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प्राइवेट जॉब वालों के अकाउंट में हमेशा होना चाहिए इतना पैसा, नहीं है तो जाएंगे फंस!

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नई दिल्ली,

अगर आप प्राइवेट जॉब कर रहे हैं तो हर महीने सैलरी मिलती होगी. कुछ लोग सैलरी मिलते ही धड़ल्ले से खर्च करने लग जाते हैं और फिर महीने के आखिर में पूरा अकाउंट खाली हो जाता है. उसके बाद खर्चे चलाने के लिए किसी से उधार या फिर क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ जाता. आखिर ऐसा क्यों होता है, आपने कभी इस बारे में सोचा है? अधिकतर लोग इसको लेकर गंभीर नहीं होते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि हर महीने सैलरी तो मिल ही रही है, फिर टेंशन किस बात की है.

अगर आप पूरी सैलरी उसी महीने खर्च कर देते हैं और अगली सैलरी का तारीख गिनने लगते हैं, तो फिर संभल जाइए, क्योंकि जब आपके पास जॉब है, हर महीने निर्धारित समय पर सैलरी मिल रही है, तब आप कुछ भी बचत नहीं कर पा रहे हैं, तो फिर आर्थिक संकट में कैसे मैनेज करेंगे? उदाहरण के लिए अगर किसी कारण से नौकरी छूट जाती है, और कुछ महीने नई नौकरी की तलाश में बीत जाते हैं, तो कैसे घर के खर्चे और दूसरे काम चलेंगे, क्योंकि आपका बैंक अकाउंट तो खाली रहेगा.

इमरजेंसी फंड क्यों जरूरी?
दरअसल, यहां हम इमरजेंसी फंड की बात कर रहे हैं, हर किसी को अपने पास इमरजेंसी फंड रखना चाहिए. खासकर अगर आप प्राइवेट जॉब कर रहे हैं, तो प्राथमिकता से सबसे पहले इमरजेंसी फंड को तैयार करें. क्योंकि यही आपका इमरजेंसी में सबसे बड़ा सहारा बनेगा. जब आपको महीने की सैलरी नहीं मिलेगी तो उस समय इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल कर पाएंगे. अगर ऐसी स्थिति में इमरजेंसी फंड नहीं होगा तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी. क्योंकि हर महीने के खर्चे कैसे चलेंगे. अगर आप परिवार के साथ रहते हैं और प्राइवेट जॉब करते हैं तो फिर सबसे पहले अपना इमरजेंसी फंड एक अलग अकाउंट में रखें.

अब सवाल उठता है कि कितना इमरजेंसी फंड होना चाहिए, और कैसे इमरजेंसी फंड तैयार करें? क्योंकि किसी की आमदनी 20 हजार रुपये मासिक है तो कोई महीने में 1 लाख रुपये कमाता है. फिर कैसे इमरजेंसी को तैयार करें? वित्तीय जानकारों का कहना है कि नौकरी शुरू करते ही सबसे पहले इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए, और इस्तेमाल इमरजेंसी में ही करना चाहिए. नियम के मुताबिक कम से कम 100 दिन के खर्च के बराबर का पैस इमरजेंसी फंड के तौर पर होना चाहिए. वैसे अगर फैमिली बड़ी है और जॉब में स्थिरता कम है तो फिर 6 महीने का खर्च इमरजेंसी फंड में होना चाहिए.

इमरजेंसी फंड हर किसी के लिए जरूरी
उदाहरण के तौर पर अगर किसी की सैलरी 50 हजार रुपये महीने है, उसे कम से कम 1.5 लाख रुपये इमरजेंसी फंड के तौर पर हमेशा रखना चाहिए, जो मुसीबत में काम आए. वहीं अगर मंथली सैलरी एक लाख रुपये है तो फिर 3-5 लाख रुपये इमरजेंसी फंड के तौर पर अलग बैंक अकाउंट में होना चाहिए. कोशिश ये करें इस पैसे को सेविंग अकाउंट (Saving Account) में रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाल सकें. अब आप खुद तय कर सकते हैं कि जितनी आपकी सैलरी है, उससे तिगुनी राशि इमरजेंसी फंड होना चाहिए. इस पैसे में एक अलग अकाउंट में रखें. ऐसा नहीं कि हर महीने इस फंड में से निकासी करें. इस रकम का इस्तेमाल केवल इमरजेंसी में करें, जैसे- नौकरी छूट जाने पर और अचानक बीमार पड़ जाने पर. इसके अलावा जो भी इमरजेंसी हो, वहां आप इस फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं.

इस फॉर्मूले से तैयार करें इमरजेंसी फंड
अब आपको बताते हैं कि कैसे इमरजेंसी फंड तैयार करें? सबसे पहले अपनी आमदनी का 30 फीसदी हिस्सा बचाएं. जिसमें से 15 फीसदी हिस्सा निवेश करें, बाकी 15 फीसदी हिस्सा इमरजेंसी फंड वाले अकाउंट में ट्रांसफर करें. ये सिलसिला तब तक जारी रहना चाहिए. जब तक आपकी सैलरी से तिगुनी राशि इमरजेंसी फंड अकाउंट पर जमा न हो जाए. अगर जॉब में खतरा है तो फिर इमरजेंसी फंड 6 महीने तक के खर्चे को जोड़कर होना चाहिए.

इसके अलावा ये कोशिश होनी चाहिए कि इमरजेंसी फंड के लिए एक सेरपेट बैंक अकाउंट हो, जिससे लगातार ट्रांजेक्शन न करें. एक बार जब इमरजेंसी फंड तैयार हो जाए तो फिर छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उससे पैसे न निकालें. लेकिन अगर कोई इमरजेंसी है तो फिर इस फंड का आंख मूंदकर कर इस्तेमाल करें और जैसे ही स्थिति सामान्य हो जाए, फिर सबसे पहले इमरजेंसी फंड को तैयार करें, ताकि फिर भविष्य में उसका इस्तेमाल हो सके. एक और खास बात यह है कि इमरजेंसी फंड केवल फैमिली वालों के लिए जरूरी नहीं है, अगर आप अकेले भी है तो इमरजेंसी फंड को प्राथमिकता से अपनी लिस्ट में ऊपर में रखें.

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