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सैनिकों के लिए लागू नई विकलांगता पेंशन पॉलिसी का क्यों हो रहा विरोध?

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नई दिल्ली

सरकार ने देश के सैनिकों के लिए विकलांगता पेंशन के लिए नए नियम लागू किए हैं। यह पिछले महीने लागू किया गया था। हालांकि पूर्व सैनिक इन नए पेंशन नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई पेंशन पॉलिसी सैनिकों के हित में नहीं है। ये नियम काफी कठोर हैं। हालांकि रक्षा मंत्रालय और रिटायर हो चुके सैन्य अधिकारियों का कहना है कि नये नियमों से दुरुपयोग की संभावना कम होगी। कोई गलत तरीके से इन सेवाओं का फायदा नहीं उठा पाएगा।

दरअसल, सरकार ने सैनिकों के लिए 21 सितंबर हो नई पॉलिसी के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। नई पॉलिसी में सैनिकों को मुवाअजा देने के लिए कुछ शर्तें शामिल की गईं हैं। नई पॉलिसी में ब्लड प्रेशर और दिल से संबंधित बीमारियों के लिए पात्रता मानदंड में कटौती की गई है। इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि किन नियमों में बदलाव हुआ है।

‘संदेह का लाभ’ खंड को हटाना
एसोसिएशन का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण मौजूदा नियम यह था कि सैन्य कर्मियों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए बुलाया नहीं जाता था और ‘उचित संदेह का लाभ’दिया जाता था। यह नियम काफी पहले से लागू है। (हकदार नियम, 1982 का नियम 9 देखें) लेकिन अब नए नियमों में इसे निरस्त कर दिया गया है।

सकारात्मक अनुमान खंड निरस्त कर दिया गया
नए नियम 7(बी) में कहा गया है कि कोई बीमारी मिलिट्री सर्विस के समय सामने आई है इसका मतलब यह नहीं है कि सैनिक मुवाअजा ले सकता है। एसोसिएशन का कहना है कि यह मौजूदा नियमों (एंटाइटलमेंट रूल्स, 1982 के नियम 9 देखें) के विपरीत है। यह विश्त स्तर पर सेनाओं के लिए मौजूदा नियमों के भी विपरीत है। यह भारत में सीएपीएफ पर लागू नियमों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के भी विपरीत है। पहले के नियमों में से सकारात्मक अनुमान खंड को निरस्त कर दिया गया है।

‘सैन्य सेवा नियम’ के कारण परिवर्तन
नए नियम 11(बी)(2) में कहा गया है कि बीमारियों पर सेवा तभी मान्य की जाएंगी जब ये अधिक काम करने के कारण होती हैं। जिसमें सैनिक को अधिक मेहनत करनी पड़ी हो। पहले के नियमों में संदेह का लाभ दिया गया था। जिसमें मिलिट्री सर्विस के समय वाली किसी भी विकलांगता को सर्विस से जुड़ा हुआ माना जाता था। एसोसिएशन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि विकलांगता या मृत्यु लाभ के अधिकार से इस आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह आराम से हुआ था।

सर्विस शर्तों में बदलाव
एसोसिएशन का कहना है कि नए नियम में कहा गया है कि दिल से जुड़ी बीमारी तभी सेवा से जुड़ी मानी जाएगी जब वह काम जब एक्टिव ऑपरेशन, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तीन महीने से अधिक का काम और लगातार 72 घंटे से अधिक समय तक अधिक काम के बाद ऐसा होता है।

सेवा द्वारा कष्ट में परिवर्तन
नए नियम 12 में ‘सेवा द्वारा कष्ट’ में पुराने नियम 19 को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है। पुराने नियम में यह प्रावधान था कि छुट्टी के समय किसी भी विकलांगता के बिगड़ने की स्थिति में पेंशन दी जाएगी। जबकि नए नियम में इसे केवल खराब जलवायु, क्षेत्र संचालन, उच्च ऊंचाई आदि से जोड़ा गया है।

विकलांगता प्रतिशत में परिवर्तन
पुराने नियमों के तहत हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के लिए दी जाने वाली विकलांगता प्रतिशत 30 था। अब इसे घटाकर 10 प्रतिशत से कम कर दिया गया है। ऐसा ही कई अन्य विकलांगताओं के साथ भी किया गया है।

कई बीमारियां सूची से हटाई गईं
पुराने नियमों के तहत सैन्य सेवा के दौरान धूम्रपान आदि से होने वाले कैंसर को छोड़कर सभी तरह के कैंसर के लिए सर्विस दी जाती थी लेकिन अब सभी कैंसर को सूची से बाहर कर दिया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि इसके अलावा सभी प्रकार के मधुमेह को सूची से बाहर रखा गया है। जबकि तनाव और प्रेशर के कारण मधुमेह बढ़ सकता है।

ब्रोन्कियल अस्थमा को भी सूची से बाहर कर दिया गया है। एसोसिएशन के अनुसार, पीआईवीडी और स्पोंडिलोलिसिस जैसी बीमारियों को भी सूची से बाहर कर दिया गया है। जबकि सबको पता है कि मिलिट्री की सर्विस में इस तरह की बीमारियां हो सकती हैं। यही कुछ वजहें हैं जिस कारण नई पॉलिसी का विरोध हो रहा है।

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