नई दिल्ली
यह बच्ची मेरी नातिन है। महज 4 साल की है। साढ़े सात घंटे ट्रेन लेट पहुंची है दिल्ली। ट्रेन में कंबल और चादर के सिवाय कोई सुविधा नहीं मिली। खाना-पीना कुछ भी नहीं मिल रहा था। बच्ची को भूख लगी थी और ट्रेन में सामान बेचने वाला वेंडर आ ही नहीं रहा था। यह कहना है कि श्रमशक्ति एक्सप्रेस ट्रेन (12451) से नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे श्याम गुप्ता का।
कोहरे का सॉल्यूशन नहीं तो ट्रेन में सुविधा तो दे
श्याम गुप्ता का कहना है कि अगर रेलवे के पास कोहरे की समस्या का कोई सॉल्यूशन नहीं है तो कम से कम ट्रेनों में सुविधाएं तो होनी ही चाहिए। छह घंटे की यात्रा करीब 14 घंटे में पूरी हुई। इतनी देर तक वह ट्रेन में फंसे रहे। इस दौरान ट्रेन में खाने-पीने की कोई सुविधा नहीं थी। बहुत बुरी स्थिति रही। इसी ट्रेन में सफर करने वाले एक अन्य पैसेंजर ने कहा कि ट्रेन के काफी लेट चलने से किसी को भी परेशानी हो सकती है। ट्रेन में पैंट्री कोच नहीं हो तो खाने-पीने में असुविधा होती है।
ट्रेन में पेंट्री कार है ही नहीं
कानपुर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली श्रमशक्ति एक्सप्रेस में पैंट्री कार नहीं है। आमतौर पर यह ट्रेन देर रात 11.55 बजे कानपुर सेंट्रल से चलती है और सुबह 6 बजे के आसपास नई दिल्ली पहुंच जाती है। इसलिए लोग अपने साथ खाने-पीने का सामान लेकर नहीं चलते हैं। लेकिन जब ट्रेन इतना लेट हो जाए तो परेशानी होने लगती है। समय पर नहीं पहुंचने से काम का अलग नुकसान होता है। इस ट्रेन को मंगलवार सुबह 5 बजकर 50 मिनट पर पहुंचना था, जो दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर नई दिल्ली स्टेशन पहुंची।
वंदे भारत भी समय पर नहीं चल रही
वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत (22435) ट्रेन भी मंगलवार को देरी से नई दिल्ली पहुंची। वाराणसी से इस ट्रेन का खुलने का समय सोमवार दोपहर 3 बजे था। यह ट्रेन 6 घंटे 40 मिनट देरी से खुली। रात 9 बज कर 40 मिनट पर वाराणसी से चली और नई दिल्ली स्टेशन मंगलवार को दोपहर 2 बजे पहुंची। 15 घंटे देरी से यह ट्रेन दिल्ली पहुंची, जबकि यह ट्रेन वाराणसी से सिर्फ 8 घंटे में दिल्ली पहुंचती है। नई दिल्ली स्टेशन पर पैसेंजर गंभीर कुमार का कहना था कि ट्रेन में खाना तो मिला, लेकिन देरी की वजह से बहुत परेशानी हुई। जैसे-जैसे ट्रेन लेट होती गई, साफ-सफाई का बुरा हाल होता चला गया। अभी तो बाथरूम जाने की स्थिति नहीं थी।
