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भारत-पाक के बीच शहबाज को नहीं मिल रहा मध्यस्थ, सऊदी के बाद अमेरिका का किनारा, कितना बड़ा झटका?

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इस्लामाबाद:

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का विवाद लंबे समय से चल रहा है। पाकिस्तान कई देशों से इस मामले में मध्यस्थता कराने की बात कह चुका है। लेकिन भारत हर बार इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताता रहा है। हाल ही में सऊदी अरब से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को झटका मिला था। अब उसे अमेरिका से भी ऐसा ही झटका लगा है। अमेरिका के एक टॉप अधिकारी ने भारत-पाकिस्तान से तनाव कम करने और बातचीत के लिए मामले को सुलझाने का आग्रह किया है। लेकिन साथ ही कहा कि अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाएगा।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर से मंगलवार को एक रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि भारत सरकार के एजेंटों ने पाकिस्तान के अंदर आतंकियों को मारने की योजना बनाई है। मिलर ने कहा, ‘हम इस मुद्दे पर मीडिया रिपोर्ट्स को फॉलो कर रहे हैं। हम इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।’ इसके आगे उन्होंने कहा, ‘अमेरिका इस स्थिति के बीच में नहीं आएगा। हम दोनों पक्षों को तनाव से बचने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।’ पाकिस्तान हमेशा चाहता है कि कश्मीर के मुद्दे को दुनिया की समस्या बनाया जाए, लेकिन वह उसमें कामयाब नहीं हो पाता है।

सऊदी से पाकिस्तान को झटका
भारत ने हमेशा कहा है कि कश्मीर और पाकिस्तान के साथ अन्य मामलों पर उसकी स्थिति द्विपक्षीय है और किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप का कोई सवाल नहीं है। इस बीच भारत के साथ सऊदी अरब खुलकर आया है। पाकिस्तानी पीएम हाल ही में सऊदी गए थे, जहां उन्होंने प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर सऊदी ने कहा कि दोनों देशों को यूएनएससी के प्रस्तावों की जगह द्विपक्षीय तरीके से अपने मामलों को हल करना चाहिए। सऊदी का यह बयान भारत से उसके बढ़ते संबंधों का प्रतीक है। दोनों देश इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप कॉरिडोर में भी साथ हैं।

पाकिस्तान चाहता है मध्यस्थता
पाकिस्तान को अपनी तरक्की का रास्ता भारत के साथ रिश्ते सामान्य रखने में ही दिखता है। कश्मीर के अलावा 2019 में इस्लामाबाद की ओर से भारत संग व्यापार भी सस्पेंड कर दिया गया है। पाकिस्तान चाहता है कि इन मुद्दों पर कोई मध्यस्थ बनकर उसकी मदद करे। पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर शहबाज जनवरी 2023 में यूएई गए थे। यहां उन्होंने यूएई को भारत-पाकिस्तान के विवाद में मध्यस्थ बनने की पेशकश की थी। इसके अलावा हमेशा की तरह उन्होंने परमाणु युद्ध का डर भी दिखाया था। हालांकि जिस यूएई से वह मध्यस्थता की मांग कर रहे थे उसी ने कश्मीर में निवेश कर रखा है।

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