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पहले और 2024 चुनाव के बाद… कुछ बदलाव की जरूरत, यह साल भारत के लिए क्यों है खास

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नई दिल्ली:

भारत नई उम्मीदों और कई पॉजिटिव चीजों के साथ 2024 में कदम रख रहा है। बीता साल भारत के लिए कई मायनों में खास रहा और अच्छी खबर यह है कि यह साल भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिहाज से दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हो सकता है। 2024 के लिए IMF का पूर्वानुमान है कि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी। निःसंदेह, कुछ चुनौतियां और नकारात्मक बातें भी हैं। देश का आकार और इसकी जटिलता को देखते हुए चुनौतियों को समझा जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेल का संकट आने की उम्मीद थी लेकिन भारत इस पूरी चुनौती से निपटने में अच्छे से कामयाब रहा। इस साल भी तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो यह भारत के पक्ष में जाएगा। चुनाव पूर्व बजट की कुछ सौगातों को छोड़ दें तो आम चुनाव तक किसी बड़े नीतिगत पहल की उम्मीद नहीं है। लेकिन जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है और मोदी तीसरी बार वापसी करते हैं तो उन्हें सुधारों की शुरुआत करने के लिए अपनी राजनीतिक पूंजी का उपयोग करना चाहिए। यदि भारत को अगले 10 वर्षों तक 7% से अधिक की दर से विकास करना है, तो कुछ बदलावों की आवश्यकता है।

संसद में चर्चा जरूरी: संसद की कार्यवाही को और अधिक प्रासंगिक बनाएं जाने की जरूरत है। संसद के शीतकालीन सत्र ने दिखाया कि विधायिका कितनी निष्क्रिय हो गई है। विपक्ष के एक बड़े हिस्से को संसद से ससपेंड कर आपराधिक न्याय कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। संसद में अंतर-दलीय बहस किसी प्रस्तावित कानून पर चर्चा करने का सबसे अच्छा तरीका नहीं है। जब कानून बनाए जाते हैं तो संसद में होने वाली बहस न्यायपालिका को उनकी व्याख्या के बारे में जानकारी प्रदान करती हैं। जब कानून पर्याप्त बहस के बिना बनाए जाते हैं, तो बाद में उनकी व्याख्या मुश्किल हो जाती है। इससे देरी और भ्रम बढ़ता है। भारत सरकार को यहां नेतृत्व करना होगा।

मानव पूंजी: यह लोग ही हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि कोई समाज कितना शिष्ट, सुसंकृत और आगे है। भारत को अपनी क्षमता तक पहुंचने के लिए तत्काल एक बड़े अपग्रेड की जरूरत है। यहां तक कि स्मार्ट कानून भी संतोषजनक परिणाम नहीं देंगे यदि उन पर कम दक्ष लोगों द्वारा काम किया जाए। हाल ही में, NCLAT के दो सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के लिए फटकार लगाई थी। इसलिए, इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि अच्छे कानून के बावजूद दिवालियापन के मामले शायद ही कभी अपनी समयसीमा पर टिकते हैं।

पहाड़ों को सुनो: हिमालय में आपदाओं की एक श्रृंखला रही है, जिसमें संवेदनहीन मानवीय गतिविधियों ने भूमिका निभाई है। यह एक चेतावनी है कि पर्यावरणीय जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2024 में, भारत को विकास के लिए पर्यावरण की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। उम्मीद है कि नए साल में इसमें से कुछ पूरा हो जाएगा।

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