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क्यों आत्महत्या कर रहे हैं मेडिकल स्टूडेंट्स? रोकने के लिए NMC ने शुरू किया ये अभियान

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नई दिल्ली

मेडिकल स्टूडेंट्स के मानसिक स्वास्थ्य को नैशनल मेडिकल कमिशन (NMC) बहुत गंभीरता से ले रहा है। कुछ समय पहले NMC ने इस मुद्दे पर नैशनल मेडिकल टास्क फोर्स बनाई है। इसे मई के आखिर तक रिपोर्ट देनी है। यह टस्क फोर्स अपनी रिपोर्ट फाइनल करने से पहले मेडिकल स्टूडेंट्स, डॉक्टरों और फैकल्टी के मानसिक स्वास्थ को लेकर एक ऑनलाइन सर्वे करवा रहा है। इसके लिए एक गूगल फॉर्म तैयार किया गया है और NMC की वेबसाइट पर इसे जारी किया गया है।

NMC ने मेडिकल कॉलेजों से की ये अपील
NMC ने सभी मेडिकल कॉलेजों में स्टूडेंट्स और फैकल्टी से इस सर्वे में भाग लेने की अपील की है। कमिशन का कहना है कि सर्वे में भाग लेने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और यह जानकारी किसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। केवल विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने के लिए सुझाव और राय मांगी गई है। सर्वे के जरिए टास्क फोर्स को पता चलेगा कि मेडिकल कॉलेजों में क्या-क्या परेशानी हैं। छात्रों को किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

हर महीने NMC की एंटी रैगिंग सेल को प्रोग्रेस रिपोर्ट भी सौंपनी होगी
फैकल्टी की क्या समस्याएं हैं? 31 मई 2024 तक सिफारिशें दी जाएगी और हर महीने NMC की एंटी रैगिंग सेल को प्रोग्रेस रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। NMC का कहना है कि मेडिकल छात्रों पर हावी होता तनाव चिंता की बात है और इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है। NMC की एंटी रैगिंग सेल ने यह नैशनल टॉस्क फोर्स बनाई थी, जो मेडिकल स्टूडेंट्स की आत्महत्या, उनके मानसिक स्वास्थ्य और संबंधित पहुलओं को लेकर विश्लेषण करेगी। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों से यह भी पूछा है कि MBBS कर रहे UG इंटर्न, PG रेजिडेंट्स, सीनियर रेजिडेंट्स को कितना स्टाइपेंड दिया जा रहा है।

चौंकाने वाली हो सकती है रिपोर्ट?
मेडिकल छात्रों की मेंटल हेल्थ पर टास्क फोर्स की रिपोर्ट चौंकाने वाली हो सकती है। ऑनलाइन सर्वे में छात्र और फैकल्टी के सदस्य बिना किसी डर या दबाव के अपनी बात रख सकते हैं क्योंकि उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी। मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं के दावों के बारे में भी इससे पता चल सकेगा। टास्क फोर्स ने केस स्टडीज को भी देखा है और मेडिकल कॉलेजों का दौरा भी किया है। देश के सबसे मुश्किल एंट्रेंस टेस्ट को पास करने के बाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने के बाद भी अगर कोई छात्र परेशान है तो यह सिस्टम पर बड़ा सवाल है।

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