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वोकल फॉर लोकल को ठेंगा दिखा रही यह सरकारी कंपनी! विदेशी फर्म को 1,000 करोड़ का ठेका देने की तैयारी

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नई दिल्ली:

सरकार वोकल फॉर लोकल पर जोर दे रही है और दिवाली की खरीदारी में इसका जबरदस्त असर देखने को मिला है। लेकिन सरकारी टेलिकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) एक विदेशी कंपनी को 1,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर देने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक बीएसएनएल ऑप्टिकल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क इक्विटमेंट की सप्लाई और डिप्लॉयमेंट के लिए फिनलैंड की कंपनी नोकिया को कॉन्ट्रैक्ट देने जा रही है। इसके लिए फाइनेंशियल बिड्स खोली जा चुकी हैं और सफल बोली लगाने वाली कंपनी को अगले कुछ दिनों में एडवांस परचेज ऑर्डर जारी किया जाएगा। इस रेस में नोकिया के अलावा घरेलू कंपनी यूनाइटेड टेलीकॉ्मस लिमिटेड (UTL) और टाटा ग्रुप की कंपनी तेजस नेटवर्क्स भी शामिल थीं। लेकिन उनकी बोली को डिसक्वालीफाई कर दिया गया।

यह कॉन्ट्रैक्ट फेज-4 प्रोजेक्ट के तहत ओटीएन की सप्लाई, इन्टॉलेशन और कमीशन के लिए है। इसमें तीन साल के लिए ऑपरेशन और मेंटनेंस सर्विसेज और आठ साल के लिए कंप्रहेंसिव मेंटनेंस कॉन्ट्रैक्ट शामिल है। सूत्रों के मुताबिक नोकिया ने टेलिकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी एचएफसीएल के जरिये बोली लगाई है। इस बारे में बीएसएनलएल, नोकिया और एचएफसीएल ने उन्हें भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग
लेकिन टेलिकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली घरेलू कंपनियों ने इसका विरोध किया है। इंडस्ट्री बॉडी ने इस बारे में टेलिकॉम मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव को चिट्ठी लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है। वॉइस ऑफ इंडियन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी एंटरप्राइजेज (Voice) के डायरेक्टर जनरल राकेश कुमार भटनागर ने ईटी से कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और आत्मनिर्भर भारत को हतोत्साहित करती है। बीएसएनएल ने बेबुनियाद कारणों का हवाला देते हुए यूटीएल और तेजस नेटवर्क्स को डिसक्वालिफाई कर दिया है और विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों और शर्तों को भी बदल दिया है। Voice में टीसीएस, तेजस नेटवर्क्स, एचएफसीएल और वीवीडीएन तथा कई दूसरी कंपनियां भी शामिल हैं।

बेंगलुरु की कंपनी यूटीएल ने इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए सरकारी कंपनी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DoT) के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन कंपनी की बोली को तरजीह नहीं दी गई। इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि उसने ट्रस्टेड सोर्स अप्रूवल नहीं दिया है और साथ ही उसने कोई बैंक गारंटी नहीं दी है। भटनागर ने कहा कि बीएसएनएल ने यूटीएल की बिड को नहीं खोला है। कंपनी ने अपनी सहायक कंपनी प्रियाराजा इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए बोली लगाई थी। यह एक एमएसएमई कंपनी है जिसे सरकारी नियमों के तहत छूट मिलनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा लगता है कि बीएसएसएन सरकार को वोकल फॉर लोकल मिशन के उलट काम कर रही है।

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