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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने अयोध्या नहीं जाएंगे चारों शंकराचार्य, जानिए क्या बताई वजह

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नई दिल्ली,

अयोध्या में पांच सदी बाद राम जन्मभूमि पर श्रीराम लला मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा समारोह में चारों शंकराचार्य शामिल नहीं होंगे. हालांकि वैष्णव धर्म गुरुओं और संत महंतों ने इस समारोह को सर्वथा उचित बताया हैं. चार में से दो शंकराचार्यों पूर्वाम्नाय जगन्नाथ पुरी के गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती और उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तो दो टूक कह दिया है कि वो इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने अयोध्या नहीं जाएंगे.

शास्त्रीय विधि को लेकर क्या बोले स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने तो ये भी कहा है कि धर्म निरपेक्ष राष्ट्र के प्रधानमंत्री गर्भगृह में जाकर देव विग्रह में प्राण प्रतिष्ठा का उपक्रम करेंगे. ये शास्त्रोक्त विधि नहीं है. जहां शास्त्रीय विधि का पालन नहीं हो वहां हमारा रहने का कोई औचित्य नहीं है. क्योंकि शास्त्र कहते हैं कि विधि पूर्वक प्राण प्रतिष्ठा न हो उस प्रतिमा में देव विग्रह की बजाय भूत, प्रेत, पिशाच, बेताल आदि हावी हो जाते हैं. उसकी पूजा का भी अशुभ फल होता है क्योंकि वो सशक्त हो जाते हैं. ऐसे शास्त्र विरुद्ध समारोह में हम ताली बजाने क्यों जाएं? ये राजनीतिक समारोह है. सरकार इसका राजनीतिकरण कर चुकी है.

अपूर्ण मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की आज्ञा नहीं देते शास्त्रः स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मुताबिक मंदिर अभी पूर्ण रूप से नहीं बना है. अपूर्ण मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की आज्ञा शास्त्र नहीं देते. पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मुखर रूप से तो ज्यादा कुछ नहीं कहा है, लेकिन ये स्पष्ट है कि वह भी इस समारोह में शामिल नहीं होंगे. दक्षिणाम्नाय श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य महा सन्निधानम स्वामी भारती तीर्थ ने भी इस शुभ अवसर पर देशवासियों को शुभ कामनाएं दी हैं और इस अवसर पर सबको आनंद मनाने को कहा है.

श्रृंगेरी में ही रहेंगे स्वामी जी
स्वामी भारती तीर्थ की ओर से मठ ने पत्र जारी कर ये साफ किया है कि कुछ धर्म द्वेषी लोग ये दुष्प्रचार कर रहे हैं कि मैं प्राणप्रतिष्ठा समारोह के विरोध में हूं, लेकिन ये सच नहीं है. हमने तो प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए पिछली दीपावली पर भी राम नाम तारक महामंत्र जाप का संदेश दिया था. अब भी जनता इस शुभ अवसर पर अयोध्या में रामजी के दर्शन कर उनके कृपापात्र बनें. हालांकि उन्होंने इस पत्र में अपने जाने या न जाने को लेकर कुछ नहीं लिखा, लेकिन सूत्रों के मुताबिक स्वामी जी श्रृंगेरी में ही रहेंगे.

प्राण प्रतिष्ठा को लेकर क्या कहते हैं वैष्णव संत
उधर, वैष्णव संत महंतों को इस प्राणप्रतिष्ठा समारोह में कोई खामी नहीं दिखती. किष्किंधा में हनुमान जी के जन्मस्थान पर स्थित मंदिर के महंत विद्यादास का कहना है कि देश-दुनिया में हजारों ऐसे मंदिर हैं जहां निर्माण कार्य पूरा ही नहीं हुआ है. दशकों पहले प्राण प्रतिष्ठा हुई और भगवान की सेवा पूजा चल रही है. शास्त्रों में इस बाबत कोई शर्त या अर्हता नहीं है कि ऐसा होने के बाद ही मुख्य देवता को प्राण प्रतिष्ठा हो सकेगी.

वहीं अयोध्या में पंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़ा अणी के महंत धर्म दास का कहना है कि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में सबसे पहले शिखर पूजा का विधान है, लेकिन यहां तो मूल और पुराने विग्रह की पूजा तो हो ही रही है. अभी का समय तो राम लला को नए मंदिर में ले जाने का है. ऐसे में समय मुहूर्त सब उचित है. पहले राम चबूतरे पर खस की झोपड़ी में रहे, फिर विवादित ढांचे में ताले सलाखों के पीछे, फिर टेंट में और अब अपने स्थाई आवास में जा रहे हैं. इस पर विवाद उचित नहीं है.

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