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विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने चल दिया दांव, प्रभारियों की नियुक्ति के मायने समझ लीजिए

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नई दिल्ली

इस साल और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी ने शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के लिए पार्टी के राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए। देश भर में पार्टी की संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने के उद्देश्य से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आदेश पर 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में प्रभारी और सह-प्रभारियों की लिस्ट जारी की गई। लिस्ट में इस साल बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में होने वाले चुनाव की रणनीति भी साफ नजर आ रही है।

हरियाणा पर खास फोकस
पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया को हरियाणा का प्रभारी नियुक्त किया है। पूनिया राजस्थान में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। शेखावटी से आने वाले सतीश पूनिया को संगठन में मजबूत नेता माना जाता है। जाट नेता पूनिया लोकसभा चुनाव में भी हरियाणा प्रभारी की भूमिका में थे। पार्टी ने यहां 10 में से 5 सीटों पर जीत हासिल की। राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर उनके साथ सह-प्रभारी की भूमिका में होंगे। जननायक जनता पार्टी से अलग होने के बाद पार्टी ने इस बार अकेले चुनाव मैदान में उतरे का फैसला किया है। अमित शाह खुद इस बात की घोषणा कर चुके हैं। पार्टी ने यहां मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सिंह सैनी को कमान सौंपी है। 58 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को 2019 में 41 सीट मिली थी।

झारखंड: लक्ष्मीकांत वाजपेयी की नियुक्ति
झारखंड में पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी को राज्य का प्रभार दिया गया है। लक्ष्मीकांत वाजपेयी बीजेपी के कद्दावर नेता होने के साथ ही बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं। 2014 में वाजपेयी जब यूपी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब बीजेपी ने 80 में 71 सीटें जीती थीं। वाजपेयी को प्रभारी नियुक्त करने से पहले बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को झारखंड विधानसभा चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया, वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा को सह प्रभारी नियुक्त किया था। वाजपेयी 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए चुनाव प्रभारी थे। 2019 के विधानसभा चुनावों में भाजपा चुनाव हार गई और झारखंड मुक्ति मोर्चा सत्ता में आ गया। हाल के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने 14 में से आठ सीटें जीतीं, जो 2019 में 11 से कम थीं।

जम्मू-कश्मीर में तरुण चुघ पर भरोसा
पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में तरुण चुघ पर भरोसा जताया है। जम्मू-कश्मीर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस सालल सितंबर तक चुनाव होने हैं। ऐसे में बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को प्रभारी और आशीष सूद को सह-प्रभारी बनाए रखा है। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी जम्मू-कश्मीर में चुनाव की देखरेख करेंगे। जम्मू-कश्मीर में 2018 के बाद से विधानसभा चुनाव नहीं हुए हैं। उस समय बीजेपी-पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) गठबंधन सरकार के गिरने के बाद विधानसभा भंग कर दी गई थी।

बिहार में विनोद तावड़े जारी रखेंगे काम
बिहार में राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश राज्य की देखरेख करते रहेंगे। बिहार में 2025 में चुनाव होने हैं। तावड़े ने राज्य में लोकसभा चुनावों की भी देखरेख की थी। यहां पार्टी अपने सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के साथ सत्ता में है। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर केरल में राज्य प्रभारी के रूप में बने रहेंगे। ओडिशा की सांसद अपराजिता सारंगी सह-प्रभारी होंगी। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पंजाब का प्रभार दिया गया है। पंजाब के विधायक नरेंद्र सिंह को सह-प्रभारी बनाया गया है। यूपी के पूर्व मंत्री श्रीकांत को हिमाचल प्रदेश का प्रभार दिया गया है। विधायक संजय टंडन सह-प्रभारी रहेंगे।

मणिपुर में गोपचड़े तो पूर्वोतर में पात्रा का पास रहेगा प्रभार
सांसद अजीत गोपचड़े को मणिपुर का प्रभार दिया गया है, जहां कुकी और मैती समुदायों के बीच हिंसा पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई है। सरकार के प्रयासों के बावजूद, राज्य में हिंसा एक साल से अधिक समय से जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संसद को बताया कि पूर्वोत्तर राज्य में सामान्य स्थिति बहाल होने लगी है और उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग सांप्रदायिक हिंसा की “आग को हवा देना” जारी रखते हैं, उन्हें मणिपुर के लोग अस्वीकार कर देंगे। ओडिशा के पुरी निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद संबित पात्रा को पूर्वोत्तर राज्यों का समन्वयक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन को संयुक्त समन्वयक बनाए रखा गया है। केरल से लोकसभा चुनाव लड़ने में असफल रहे अनिल एंथनी को नागालैंड और मेघालय का प्रभारी बनाया गया है।

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