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Monday, May 4, 2026
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मत करें लापरवाही! अंगीठी ने फिर ली 6 लोगों की जान… दरवाजा बंद कर सोया तो सोता ही रह गया परिवार

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नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में दम घुटने से एक परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. वहीं दूसरी जगह पर दो लोगों ने दम तोड़ दिया, दरअसल, ठंड से बचने के लिए ये लोग अंगीठी जलाकर कमरे में सो गए थे. इस दौरान कमरे में धुआं भरता गया. इसके बाद परिवार के चार तो दूसरी जगह दो लोगों की मौत हो गई. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़ा.

जानकारी के अनुसार, पहली घटना आउटर नॉर्थ दिल्ली के खेड़ा इलाके की है. यहां घर में 4 लोगों की लाश मिली है. इनमें पति-पत्नी और दो बच्चे शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि घर का दरवाजा अंदर से बंद था. कमरे में अंगीठी जली हुई थी.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में समझ में ये आ रहा है कि सर्दी से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जलाई गई थी. इसके बाद धुआं होने की वजह से सफोकेशन (suffocation) हुआ और चारों लोगों की दम घुटने से मौत हो गई. इस घटना में जिन दो बच्चों की मौत हुई है, उनमें एक की उम्र 7 साल और दूसरे की 8 साल है. फिलहाल पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है.

पश्चिमी दिल्ली में दो लोगों की मौत
इस बीच पश्चिमी दिल्ली के इंद्रपुरी इलाके में भी घर के अंदर दो लोग बेहोशी की हालत में मिले हैं. उनके घर के अंदर अंगीठी जली हुई थी. बेहोशी के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. दोनों नेपाली मूल के हैं.

मरने वालों में एक शख्स की उम्र 50 और दूसरे की लगभग 28 साल थी. हादसे के वक्त दरवाजा अंदर से बंद था. सर्दी से बचाव के लिए घर के अंदर अंगीठी जली हुई थी. माना जा रहा है कि दम घुटने से दोनों की मौत हुई. हालांकि पोस्टमॉर्टम के बाद असल वजह का खुलासा होगा.

कमरे में अंगीठी जलाकर मौत होने की इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं. जानकारों का कहना है कि रूम में कभी भी अंगीठी या कोयला जलाने के बाद कमरा बंद करके न सोएं. इससे कमरे में धीरे-धीरे धुआं भरने लगता है.

कमरे में कोयला जलाने को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
इस मामले को लेकर एक्सपर्ट कहते हैं कि कोयला डालकर अंगीठी जलाने के बाद कार्बन मोनो-ऑक्साइड जैसी गैसें रिलीज होती हैं, जो जहरीली होती हैं. अगर कोई बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोता है तो वहां कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का स्तर काफी बढ़ जाता है. वहां ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगती है.

कार्बन मोनोऑक्साइड में कार्बन की मात्रा होती है, जो ब्रेन को प्रभावित कर सकती है. इसके बाद बंद कमरे में सोया इंसान बेहोश भी हो सकता है. जब व्यक्ति सांस लेता है तो सांस के साथ ही खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड गैस फेफड़ों में पहुंच जाती है और खून में मिल जाती है. जब काफी देर तक ऐसा होता रहता है तो ब्लड में हीमोग्लोबिन कम होने लगता है. इसके बाद व्यक्ति की मौत हो सकती है.

तीन दिन पहले द्वारका में कपल की मौत
इससे पहले दिल्ली के द्वारका इलाके दम घुटने से पति-पत्नी की मौत हो गई थी। द्वारका सेक्टर 23 के पोचनपुर गांव में अंगीठी के धुएं से दम घुटने से मौत का पता बच्ची के चिल्लाने से लगा। मरने वालों की पहचान नेहा और मानव के रूप में हुई। दम घुटने के कारण बच्ची ने चिल्लाना शुरू कर दिया। इसके बाद पड़ोसियों ने खिड़की तोड़ी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस पहुंची। इसके बाद तीनो के अस्पताल ले जाया गया। यहां दोनों पति-पत्नी को मृत घोषित कर दिया गया था।

क्यों हो जाती है मौत
अंगीठी के धुएं से कार्बन मोनोऑक्साइड निकलता है। रात में कमरा बंद रहने के कारण हवा बाहर नहीं जा पाती है। ऐसे में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। हवा नहीं निकलने से कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड का लेवल खतरनाक स्थिति तक बढ़ जाता है। जब हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड बढ़ जाता है तो यह शरीर में रेड ब्लड सेल्स में मिल जाता है। यह RBC में ऑक्सीजन की जगह ले जाता है। ऐसे में यह सोते हुए लोगों के लिए अधिक खतरनाक हो जाता है। इससे ब्रेन डैमेज के साथ ही मौत भी हो जाती है।

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