15.7 C
London
Monday, May 4, 2026
Homeराष्ट्रीयजिन्होंने सजा के खिलाफ अपील भी नहीं की वे सुप्रीम कोर्ट से...

जिन्होंने सजा के खिलाफ अपील भी नहीं की वे सुप्रीम कोर्ट से हो गए बरी! जानिए पूरा मामला

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक हालिया फैसले में कहा है कि किसी मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ एक समान सबूत हों तो अदालतें उनके बीच भेदभाव नहीं कर सकती। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिय संजय करोल की बेंच ने कहा कि जब किसी अपराध में आरोपियों के खिलाफ एक समान सबूत हों तो अदालत किसी एक को दोषी और बाकी को बरी नहीं कर सकती। शीर्ष अदालत ने डकैती और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए 4 लोगों को बरी कर दिया। चारों को 10 साल की सजा हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक ही सबूत हैं तो कोर्ट उनके बीच भेदभाव नहीं कर सकता। इस मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने 7 आरोपियों को दोषी ठहराया था लेकिन बाद में उनकी सजा को उम्रकैद से घटाकर 10 साल कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उन दो आरोपियों की सजा को भी रद्द कर दिया जिन्होंने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की थी।

हत्या और डकैती का मामला नवंबर 2003 का है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 2 पुलिस कॉन्स्टेबल गवाह थे। उन्होंने दावा किया था कि अहमदाबाद में मौके पर 1000 से 1500 लोगों की भीड़ जमा थी। उनकी ही गवाही और एक समान सबूतों के आधार पर इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2006 और हाई कोर्ट ने फरवरी 2016 में फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट ने 7 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। अगस्त 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट से दोषी ठहराए गए तीन दोषियों को बरी कर दिया था जबकि मई 2018 में एक दोषी अमजद खान नसीर खान पठान की अपील को खारिज कर दिया था।

बाद में जावेद शौकत अली कुरैशी नाम के एक और दोषी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। दो अन्य दोषी महबूब खान अल्लारखा और सैद खान ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी। कुरैशी की अपील पर ही फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ कुरैशी को बरी किया, बल्कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील नहीं करने वाले दो अन्य आरोपियों महबूब खान अल्लारखा और सैद खाना को बरी कर दिया। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई 2018 के अपने उसे फैसले को रद्द करते हुए अमजद खान नसीर खान पठान को भी बरी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब इस मामले में एक ही तरह के या एक समान सबूत हैं और 2 चश्मदीदों ने भी आरोपियोंके एक समान भूमिका की बात कही है तब अदालत किस एक आरोपी को दोषी और बाकी को बरी ननहीं कर सकती। इस मामले में दोनों आरोपियों के संदर्भ में समानता का सिद्धांत लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जिस एक आरोपी की पहले अपील खारिज हुई थी, उसके खिलाफ भी उसी तरह के सबूत थे जो बाकी तीन आरोपियों के थे और जिन्हें शीर्ष अदालत ने बरी कर दिया था। बेंच ने कहा कि अगर उसे (अमजद खान नसीर खान पठान) को राहत नहीं दी गई तो ये ‘अन्याय’ करने जैसा होगा।

Latest articles

नये मध्यप्रदेश का मार्वलस माइलस्टोन साबित होगा इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2360 करोड़ की लागत के इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले...

किसके सिर सजेगा ताज : पांच राज्यों की विधानसभा 823 सीटों के लिए आज होगी मतगणना

नई दिल्ली। देश के पांच बड़े चुनावी मोर्चों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और...

जबलपुर बरगी डैम हादसा: राजधानी में बरपा युवा कांग्रेस का कहर

पर्यटन मंत्री के बंगले पर '11 अर्थियाँ' लेकर पहुँचे कार्यकर्ता भोपाल। जबलपुर के बरगी डैम...

8 करोड़ की लागत से बेहतर होगा सड़क परिवहन : राज्यमंत्री गौर

मिसरोद और बरखेड़ा पठानी में क्रमश: 2 करोड़ 68 लाख और 2 करोड़ 70...

More like this

किसके सिर सजेगा ताज : पांच राज्यों की विधानसभा 823 सीटों के लिए आज होगी मतगणना

नई दिल्ली। देश के पांच बड़े चुनावी मोर्चों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और...

बंगाल में 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा सरकार, असम में BJP, तमिलनाडु में DMK की वापसी

केरल में 10 साल बाद UDF सरकार का अनुमान नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा...

बंगाल चुनाव में ‘बंपर वोटिंग’, आज़ादी के बाद बना नया रिकॉर्ड, पहले चरण में 93% मतदान

तमिलनाडु के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा 85% वोटिंग कोलकाता। पश्चिम बंगाल और...