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Monday, May 4, 2026
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डीयू की पूर्व प्रोफेसर के समर्थन में उतरे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद, दिल्ली में जोरदार हल्लाबोल, क्या है मामला?

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नई दिल्ली

भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद ने आज दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफेसर ऋतु सिंह के समर्थन में डीयू में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल ऋतु सिंह पहले डीयू के दौलत राम कॉलेज में साइकॉलोजी विभाग में एडहॉक प्रोफेसर रह चुकी हैं, उन्हें डीयू ने नौकरी से निकाल दिया गया है। वह काफी दिनों से डीयू प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। आज उनके समर्थन में चंद्रशेखर आजाद डीयू पहुंचे थे। आजाद के आने से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। नॉर्थ कैंपस की आर्ट फैकल्टी की तरफ जाने वाले तमाम रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद को विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके साथ कई और लोगों को भी हिरासत में लिया गया।

कौन हैं डॉ ऋतु सिंह?
जानकारी के अनुसार डॉ. ऋतु सिंह दलित प्रोफेसर हैं। वो पहले डीयू के दौलत राम कॉलेज में साइकॉलोजी विभाग में एडहॉक प्रोफेसर रह चुकी हैं। उन्हें डीयू ने नौकरी से निकाल दिया। उनका आरोप है कि डीयू प्रशासन ने उनके साथ दलित होने की वजह से भेदभाव किया है। बताया जा रहा है कि ऋतु सिंह ने चार साल पहले दौलत राम कॉलेज की प्रिंसिपल सविता रॉय के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। डॉ ऋतु सिंह पिछले कई दिनों से डीयू में धरना दे रही हैं। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, ‘आप सभी से अपील है कि इस न्याय की लड़ाई में साथ दें’ उन्होंने लिखा, ‘भले ही गिरफ्तार कर लो लेकिन हमारी आवाज नहीं दबा सकते। संस्थागत हत्याएं अब नहीं होने देंगे। अब और रोहित वेमुला नहीं। खोले जाएंगे वीसी ऑफिस के ताले।’ ऋतु ने लोगों से इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अपील की। वो आज बड़े प्रदर्शन करने की तैयारी में थीं।

जातिगत भेदभाव का आरोप
ऋतु सिंह ने डीयू पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव की वजह से उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। वो करीब एक साल तक असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर रहीं। साल 2020 में उन्होंने प्रिंसिपल की बर्खास्ती को लेकर धरना दिया था। ये मामला कोर्ट में चल रहा है। वहीं ऋतु सिंह ने अपने समाज के लोगों से उनका साथ देने की अपील की। एक वीडियो जारी करके उन्होंने कहा, ‘मैं अपने समाज के लोगों से अपील करती हूं कि मेरा साथ हैं, हम अपने बच्चों का साथ नहीं देते इसलिए ऐसा होता है। अब हमें यहां से भी हटाया जा रहा है, हमारे सिर पर छत भी नहीं है।’

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