जरूरी है, ये OCCRP क्या है? इसका क्या काम है और इसका कर्ता-धर्ता कौन है? यह कंपनी पत्रकारों के एक ग्रुप द्वारा संचालित की जाती है. इसका मुख्यालय अमेरिका में है और इस कंपनी की शुरुआत साल 2006 में हुई थी. ये कंपनी दुनियाभर में आर्थिक अपराध खुलासों के लिए भी जानी जाती है. वैसे तो इसकी वेबसाइट पर जिक्र किया गया है, ये पब्लिक फंडेड फर्म है. लेकिन पब्लिक के साथ-साथ अरबपति जॉर्ज सोरेस ( George Soros) की कंपनी भी OCCRP को आर्थिक मदद करती है. यानी यह जॉर्ज सोरेस फंडेड फर्म है. अब जॉर्ज सोरोस के बारे अधिकतर लोग जानते हैं, जो नहीं जानते हैं वो अब जान लें.

हंगरी-अमेरिकी मूल के मशहूर अरबपति जॉर्ज सोरोस अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. खासतौर पर उनकी नजर भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहे राजनीतिक बदलावों पर रहती है. सोरोस कई मंचों से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लगातार सत्ता में बने रहने से तानाशाही की ओर बढ़ने वाला नेता कहते रहे हैं.

अब आपको बताते हैं कि जॉर्ज सोरोस ने कब-कब भारत को निशाने पर लिया है.

– भारत में नागरिकता संशोधन कानून और कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने को लेकर जॉर्ज सोरोस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा था. सोरोस का आरोप था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है.

– इसी साल जनवरी में जब हिंडनबर्ग से अडानी ग्रुप पर सवाल उठाया तो हाथ सेंकने के लिए जॉर्ज सोरोस भी सामने आ गए थे. जॉर्ज सोरोस ने अडानी मुद्दे के बहाने फिर पीएम मोदी पर निशाना साधा. सोरोस ने दावा किया था कि अडानी के मुद्दे पर भारत में एक लोकतांत्रिक परिवर्तन होगा.

– वैसे जॉर्ज सोरोस बेतुके बयान देने में भी पीछे नहीं रहते हैं. बीते दिनों उन्होंने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक नहीं हैं. मोदी के तेजी से बड़ा नेता बनने के पीछे अहम वजह मुस्लिमों के साथ की गई हिंसा है.

– इससे पहले 2020 में जॉर्ज ने कहा था कि मोदी के नेतृत्व में भारत तानाशाही व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ये बयान उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिया था. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का भी खुलकर विरोध किया था.

हालांकि जब-जब जॉर्ज सोरोस ने पीएम मोदी और भारत के अंदरुनी मामलों पर बयान दिया है. उसी वक्त सरकार ने पलटवार किया है. सरकार का कहना है कि विदेशी धरती से भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे को हिलाने की ये साजिश है, जो कभी कामयाब नहीं हो पाएगी.

अब जॉर्ज सोरोस की कुंडली खंगालते हैं….
जॉर्ज सोरोस का जन्म 12 अगस्त, 1930 को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में हुआ था. वे खुद को दार्शनिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी बताते हैं. हालांकि, उन पर दुनिया के कई देशों की राजनीति और समाज को प्रभावित करने का एजेंडा चलाने का आरोप लगता रहता है. 11 नवंबर 2003 को वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में सोरोस ने कहा था, जॉर्ज डब्ल्यू बुश को राष्ट्रपति पद से हटाना उनके जीवन का सबसे बड़ा मकसद है. और ये उनके लिए ‘जीवन और मौत का सवाल’ है. सोरोस ने कहा था कि अगर कोई उन्हें सत्ता से बेदखल करने की गारंटी लेता है, तो वो उस पर अपनी पूरी संपत्ति लुटा देंगे.

जॉर्ज सोरोस की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब हंगरी में यहूदियों को मारा जा रहा था, तब उनके परिवार ने झूठी आईडी बनवाकर जान बचाई थी. विश्व युद्ध खत्म होने के बाद जब हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो 1947 में वो बुडापेस्ट छोड़कर लंदन आ गए. यहां उन्होंने रेलवे कुली से लेकर एक क्लब में वेटर का काम भी किया. इसी दौरान उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की.

1956 में वो लंदन से अमेरिका आ गए. यहां आकर उन्होंने फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट की दुनिया में कदम रखा और अपनी किस्मत बदली. 1973 में उन्होंने ‘सोरोस फंड मैनेजमेंट’ लॉन्च किया. उनका दावा है कि अमेरिकी इतिहास में उनका फंड सबसे बड़ा और कामयाब इन्वेस्टर है. सोरोस खुद को जरूरतमंदों की मदद करने वाला बताते हैं. उनकी वेबसाइट पर दावा किया है कि सोरोस अब तक अपनी पर्सनल वेल्थ से 32 अरब डॉलर जरूरतमंदों की मदद के लिए दे चुके हैं. वो ओपन सोसायटी फाउंडेशन चलाते हैं.

कैसी है पर्सनल लाइफ?
जॉर्ज सोरोस ने तीन शादियां की हैं. 1960 में उन्होंने एनालिसे विश्चेक से शादी की थी. एनालिसे जर्मनी की प्रवासी थीं, जो विश्व युद्ध के दौरान अनाथ हो गई थीं. सोरोस और एनालिसे के तीन बच्चे हैं. हालांकि, ये शादी ज्यादा दिन नहीं चली और उन्होंने तलाक ले लिया. करीब 670 करोड़ डॉलर की दौलत के मालिक सोरोस के कारनामों की फेहरिस्त काफी लंबी है. 1992 में बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद करने के लिए जॉर्ज सोरोस को कसूरवार माना जाता है. वैसे 92 साल के जॉर्ज ने अपना उत्तराधिकारी 37 साल के बेटे अलेक्जेंडर को चुना है, जॉर्ज के कुल 5 बच्चे हैं.

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