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Monday, May 4, 2026
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वकीलों को नहीं करने दी जा रही एक खास तबके की पैरवी, CJI को पता चला मणिपुर का सच तो रह गए आवाक, उठाया ये कदम

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नई दिल्ली

महीनों से हिंसा की आग में झुलस रहे मणिपुर का एक सच जानकर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ भी आवाक रह गए। उनको बताया गया कि अल्पसंख्यक तबके की पैरवी से वकीलों को रोका जा रहा है। उन्होंने एडवोकेट से कहा कि वो एक डिटेल एफिडेविट फाइल करें। वो इस मामले में सच का पता लगाकर सख्त कदम उठाने जा रहे हैं।

दरअसल, सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की बेंच को बताया कि मणिपुर के अल्पसंख्यक तबके की आवाज जो भी वकील उठाना चाहता है उसके घर और दफ्तर में तोड़फोड़ की जाती है। कई वकील अपने हाथ खड़े कर चुके हैं। इक्का दुक्का तो सूबा छोड़कर भी चले गए। ग्रोवर दो मामलों में पैरवी कर रहे हैं। एक में वो रिटा. कर्नल विजयकांत चेंजी की तरफ से पेश हुए।

76 वर्षीय रिटा. कर्नल की किताब पर है बवाल, हो चुकी है FIR
76 वर्षीय रिटा. कर्नल की किताब “The Anglo-Kuki War 1917-19: Victory in Defeat” को लेकर खासा बावेला मचा है। उनके खिलाफ FIR तक हो चुकी है। लेकिन कोई भी वकील उनका केस लेने को तैयार नहीं है। ग्रोवर के पास दूसरा केस हेनमिलन का है। वो एक स्पीच को लेकर लोगों का गुस्सा झेल रहे हैं। उनका कहना था कि ग्रोवर का केस लेने वाले वकीलों के दफ्तर और घरों में तोड़फोड़ की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जब उनकी दलीलों पर आपत्ति जताई तो ग्रोवर का कहना था कि वो फोटो दिखा सकते हैं। तीन वकील कर्नल का केस लेने को तैयार थे। लेकिन फिर उनकी तरफ से उनके पास फोन आया कि वो पैरवी नहीं कर पाएंगे।

SG बोले- मणिपुर के बारे में पेश की जा रही है गलत तस्वीर
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को मणिपुर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से बात करने दीजिए। वो पता करेंगे कि हाईकोर्ट चल भी रहा है या नहीं। एक पक्ष हर छोटे मोटे मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट चला आता है। वो ऐसी तस्वीर दिखाते हैं जिससे लगता है कि सूबे के हालात बहुत ज्यादा खराब हैं। लेकिन उनको बीते दिन पता चला है कि वकील वर्चुअली और फिजिकली दोनों तरह से कोर्ट में पेश हो रहे हैं।

सीजेआई बोले- हलफनामा दाखिल करो- मैं उठाउंगा सख्त कदम
सीजेआई ने दोनों की दलील सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता एक रिटा. कर्नल है। उनको सुरक्षा दी जानी चाहिए। लेकिन मैं सोच रहा हूं कि उनको सुरक्षा यहीं पर दी जाए या फिर हाईकोर्ट के पास वापस भेजा जाए। सीजेआई ने कहा कि आनंद ग्रोवर अपने मुवक्किल को कहें कि वो एक हलफनामा दें, जिसमें लिखा हो कि उनको अपने केस की पैरवी के लिए मणिपुर में कोई वकील नहीं मिल रहा है।

सीजेआई ने कहा कि आपके हलफनामे पर हम मणिपुर सरकार से जवाब मांगेंगे। फिर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से भी बात करेंगे। अगर वकील आपको उपलब्ध नहीं हो रहे हैं तो फिर हम लीगल एड से आपको वकील दिलवाएंगे। हम आपकी हर तरह से मदद करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को की जाएगी।

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