17.9 C
London
Sunday, June 21, 2026
HomeUncategorizedकंगाल श्रीलंका-पाकिस्तान के रास्ते पर देश के कई राज्य! लिमिट क्रॉस कर...

कंगाल श्रीलंका-पाकिस्तान के रास्ते पर देश के कई राज्य! लिमिट क्रॉस कर चुका है कर्ज, देखिए कौन-कौन हैं लिस्ट में

Published on

नई दिल्ली

चुनावी मौसम में देश के राज्यों में आजकल मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की होड़ मची है। लेकिन सब्सिडी और दूसरी देनदारियों को चुकाते-चुकाते कई राज्यों की हालत खस्ता हो चुकी है। देश के कई राज्यों का कर्ज लिमिट को पार कर चुका है। सेंटर फॉर सोशल एंड इकनॉमिक प्रोग्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की उधारी साल 2020-21 में 2.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। यह केंद्र के एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्स यूटिलाइजेशन का करीब आधा है। रिपोर्ट के मुताबिक कई राज्य सरकारी कंपनियों से पैसा जुटाकर अपने कर्ज के बारे में असली तस्वीर छिपा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक कई राज्यों का कर्ज फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी लॉ की अनिवार्य लिमिट से आगे पहुंच चुका है। उदाहरण के लिए आंध्र प्रदेश की कुल देनदारियां ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रॉडक्ट (GSDP) की 35 परसेंट है लेकिन इसमें ऑफ बजट बोरोइंग शामिल नहीं है। अगर इसे मिला लिया जाए तो 2020-21 में राज्य की कुल देनदारी उसकी जीएसडीपी का 44 परसेंट पहुंच जाती है। श्रुति गुप्ता और जेविन जेम्स की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। तेलंगाना के मामले में यह अंतर करीब 10 परसेंट है। यानी राज्य की ऑफ बजट बोरोइंग को मिला लिया जाए तो उसकी कुल देनदारी 38.1 परसेंट बैठती है। केरल में यह अंतर तीन परसेंट और कर्नाटक में एक परसेंट है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 से इसमें इजाफा हुआ है जबकि केंद्र सरकार इसे कम करना चाहती है।

किन राज्यों की हालत खराब
रिपोर्ट के मुताबिक 11 राज्यों की कुल ऑफ बजट बोरोइंग 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड का डेटा उपलब्ध नहीं है। कुल ऑफ बजट बोरोइंग में पांच दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी 93 परसेंट है। तेलंगाना का अनुपात जीएसडीपी का 10 परसेंट है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र के एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्स यूटिलाइजेशन में गिरावट आई है। साल 2019 में यह आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक था लेकिन संभव है कि इनकंप्लीट आंकड़ों के कारण इसमें गिरावट आ रही है। फाइनेंस मिनिस्ट्री का कहना है कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का बकाया अब बजट के जरिए दिया जा रहा है जबकि एनएचएआई प्रोग्राम की फंडिंग सीधे केंद्र कर रहा है। लेकिन केंद्र के बजट में यह नहीं दिख रहा है।

सवाल उठता है कि राज्य किसके लिए उधार ले रहे हैं। इसके कई कारण हैं। उदाहरण के लिए आंध्र प्रदेश में ऑफ बजट बोरोइंग का 35 परसेंट हिस्सा स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन ने खर्च किया है जो खाने पीने की चीजों से जुड़े वैल्यू चेन को मैनेज करता है। इसी तरह तमिलनाडु में उधारी का 96 परसेंट हिस्सा स्टेट पावर ट्रांसमिशन और जेनरेशन कंपनी की जरूरतों पर खर्च होता है। पंजाब में भी यही ट्रेंड है। तेलंगाना में ऑफ बजट बोरोइंग का 37 फीसदी हिस्सा कलेश्वरम इरिगेशन प्रोजेक्शन कॉरपोरेशन ने खर्च किया।

Latest articles

फादर्स डे पर पुत्र शिवरतन ने ब्रह्मलीन दादाजी गुरुदेव चुन्नीलाल नामदेव को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

भोपाल। फादर्स डे के पावन अवसर पर स्थानीय निवासी शिवरतन नामदेव ने अपने पूज्य...

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज: थीम ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’, छत्तीसगढ़ का मुख्य आयोजन अंबिकापुर में

रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के अवसर पर छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में...

शिविरों में मामूली त्रुटियां दूर कर वंचितों को मिल रहा योजनाओं का लाभ : सीएम भजनलाल

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को पाली जिले के सुमेरपुर अंतर्गत राजकीय उच्च...

अकाल तख्त ने जारी किया सीएम भगवंत मान की पेशी का वीडियो, मान बोले- एआई से बना है फर्जी वीडियो

अमृतसर/चंडीगढ़। सिख कौम की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त साहिब ने शनिवार को पंजाब के...

More like this

भोपाल के रंगमंच से बॉलीवुड तक: उदय अठरौलिया की दो नई फिल्मों में दिखेंगे अभिनय के अलग रंग

भोपाल। राजधानी के रंगमंच से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाले अभिनेता उदय...

“पति को जल्द गिरफ्तार करें, नहीं तो वह मुझे मार डालेगा”: घरेलू हिंसा की शिकार महिला ने लगाई गुहार

भोपाल। भोपाल के भीमनगर क्षेत्र की रहने वाली गीता पटेल ने अपने पति पर...

10 लेन अयोध्या बायपास परियोजना का मंत्री विश्वास सारंग ने किया निरीक्षण

करोंद में बार-बार पाइपलाइन टूटने पर ठेकेदार को फटकार, वसूला जाएगा मुआवजा भोपाल। प्रदेश के...