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Monday, May 4, 2026
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अध्यक्ष को नसीहत, एकजुट विपक्ष… स्पीकर पर जीत तो मिली लेकिन इस बार सरकार के सामने बड़ी चुनौती

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नई दिल्ली:

मेरी यह धारणा बनी है कि आधिकारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष नहीं होने पर सदन सही ढंग से नहीं चलता। हम खुश हैं कि देश को नेता प्रतिपक्ष मिल गया है। यह बात विपक्षी गठबंधन इंडिया के एक सांसद की ओर से बुधवार ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई देते हुए कही गई। बधाई देते हुए जो बात कही गई उसमें संसद के आने वाले दिनों की बात छिपी है। बात सिर्फ एक सांसद की नहीं है। कांग्रेस, सपा, टीएमसी, शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) समेत तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने ओम बिरला को अध्यक्ष चुने जाने की बधाई तो दी साथ ही साथ अपने मन की बात भी कहने की कोशिश की। इन नेताओं का जोर इस बात पर था कि उनकी भी सुननी पड़ेगी। सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक विपक्ष पूरी तरह एकजुट नजर आया है। शपथ ग्रहण से लेकर अब तक विपक्ष यह बताने की कोशिश कर रहा है कि अब पहले वाली बात नहीं। पीएम मोदी के पहले दो कार्यकाल के मुकाबले इस बार विपक्ष कहीं अधिक मजबूत हुआ है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले वक्त में विपक्ष की चुनौती बढ़ने वाली है।

स्पीकर को बधाई देते हुए किस नेता ने क्या कहा
राहुल गांधी: मैं आपके दूसरी बार अध्यक्ष चुने जाने पर आपको बधाई देना चाहता हूं। यह सदन भारत के लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है और आप उस आवाज के संरक्षक हैं। निस्संदेह, सरकार के पास सत्ता की शक्ति है लेकिन विपक्ष भी भारत के लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है।

अखिलेश यादव: ओम बिरला को बधाई दी और उम्मीद जताई कि उनका ‘अंकुश’ विपक्ष के साथ साथ सत्तापक्ष पर भी रहेगा तथा निष्कासन जैसी कार्रवाई नहीं होगी। हम यही मानते हैं कि लोकसभा अध्यक्ष के रूप में आप हर सांसद और हर दल को बराबरी से मौका देंगे।

सुदीप बंदोपाध्याय: तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने भी बिरला को बधाई दी। उन्होंने कहा मेरी यह धारणा बनी है कि आधिकारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष नहीं होने पर सदन सही ढंग से नहीं चलता। हम खुश हैं कि देश को नेता प्रतिपक्ष मिल गया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि आपकी नीयत अच्छी हो सकती है, लेकिन कभी कभी आपको सत्तापक्ष के दबाव के आगे झुकना पड़ जाता है।

सुप्रिया सुले: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि जब 150 सदस्य निलंबित किए गए तब उन्हें बहुत दुख हुआ था। उन्होंने कहा कि अब आपसे आग्रह है कि निलंबन की कार्रवाई नहीं करेंगे। बातचीत से भी बात बन सकती है।

हकीकत यह है कि सरकार के पास संख्या है लेकिन जनादेश नहीं है। विपक्ष के पास जनादेश है। इसलिए छोटे दलों को मौका दिया जाए। मैं उस समुदाय से आता हूं जिसकी नुमाइंदगी इस सदन में केवल 4 प्रतिशत है। उन्हें मौका दिया जाए। इस बार सदन का स्वरूप बदल गया है। भाजपा अब प्रभुत्व नहीं जमा पाएगी।
असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम सांसद

18वीं लोकसभा के पहले दिन ही विपक्ष ने दिखाई ताकत
18वीं लोकसभा के पहले दिन ही सदन के अंदर और बाहर का नजारा देखकर यह लग गया था कि विपक्ष कुछ अलग करने वाला है। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन इंडिया में शामिल दल संविधान की प्रति लेकर सदन में पहुंचे और एकजुटता प्रकट की। कार्यवाही आरंभ होने से पहले विपक्षी गठबंधन के सांसद संसद परिसर में एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। उन्होंने ‘संविधान की रक्षा हम करेंगे’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाए। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह पर संविधान पर हमला करने का आरोप लगाया और कहा कि यह उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

अब नई भूमिका में होंगे राहुल गांधी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को सदन में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दे दी। लोकसभा सचिवालय की अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। मंगलवार विपक्षी दलों की मीटिंग में यह फैसला हुआ कि राहुल गांधी नेता विपक्ष होंगे। जब यह फैसला हुआ तब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक नेता जिन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक और मणिपुर से महाराष्ट्र तक पूरे देश का दौरा किया है, वह लोगों विशेषकर हाशिए पर रहने वाले और गरीबों की आवाज उठाएंगे। राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी पर हमलावर रहे हैं। अब वह एक नई भूमिका में होंगे। ऐसे में सदन के भीतर भी वह सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेंगे।

शपथ ग्रहण के दौरान दिखाई झलक
इस बार शपथ ग्रहण के दौरान अजब-गजब रंग दिखाई दिए। विपक्ष के अधिकांश सांसद संविधान की प्रति लेकर संसद पहुंचे। जब वह शपथ भी लेने पहुंचे तो उन्होंने संविधान की कॉपी अपने हाथों में ले रखी थी। राहुल गांधी हाथ में संविधान की कॉपी लेकर शपथ लेने पहुंचे। उन्होंने इसे सत्ता पक्ष की ओर भी दिखाया। सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं विपक्ष के अधिकांश सदस्य भी ऐसा करते हुए ही दिखाई दिए। सत्ता पक्ष की ओर से जो नारे लगे विपक्ष की ओर से भी जवाब नारों से दिया गया। 18 वीं लोकसभा के पहले सत्र की यह शुरुआत भर है लेकिन जो झलक दिखी है उससे यह साफ है कि इस बार सरकार के सामने चुनौती बड़ी है।

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