नई दिल्ली
लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए सरकार और विपक्ष के बीच आम सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन अब स्पीकर पद के लिए चुनाव होना तय है। एनडीए ने इस बार भी कोटा से सांसद ओम बिरला को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं इंडिया गठबंधन की तरफ से के. सुरेश ने मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल किया। विपक्ष के पास लोकसभा में संख्याबल नहीं है। वहीं टीएमसी की तरफ से भी कहा गया है कि इसे लेकर उनसे सलाह मशवरा नहीं हुआ। इसके बाद भी स्पीकर पद के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा किया है। आमतौर पर लोकसभा स्पीकर आम सहमति से चुन लिया जाता है। ऐसा तीसरी बार होगा जब लोकसभा में स्पीकर के पद के लिए वोटिंग होगी।
क्या कहते हैं नंबर्स?
सबसे पहले जान लेते हैं कि लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव में किसका पलड़ा भारी है। लोकसभा में फिलहाल बीजेपी के 240 सांसद हैं। टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सांसद और अन्य सहयोगियों को जोड़ लिया जाए, तो एनडीए गठबंधन के पास कुल 293 सांसद हैं। इन सभी सांसदों ने शपथ भी ले ली है। यानी ये स्पीकर के लिए वोट डालने के हकदार हैं। वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन के पास कुल 235 सांसद हैं। इसमें 29 सांसद टीएमसी के भी हैंअन्य के खाते में 14 सांसद हैं। वहीं 7 सांसदों ने अभी तक शपथ नहीं ली है, इसमें से 3 टीएमसी और 1-1 कांग्रेस और सपा का है। ऐसे में ये सांसद भी स्पीकर के लिए वोटिंग नहीं कर पाएंगे। अगर टीएमसी ने साथ नहीं दिया तो इंडिया के पास केवल 204 सांसद बचेंगे। हालांकि एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर ओम बिरला का आसानी से चुनाव जीतना तय माना जा रहा है।
स्पीकर चुनाव को लेकर टीएमसी कांग्रेस से नाराज!
मंगलवार को में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने यह बयान देकर कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी थी कि कि स्पीकर पद के लिए ‘इंडिया’ के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस के कोडिकुनिल सुरेश को उम्मीदवार बनाने पर उनकी पार्टी से सलाह नहीं ली गई। उन्होंने यह भी कहा था कि सुरेश को समर्थन देने को लेकर पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी निर्णय लेंगी। अभिषेक बनर्जी ने कहा था, ‘किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया। कोई बातचीत नहीं हुई, दुर्भाग्य से यह एकतरफा फैसला है।’ हालांकि मंगलवार रात को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में तृणमूल कांग्रेस भी शामिल हुई।
