नई दिल्ली,
मालदीव में शनिवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में चीन समर्थक मोहम्मद मुइज्जू ने शानदार जीत हासिल की है. मुइज्जू ने मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह को शिकस्त दी है. मुइज्जू को भारत समर्थक के रूप में देखा जाता रहा है. सोलिह की सत्ता में आने के बाद से भारत और मालदीव के बीच रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं. मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह 17 नवंबर तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में काम करेंगे.
वहीं, मोहम्मद मुइज्जू और उनकी पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस को चीन समर्थक के रूप में देखा जाता है. इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि मोहम्मद मुइज्जू और उनकी पार्टी ने मोहम्मद सोलिह को सत्ता से हटाने के लिए चुनाव में ‘इंडिया-आउट’ कैंपेन का नारा दिया था. मुइज्जू का आरोप है कि सोलिह के कार्यकाल के दौरान भारत ने मालदीव की संप्रभुता और स्वतंत्रता में हस्तक्षेप किया है.
राष्ट्रपति चुनाव में निवर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को 54 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं. वहीं, मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह को 46 प्रतिशत वोट मिले हैं. मुइज्जू ने लगभग 18 हजार वोटों से जीत दर्ज की है.
इससे पहले 9 सितंबर को हुए चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले थे, जिसके बाद 30 सितंबर को दोबारा मतदान हुआ. दरअसल, मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव भी फ्रांस के चुनाव प्रणाली के समान ही है. जहां विजेता को 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना जरूरी होता है. यदि पहले राउंड में कोई भी उम्मीदवार 50 प्रतिशत से ज्यादा मत नहीं हासिल कर पाता है तो दूसरे राउंड में शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच चुनाव होता है.
चुनाव के नतीजे भारत के लिए अहम
हिंद महासागर में स्थित सौ से अधिक द्वीपों वाला देश मालदीव रणनीतिक रूप से भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण देश है. ऐसे में रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे पर भारत के साथ-साथ चीन की भी निगाहें टिकीं हुई थी. यहां तक कि इस राष्ट्रपति चुनाव को एक तरह से मालदीव की जनता के जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा था कि मालदीव को भारत के साथ घनिष्ठ रिश्ते बनाए रखना है या चीन के साथ.
मोहम्मद मुइज्जू की जीत के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और मालदीव के बीच रिश्ते एक बार फिर खराब हो सकते हैं. क्योंकि मोहम्मद मुइज्जू और उनकी पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस को चीन समर्थक के रूप में देखा जाता है. मोहम्मद सोलिह से पहले पीपुल्स नेशनल कांग्रेस पार्टी के अबदुल्ला यामीन मालदीव के राष्ट्रपति थे. उस वक्त भी भारत और मालदीव के रिश्ते अपने निम्नतम स्तर पर थे.
मोहम्मद सोलिह ने हार स्वीकार की
राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह ने हार स्वीकार कर ली है. मोहम्मद सोलिह ने ट्वीट करते हुए लिखा है, ” राष्ट्रपति चुनाव के विजेता मोहम्मद मुइज्जू को बधाई. इस चुनाव में मालदीव की जनता द्वारा दिखाए गए बेहतरीन लोकतांत्रिक उदाहरण के लिए उनका धन्यवाद. हमारे साथ मिलकर काम करने वाले Maldivian Democratic Party और Adhaalath Party के सदस्यों और मेरे लिए वोट करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद.
मोहम्मद सोलिह की हार भारत के लिए एक तरह से झटका
मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे को भारत के लिए एक तरह से झटके के तौर पर देखा जा रहा है. चुनाव के इस परिणाम ने मालदीव और भारत के बीच के कूटनीतिक रिश्ते को एक फिर वहीं पहुंचा दिया है, जहां पांच साल पहले दोनों देशों ने शुरुआत की थी. मालदीव के निवर्तमान राष्ट्रपति मुइज्जू ने पिछले साल चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के अधिकारियों के साथ एक बैठक में कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में वापसी करती है तो दोनों देशों (चीन-मालदीव) के बीच मजबूत संबंधों में एक और अध्याय जुड़ेगा.
