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मक्‍का में 300 किलो सोने से बना है काबा का दरवाजा, कौन रखता है चाबी? सऊदी में पैगंबर से जुड़ा है इतिहास

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रियाद

सऊदी अरब के मक्का शहर स्थित काबा दुनियाभर के मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र जगह है। काबा के बारे में एक खास बात ये भी है कि यहां की चाबियां पैंगबर मोहम्मद के जमाने से एक ही परिवार के पास हैं। इस परिवार के पूर्वजों को खुद पैगंबर मोहम्मद ने चाबियां सौंपी थीं। काबा की चाबियों की चर्चा फिर से होने की वजह ये है कि काबा की देखभाल के लिए जिम्मेदार और चाबी रखने वाले शेख डॉक्टर सालेह अल शेबी का 22 जून को निधन हो गया है। शेख सालेह अल शेबी पैगंबर मुहम्मद के साथी उथमान बिन तलहा के 109वें वारिस थे। काबा की चाबी पैगंबर ने उथमान बिन तलहा को सौंपी थी। इसके बाद से उथमान बिन तलहा के वंशजों को काबा की चाबी और देखभाल की जिम्मेदारी मिलती रही है।

पैगंबर मोहम्मद के जमाने से ही काबा की चाबी डॉक्टर सालेह परिवार के पास है। सालेह अल शेबी परिवार के 109वें वारिस थे, 2013 में उनके चाचा अब्दुल कादिर ताहा अल शेबी के निधन के बाद उनको ये चाबी सौंपी गई थी। उनके पास 11 साल तक काबा की चाबी संभालने का जिम्मा रहा, जो उनकी मौत के साथ खत्म हुआ है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, काबा में दाखिल होने के लिए सिर्फ एक ही दरवाजा है जिसे बाब-ए-काबा कहा जाता है।

काबा का है एक ही दरवाजा
काबा हरम के फर्श से 2.13 मीटर की ऊंचाई पर है। ये दरवाजा काबा की उत्तर-पूर्वी दीवार में उस काले पत्थर के पास है, जहां से हज के दौरान तवाफ शुरू होता है। काबा की चाबी को संभालने से जुड़े इतिहास के बारे में इस्लामी इतिहासकार अहमद अदन ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, ‘जब पैगंबर मोहम्मद का जन्म हुआ था तो कुरैश कबीले की जिम्मेदारियां बंटी हुईं थीं। जिस परिवार में पैगंबर का जन्म हुआ, उसके पास जमजम के कुएं और काबा की चाबी उस्मान बिन तलहा के पास थी।

मक्का पर जीत के बाद काबा की चाबी उस्मान बिन तलहा से ले ली गई थी लेकिन फिर अल्लाह के आदेश पर वापस इसे उन्हें सौंप दिया गया था। पैगंबर मोहम्मद ने खुद ये चाबी उस्मान बिन तलहा को दी थी। तब से ही उनका परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी इस चाबी को संभालता आ रहा है। ऐसी मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद ने ये चाबी उस्मान को देते हुए कहा था कि काबा की ये चाबी हमेशा आपके पास रहेगी।

1942 में बनवाया गया था सोने का दरवाजा
काबा का मौजूदा दरवाजा साल 1942 में बनवाया गया था। 1942 में इब्राहिम बद्र ने चांदी का दरवाजा और 1979 में इब्राहिम बद्र के बेटे अहमद बिन इब्राहिम बद्र ने काबा के लिए तीन सौ किलो सोने से दरवाजा तैयार करवाया। काबा के पूर्व संरक्षक शेख अब्दुल कादिर के दौर में शाह अब्दुल्ला के आदेश पर काबे के ताले को बदला गया था। दरवाजे पर नया ताला लगा और चाबी शेबी परिवार को फिर से सौंप दी गई।

पारंपरिक रूप से काबे की चाबी कुरान की आयतों की नक्काशी वाले बैग में रखी जाती है। ताले और चाबी पर भी कुरान की आयतें लिखी हुई हैं। सऊदी आने वाले राजकीय मेहमानों के लिए सऊदी अरब का शाही कार्यालय, गृह मंत्रालय या सैन्यबल आपात चाबी के जरिए इस ताले को खोल सकते हैं। इसके अलावा इस्लामी कैलेंडर के मोहर्रम महीने की हर पंद्रहवीं तारीख को शाही आदेश पर चाबी के संरक्षक काबा के दरवाजे को खोलते हैं।

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