15.7 C
London
Monday, May 4, 2026
Homeराष्ट्रीयG20 समिट पर खर्च हुए 4100 करोड़ रुपए? जानें क्या है आंकड़े...

G20 समिट पर खर्च हुए 4100 करोड़ रुपए? जानें क्या है आंकड़े की सच्चाई

Published on

नई दिल्ली,

जी20 समिट की कामयाबी ने दुनिया के नक्शे पर भारत की नए पावर सेंटर के तौर पर छाप छोड़ी है. सदस्य देशों के अलावा विपक्ष के नेता भी इसकी तारीफ करते हुए कह रहे हैं कि ये भारत की एक अहम कूटनीतिक सफलता है. अमेरिकी सरकार ने भी खुद इस समिट की प्रशंसा की है.इस आयोजन ने पीएम मोदी की छवि को एक प्रभावशाली वैश्विक नेता के तौर पर खड़ा किया है. नई दिल्ली में पहली बार आयोजित हुए जी-20 समिट के लिए सरकार ने जो तैयारियां की थीं, उसमें भारत की समृद्ध परंपराओं के अलावा आधुनिकता की चमक भी दिखी.

लेकिन, कार्यक्रम खत्म होने से पहले ही, केन्द्र सरकार द्वारा जी20 समिट के लिए किए गए खर्चे को लेकर विवाद शुरू हो गया. राज्यसभा सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत सरकार ने जी20 समिट के लिए बजट में आवंटित की गई राशि से 300 प्रतिशत ज्यादा खर्चा किया है. साकेत के मुताबिक, सरकार ने इस सम्मेलन के लिए 990 करोड़ रुपए के बजाय 4100 करोड़ रुपए खर्च कर दिए.

इसके अलावा, कांग्रेस ने भी जी20 सम्मेलन में कथित तौर पर खर्च हुई इस बड़ी रकम के बारे में ट्वीट करते हुए सरकार को घेरा. आजतक ने पाया कि जी20 के आयोजन में कितनी लागत आई है, इसको लेकर सरकार ने खर्चे की पूरी जानकारी नहीं दी है. लेकिन 4100 करोड़ रुपये को लेकर किये जा रहे वायरल दावे भ्रामक हैं.

जी20 समिट के लिए आवंटित हुआ बजट
फरवरी में केंद्र सरकार ने इस साल का बजट पेश किया था. इसके बारे में छपी खबर के मुताबिक केंद्र सरकार ने भारत की अध्यक्षता में होने वाले जी20 समिट के लिए करीब 990 करोड़ रुपये आवंटित किए थे.

कहां से आया 4100 करोड़ रुपये का आंकड़ा?
जी20 सम्मेलन के बारे में हमें केंद्रीय विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी का चार सितंबर का एक ट्वीट मिला. सम्मेलन की तैयारियों के दौरान दिल्ली के सुधार में कितनी राशि खर्च हुई है, इस ट्वीट में उसका लेखा-जोखा मौजूद है. इसमें सड़कों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट और सजावट आदि में हुए खर्चे के बारे में जानकारी दी गई है. इस ट्वीट में दी गई राशियों को जोड़ा जाए तो ये 4110.75 करोड़ रुपये तक आती है.ऐसा लगता है कि 4100 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा इस ट्वीट के बाद ही शुरू हुआ. लेकिन, ये राशि सरकार ने जी20 सम्मेलन के आयोजन में खर्च की है, ऐसा कहना भ्रामक है.

इस राशि को जी20 सम्मेलन का खर्च बताना क्यों है भ्रामक?
मीनाक्षी लेखी के ट्वीट में दी गई राशियों में से सबसे बड़ा खर्च 3,600 करोड़ रुपये का है. ये 3,600 करोड़ रुपये प्रगति मैदान में बनाए गए इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) परिसर के निर्माण की लागत है, जो कि कुल राशि का करीब 88 प्रतिशत है. इस परिसर का नाम बाद में आधिकारिक तौर पर ‘भारत मंडपम’ कर दिया गया. ये वही जगह है जहां जी20 सम्मेलन का आयोजन हुआ था.

भारत मंडपम एक स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों में भी किया जाएगा. इसलिए, एक स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में हुए खर्चे की पूरी राशि को जी20 सम्मेलन में हुए खर्चे में जोड़कर पेश करना गलत है. ध्यान देने वाली बात है कि आईटीपीओ परिसर के पुनर्विकास के लिए साल 2017 में ही 2,254 करोड़ रुपये का आवंटन कर दिया गया था. साथ ही, प्रगति मैदान के आसपास टनल बनाने के लिए 800 करोड़ रुपये का बजट भी उसी साल आवंटित किया गया था. इस बारे में छपी खबर के मुताबिक, साल 2019 में इस राशि को बढ़ाकर करीब 1000 करोड़ रुपये कर दिया गया था.

