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बीते नौ वर्षों में खूब पस्त हुई गरीबी, नीति आयोग का दावा- 2030 के टारगेट से बहुत आगे है भारत

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नई दिल्ली:

बीते नौ वर्षों में देश के लगभग 24.8 करोड़ लोगों का गरीबी से पीछा छूट गया। नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुआयामी गरीबी से मुक्ति पाने के मामले में उत्तर प्रदेश और बिहार ने सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग के दो शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को नई रिसर्च रिपोर्ट जार की। रिसर्च में स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, मातृ स्वास्थ्य और बैंक खातों सहित 12 मापदंडों के आधार पर बहुआयामी गरीबी का आकलन किया गया है। इन कसौटियों के आधार पर तय गरीबों की आबादी 2022-23 में 11.3% तक कम होने का अनुमान है, जो 2019-21 में 15% और 2013-14 में 29.2% थी।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर जताई खुशी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबी से लड़ाई में इस बड़ी जीत की सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया, ‘बहुत उत्साहजनक, समावेशी विकास को आगे बढ़ाने और हमारी अर्थव्यवस्था में परिवर्तनकारी बदलावों पर ध्यान देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम चौतरफा विकास की दिशा में काम करते रहेंगे और हर भारतीय के लिए समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करेंगे।’

बहुआयामी गरीबी से करोड़ों लोग हुए मुक्त
नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद और वरिष्ठ सलाहकार योगेश सुरी की तरफ से तैयार पेपर में दावा किया गया है कि अगले वित्त वर्ष 2024-25 तक भारत में गरीब आबादी का प्रतिशत सिंगल डिजिट में आ जाएगा। पेपर लिखने वालों का यह भी दावा है कि भारत 2030 तक अपने सभी आयामों में गरीबी को आधा करने के लक्ष्य से काफी आगे है। पेपर में कहा गया है, ‘एमपीआई (बहुआयामी गरीबी सूचकांक) के सभी 12 संकेतकों में इस अवधि के दौरान उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

मोदी सरकार की योजनाओं का कमाल
हालांकि इसने कई मापदंडों के अनुमान नहीं बताए, लेकिन कहा गया कि पोषण अभियान, एनीमिया मुक्त भारत और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने मदद की है। इसमें कहा गया, ‘2013-14 से 2022-23 की अवधि के दौरान बहुआयामी गरीबी में गिरावट की दर में तेजी आई है। यह संभव हो पाया है क्योंकि खास तरह के वंचित पहलुओं में सुधार लाने के लिए सरकार ने कई पहल किए हैं और तरह-तरह की योजनाएं लागू की हैं।’ रमेश चंद ने पत्रकारों को बताया कि वित्त वर्ष 2023 तक के नौ वर्षों में कृषि क्षेत्र में वृद्धि किसी अन्य अवधि की तुलना में तेज हुई है।यरे से बाहर, मोदी- योगी सरकार के 9 सालों के काम पर इस रिपोर्ट की मुहर

कोविड के असर का नहीं हो सका आकलन
हालांकि, इसने चेतावनी दी कि गरीबी में कमी की गति तब तेज होती है जब स्तर अधिक होते हैं और आगे की गिरावट बाहरी कारकों से भी जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा, पेपर में जताए गए अनुमान राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण पर आधारित हैं, जिसके लिए डेटा महामारी से पहले एकत्र किया गया था और ताजा अनुमान महामारी के प्रभाव का सटीक आकलन नहीं कर सकते।

उत्तर प्रदेश और बिहार ने किया कमाल
कुल संख्या के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि उत्तर प्रदेश ने 5.9 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। उसके बाद बिहार का नंबर है जहां के 3.8 करोड़ लोग गरीबी के अभिशाप से मुक्त हुए। पेपर में कहा गया है, ‘यह भी देखा गया है कि जिन राज्यों में गरीबी की घटना अधिक है, उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में गरीबी के अनुपात में अधिक कमी देखी है। इससे यह पता चलता है कि विभिन्न राज्यों में बहुआयामी गरीबी असमानता पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है।’

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