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बीकानेरवाला के फाउंडर केदारनाथ अग्रवाल का निधन, कभी सड़क पर बेचते थे रसगुल्ला और भुजिया

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नई दिल्ली

मिठाई और नमकीन की मशहूर चेन बीकानेरवाला के फाउंडर लाला केदारनाथ अग्रवाल का सोमवार को निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। काकाजी के नाम से मशहूर अग्रवाल शुरुआती दिनों में पुरानी दिल्ली में भुजिया और रसगुल्ले टोकरी में रखकर बेचते थे। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने बड़ा मुकाम हासिल किया। आज देश में बीकानेरवाला की 60 से अधिक दुकानें हैं। साल 1988 में ब्रांड को विश्व स्तर पर ले जाने के लिए कंपनी ने बिकानो लॉन्च किया। साल 2003 में कंपनी ने बिकानो चैट कैफे खोलने शुरू किए। ये एक किस्म का फास्ट फूड सर्विस रेस्टोरेंट है। आज कंपनी का कारोबार अमेरिका, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों में भी फैला है।

बीकानेरवाला ने बयान में कहा कि ‘काकाजी’ के नाम से प्रसिद्ध अग्रवाल के निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिसने स्वाद को समृद्ध किया है और अनगिनत लोगों के जीवन में अपनी जगह बनाई है। समूह के प्रबंध निदेशक श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा, “काकाजी का जाना सिर्फ बीकानेरवाला के लिए क्षति नहीं है; यह पाककला परिदृश्य में एक शून्य है। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व हमेशा हमारी खानपान यात्रा का मार्गदर्शन करेगा।”

कैसे हुई थी शुरुआत
केदारनाथ अग्रवाल ने अपना व्यावसायिक सफर दिल्ली से शुरू किया था। बीकानेर के रहने वाले उनके परिवार के पास 1905 से शहर की गलियों में एक मिठाई की दुकान थी। उस दुकान का नाम बीकानेर नमकीन भंडार था और वह कुछ प्रकार की मिठाइयां और नमकीन बेचते थे। अग्रवाल बड़ी महत्वाकांक्षाओं के साथ 1950 के दशक की शुरुआत में अपने भाई सत्यनारायण अग्रवाल के साथ दिल्ली आ गए। वह अपने परिवार का नुस्खा लेकर आए थे।

शुरुआत में दोनों भाई भुजिया और रसगुल्ले से भरी बाल्टियां लेकर पुरानी दिल्ली की सड़कों पर इन्हें बेचते थे। हालांकि, अग्रवाल बंधुओं की कड़ी मेहनत और बीकानेर के अनूठे स्वाद को जल्द ही दिल्ली के लोगों के बीच पहचान और स्वीकृति मिल गई। इसके बाद अग्रवाल बंधुओं ने दिल्ली के चांदनी चौक में दुकान शुरू कर दी, जहां उन्होंने अपना पारिवारिक नुस्खा अपनाया, जिसे अब पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ाया जा रहा है। आज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में कंपनी का बिजनस फैला है।

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