नई दिल्ली,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में अंतर्राष्ट्रीय वकील सम्मेलन 2023 का उद्घाटन किया. उद्घाटन समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी शामिल हुए. पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि, भाषा और कानून की सरलता देश की न्याय व्यवस्था का अहम पहलू है. इस अवसर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसी दुनिया की आकांक्षा करना काल्पनिक नहीं है जहां राष्ट्र, संस्थान और सबसे महत्वपूर्ण रूप से व्यक्ति एक-दूसरे के साथ जुड़ने के लिए खुले हों.
‘वकीलों ने मजबूत की देश की नींव’
पीएम मोदी ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि, किसी भी देश की जीवन शैली और संस्कृति में न्यायिक समाज की अहम भूमिका होती है. आजादी के आंदोलन में भी कई बड़े वकीलों ने राष्ट्रीय आंदोलन में अपनी चलती वकालत छोड़ दी. अधिकतर बड़े स्वाधीनता सेनानी वकील थे. उन्होंने उस समय भी और आजादी के बाद भी न्यायिक पेशे से जुड़े वकीलों ने देश के विकास की नींव मजबूत की. देश की संसद से पारित नारी शक्ति वंदन कानून देश को नई दिशा देगा.
सीमा से परे ताकतों से लड़ रहा है भारत: पीएम मोदी
जी 20 ने भारत की नई चमक दुनिया के सामने बिखेरी. ठीक महीने भर पहले चंद्रयान सफलता से उतरा. विकसित भारत में न्यायिक सुलभता और सबको न्याय के नए तौर तरीके हमे दुनिया की अगली कतार में खड़ा करेंगे. भारत अभी उन ताकतों से लड़ रहा है जो बॉर्डर से परे हैं. ग्लोबल फ्रेम वर्क तैयार कर ही हम इसे पार पा सकते हैं. कॉमन रूल और नियम बनाने होंगे, ताकि हम दुनिया में अमन-शांति का राज कायम कर सकें. ADR को लेकर भी भारत वैश्विक स्तर पर व्यवस्थित रूप देने की पहल की है. लोक अदालत इसका सबसे अहम सबूत है. ये प्राचीन व्यवस्था है जो नए रूप में हमारी मददगार है. भाषा और कानून की सरलता देश की न्याय व्यवस्था का अहम पहलू है.
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कही ये बात
वहीं, इस मौके पर CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, ये कॉन्फ्रेंस सीखने और सिखाने का बड़ा मंच है. दुनिया भर से जज, वकील और न्याय वेत्ता यहां हाजिर हैं. जस्टिस डेलिवरी के क्षेत्र में चुनौतियों पर चर्चा करने से काफी उत्साह वर्धक नतीजे आएंगे. भारत की समृद्ध परंपरा में जबरा संविधान है जी विश्व के कई संविधान से प्रेरणा लेकर अनूठी रचना है. उन्होंने कहा कि, अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत मध्यस्थता का केंद्र बना तो वहीं, मॉरीशस और भूटान में सुप्रीम कोर्ट की इमारत बनाने में सुप्रीम कोर्ट के विशेषज्ञों ने मदद की.
उन्होंने कहा कि रिक्शा चलाने वालों के मुकदमे में फैसला अदभुत है क्योंकि ऐसे मुकदमे न्याय और शक्ति में संतुलन बनाते हैं. सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ एक मुकदमे की सुनवाई कर रही है जिसमें लाखों ऐसे ड्राइवरों पर पड़ेगा जिसमें बहस का विषय है कि क्या निजी ड्राइविंग लाइसेंस धारक कमर्शियल वाहन चला सकते हैं.
कानूनी सुधार के जरिए की प्रगति: सॉलिसिटर जनरल
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि, नए कानून और कानूनी सुधार के जरिए न्याय और कानून के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी हमने काफी प्रगति की है. ये कॉन्फ्रेंस उसका ही प्रमाण है. 760 मिलियन मोबाइल यूजर हैं भारत में. हर सेकंड तीन उपभोक्ता की औसत दर से ये रफ्तार बढ़ रही है. डिजिटाइजेशन ने हमारी आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और न्यायिक व्यवस्था को भी वैश्विक दक्षता दिलाई है. हरेक अदालत डिजिटल तौर पर सक्षम है. टेली लॉ ने समाज में अंतिम व्यक्ति तक न्यायिक सुविधा की दस्तक दे दी है. सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर सुवास ने नौ भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सफलता पूर्वक अनुवाद करना शुरू कर दिया है. हम विश्व का भविष्य हैं. उसकी दिशा तय कर रहे हैं.