अगर इन दोनों राशियों को जोड़ा जाए, तो भारत मंडपम और इसके आसपास के क्षेत्रों में हुए विकास की लागत 3200 करोड़ के आंकड़े के पार हो जाती है. इसके अलावा, प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने 26 जुलाई को घोषणा की थी कि भारत मंडपम को बनाने में 2,700 करोड़ रुपए का खर्चा हुआ है, जिसमें टनल बनाने का खर्च शामिल नहीं है.

इन राशियों के जोड़तोड़ को लेकर क्या है एक्स्पर्ट्स का कहना?
हमने इस विषय पर कुछ फाइनेंशियल एक्स्पर्ट्स से बात की. उनके मुताबिक एक स्थायी बुनियादी ढांचा को बनाने की लागत को किसी कार्यक्रम की मेजबानी के खर्च के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है. क्योंकि इस इमारत का उपयोग आने वाले कई वर्षों तक होगा. वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट गोपाल केडिया ने ‘आजतक’ से बातचीत में बताया कि इस तरह की संपत्ति का इस्तेमाल भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों में किया जा सकता है. इसलिए, इसे सिर्फ एक सम्मेलन में हुए खर्चे में नहीं गिना जा सकता.

उन्होंने आगे कहा, “सही मायने में इस खर्चे का आकलन इस तरह से किया जा सकता है कि अगर इसके आयोजन के लिए भारत मंडपम को किराए पर लिया जाता तो कितना खर्च आता. जाहिर है ये रकम मामूली होती और कुछ करोड़ से ज्यादा नहीं होती. एक अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट अश्विनी तनेजा ने भी ये बात दोहराते हुए कहा कि सम्मेलन के खर्चे के आकलन में केवल सजावट, विज्ञापन और इमारत की साज-सज्जा करने में खर्च हुई राशियों को ही जोड़ा जाना चाहिए. इस खर्च में स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में आई लागत को जोड़ना गलत है.

क्या है जी20 सम्मेलन की वास्तविक लागत?
मीनाक्षी लेखी ने ट्विटर पर जी20 में हुए खर्चे के जो आंकड़े जारी किये हैं, उनमें कई चीजों की लागत शामिल नहीं हैं. इससे ये नहीं कहा जा सकता है कि लेखी ने जो राशि का ब्योरा दिया है, वो जी20 की वास्तविक लागत है. केंद्र सरकार ने अभी तक जी20 शिखर सम्मेलन के आयोजन में हुए खर्चे के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया है. लेकिन, जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने दावा किया है कि ये आंकड़े बजट में आवंटित हुई राशि से भी कम हैं. साथ ही, उन्होंने कहा है कि सरकार जी20 सम्मेलन में हुए खर्च से जुड़े आंकड़े जल्द ही जारी करेगी.

Latest articles

नये मध्यप्रदेश का मार्वलस माइलस्टोन साबित होगा इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2360 करोड़ की लागत के इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले...

किसके सिर सजेगा ताज : पांच राज्यों की विधानसभा 823 सीटों के लिए आज होगी मतगणना

नई दिल्ली। देश के पांच बड़े चुनावी मोर्चों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और...

जबलपुर बरगी डैम हादसा: राजधानी में बरपा युवा कांग्रेस का कहर

पर्यटन मंत्री के बंगले पर '11 अर्थियाँ' लेकर पहुँचे कार्यकर्ता भोपाल। जबलपुर के बरगी डैम...

8 करोड़ की लागत से बेहतर होगा सड़क परिवहन : राज्यमंत्री गौर

मिसरोद और बरखेड़ा पठानी में क्रमश: 2 करोड़ 68 लाख और 2 करोड़ 70...

More like this

किसके सिर सजेगा ताज : पांच राज्यों की विधानसभा 823 सीटों के लिए आज होगी मतगणना

नई दिल्ली। देश के पांच बड़े चुनावी मोर्चों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और...

बंगाल में 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा सरकार, असम में BJP, तमिलनाडु में DMK की वापसी

केरल में 10 साल बाद UDF सरकार का अनुमान नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा...

बंगाल चुनाव में ‘बंपर वोटिंग’, आज़ादी के बाद बना नया रिकॉर्ड, पहले चरण में 93% मतदान

तमिलनाडु के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा 85% वोटिंग कोलकाता। पश्चिम बंगाल और...