नई दिल्ली:
अमेरिका और यूरोप के नेताओं का आरोप है कि चीन से आ रही सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़ियों से पश्चिमी देशों की घरेलू इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। चीन की कंपनियां बड़े पैमाने पर ईवी बना रही हैं और इन्हें सस्ती कीमत पर पश्चिमी देशों को एक्सपोर्ट कर रही हैं। अब खबर आई है कि चीन की सबसे बड़ी ईवी कंपनी बीवाईडी घरेलू मार्केट से दोगुना कीमत पर विदेशों में अपनी गाड़ियां बेच रही हैं। उदाहरण के लिए कंपनी की Atto 3 की चीन में कीमत 19,283 डॉलर है जबकि जर्मनी में यह 42,789 डॉलर की बिक रही है। इसके बावजूद भी यह गाड़ी जर्मन मार्केट में दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तुलना में कहीं ज्यादा सस्ती है। टेस्ला की चीन में बनी मॉडल 3 गाड़ी जर्मनी में Atto 3 की तुलना में 37 फीसदी महंगी है।
हाल के दिनों में दुनिया में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का चलन तेजी से बढ़ा है। अभी ग्लोबल मार्केट में चीन की कंपनियों का दबदबा है। दुनिया की टॉप 10 ईवी प्रॉडक्शन कंपनियों में चीन की चार कंपनियां शामिल हैं। साल 2023 में प्रॉडक्शन के मामले में अमेरिका की कंपनी टेस्ला पहले नंबर पर रही। दुनिया में टोटल ईवी प्रॉडक्शन में इसकी हिस्सेदारी 19.9% रही। कंपनी ने पिछले साल 1,845,985 इलेक्ट्रिक गाड़ियों का उत्पादन किया। चीन की कंपनी बीवाईडी दूसरे नंबर पर रही। चौथी तिमाही में कंपनी ने टेस्ला से ज्यादा कारें बनाई लेकिन पूरे साल की बात करें तो ग्लोबल प्रॉडक्शन में 17.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ यह दूसरे नंबर पर रही। चीन की कंपनी जीएससी, एसएआईसी और एमजी टॉप 10 में शामिल हैं।
चीन पहुंचे मस्क
चीन में जबरदस्त कंप्टीशन के कारण इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत कम है। यही वजह है कि वहां की कंपनियां ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट करके मोटा मुनाफा कमाना चाहती हैं। उन्होंने एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की भी नींद हराम कर रखी है। टेस्ला का दुनिया में सबसे बड़ा प्लांट चीन में ही है। हालत यह हो गई है कि कंपनी को चीन में अपनी कीमत घटानी पड़ रही है। भारत दौरा टालने वाले मस्क अचानक चीन पहुंचे हैं। चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है और कंपनी टेस्ला को वहां कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टेस्ला ने करीब एक दशक पहले चीन के बाजार में एंट्री की थी और अब तक 17 लाख से ज्यादा कारें बेच चुकी है। लेकिन अब उसका यह मार्केट खतरे में है।
