-अमरावद खुर्द में सुनिए कथा रघुनाथ की का आयोजन
भोपाल
राजधानी भोपाल के अवधपुरी वायु रॉयल एनक्लेव, ईडन गार्डन गेट बीडीए वेदवती ग्राउंड अमरावद खुर्द में ध्यान विज्ञान परमार्थ संस्थान द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन अंतरराष्ट्र्रीय कथाकार और समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने राम जी की बाल लीला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि संयम, शांति, मर्यादा और संस्कार ही श्रीराम जी का चरित्र है। भारत की भोर का प्रथम स्वर है राम। भारत वर्ष की आत्मा श्रीराम जी ही हैं।
महाराज ने बताया कि राम जी के जन्म के बाद शंकर भगवान भी राम जी के दर्शन करने अयोध्या आए। अयोध्या में भगवान राम के जन्म लेने के बाद महादेव उनके दर्शन करने के लिए अयोध्या पहुंचते हैं। काफी जतन के बाद भी रामजी के दर्शन नहीं मिलता तो वे उनके दर्शन के लिए पनघट पर पहुंचकर वहां पानी भरने आने वाली महिलाओं के हाथ देखने लगते हैं। एक दिन उन्हें राजमहल से भगवान श्रीराम का हाथ देखने का बुलावा आता है। भगवान भोलेनाथ वहां पहुंचकर उनके दर्शन करते हैं।
रामचरित मानस का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान भोलेनाथ ने इसकी रचना तो पहले ही कर दी थी। तुलसीदास जी ने तो इसका प्रकाशन कराया है। महाराज ने भगवान और मनुष्य के क्रिया में अंतर बताते हुए परमात्मा और जीवात्मा का उदाहरण देकर समझाया कि संसार रूपी कुएं में जीवात्मा गिरा है और परमात्मा कुएं में उसे हाथ पकड़ कर निकालने के लिए उतरा है और महात्मा इन दोनों को मिलाने के लिए बीच की कड़ी हैं। महाराज ने कहा कि जो विश्व का भरण पोषण करते हैं उनका नाम भरत है। महाराज ने पुष्प वाटिका और धनुषभंग का प्रसंग सुनाया। कथा विश्राम के समय श्रीराम-जानकी विवाह की झांकी सजाई गई। इस मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु नाचते गाते खुशियां मनाई।
