नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के डेटा से वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियों का 100 फीसदी मिलान की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने तकनीक से जुड़े चार- पांच और बिंदुओं पर जानकारी लेने के बाद दूसरी बार फैसला सुरक्षित रख लिया. यानी अब फैसले का इंतजार शुरू हो गया है. उम्मीद है कि चुनाव खत्म होने से पहले निर्णय आ जाए. SC में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने साफ कहा कि हम चुनावों को कंट्रोल नहीं कर सकते हैं. कोर्ट का कहना था कि हम किसी अन्य संवैधानिक अथॉरिटी के कामकाज को कंट्रोल नहीं कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने हमारे संदेह दूर किए हैं. हम आपकी विचार प्रक्रिया को नहीं बदल सकते हैं. हम संदेह के आधार पर आदेश जारी नहीं कर सकते हैं.
बताते चलें कि वर्तमान में वीवीपैट वैरिफिकेशन के तहत लोकसभा क्षेत्र की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के सिर्फ पांच मतदान केंद्रों के ईवीएम वोटों और वीवीपैट पर्ची का मिलान किया जाता है. इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में सिर्फ पांच रैंडमली रूप से चयनित ईवीएम को सत्यापित करने के बजाय सभी ईवीएम वोट और वीवीपैट पर्चियों की गिनती की मांग करने वाली याचिका पर ईसीआई को नोटिस जारी किया था.
‘तह तक जाने के लिए सवालों के जवाब जरूरी’
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम की कार्यप्रणाली से जुड़े चार-पांच सवालों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा. कोर्ट का कहना था कि हमें और जानकारी चाहिए. क्योंकि हम मामले की तह तक यानी गहनता से जानकारी चाहते हैं. जस्टिस खन्ना ने कहा, हमने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों का अध्ययन किया. हम सिर्फ तीन-चार स्पष्टीकरण चाहते हैं. हम तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं होना चाहते हैं, लेकिन अपने निष्कर्षों के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होना चाहते हैं और इसलिए हमने स्पष्टीकरण मांगने के बारे में सोचा. याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील ने कहा कि पारदर्शिता के लिए ईवीएम के सोर्स कोड का भी खुलासा किया जाना चाहिए. इस पर जस्टिस खन्ना ने जवाब दिया, सोर्स कोड का खुलासा कभी नहीं किया जाना चाहिए. अगर खुलासा हुआ तो इसका दुरुपयोग होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने इन चार सवालों पर जवाब मांगा है…
1). कंट्रोल यूनिट या वीवीपैट में क्या माइक्रो कंट्रोलर स्थापित है?
2). माइक्रो कंट्रोलर क्या एक ही बार प्रोग्राम करने योग्य है?
3). EVM में सिंबल लोडिंग यूनिट्स कितने उपलब्ध हैं?
4). चुनाव याचिकाओं की सीमा 30 दिन है और इसलिए ईवीएम में डेटा 45 दिनों के लिए संग्रहीत किया जाता है. लेकिन एक्ट में इसे सुरक्षित रखने की सीमा 45 दिन है. क्या स्टोरेज की अवधि बढ़ानी पड़ सकती है?
‘माइक्रोकंट्रोलर कंट्रोलिंग यूनिट में स्थापित है या वीवीपीएटी में?’
जज ने कहा, हम सिर्फ एक स्पष्टीकरण चाहते हैं. माइक्रोकंट्रोलर कंट्रोलिंग यूनिट में स्थापित है या वीवीपीएटी में? अभी हम यही धारणा रखते हैं कि माइक्रोकंट्रोलर, कंट्रोल यूनिट में है. हमें बताया गया कि वीवीपैट में एक फ्लैश मेमोरी होती है. दूसरी बात जो हम जानना चाहते हैं कि माइक्रोकंट्रोलर स्थापित है या नहीं. क्या यह एक बार प्रोग्राम करने योग्य है? इसकी पुष्टि करें. तीसरा, आप सिंबल लोडिंग यूनिट्स का संदर्भ लें. उनमें से कितने उपलब्ध हैं? चौथी बात यह है कि चुनाव याचिका दायर करने की सीमा अवधि आपके अनुसार 30 दिन है और इस प्रकार स्टोरेज और रिकॉर्ड 45 दिनों तक बनाए रखा जाता है. लेकिन एक्ट के तहत चुनावी याचिका दाखिल करने की अधिकतम सीमा 45 दिन है. आपको इसे ठीक करना होगा. दूसरी बात यह है कि क्या कंट्रोल यूनिट को सिर्फ सील किया गया है या वीवीपैट को अलग से रखा गया है, इस पर हम कुछ स्पष्टीकरण चाहते हैं.
‘ADR ने क्या दलील दी’
याचिका कर्ता में एक ADR के वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि हर माइक्रोकंट्रोलर में एक फ्लैश मेमोरी होती है. ये कहना ठीक नहीं होगा कि फ्लैश मेमोरी में कोई दूसरा प्रोगाम फीड नहीं किया जा सकता है. इस पर चुनाव आयोग के अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि एक वोटिंग यूनिट में एक बैलट यूनिट,कंट्रोल यूनिट और एक VVPAT यूनिट होती है. सभी यूनिट में अपना अपना माइक्रो कंट्रोलर होता है. इन कंट्रोलर से छेड़छाड़ नहीं हो सकती. सभी माइक्रो कंट्रोलर में सिर्फ एक ही बार प्रोग्राम फीड किया जा सकता है. चुनाव चिह्न अपलोड करने के लिए हमारे पास दो मैन्युफैक्चर हैं. एक ECI है और दूसरा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स.
चुनाव आयोग ने बताया कि सभी ईवीएम 45 दिन तक स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी जाती हैं. उसके बाद रजिस्ट्रार, इलेक्शन कमीशन से इस बात की पुष्टि की जाती है कि क्या चुनाव को लेकर कोई याचिका तो दायर नहीं हुई है. अगर अर्जी दायर नहीं होती है तो स्ट्रॉन्ग रूम को खोला जाता. कोई याचिका दायर होने की सूरत में स्ट्रॉन्ग रूम को सीलबन्द रखा जाता है.
