भोपाल।
भेल भोपाल में भेल कर्मचारियों और सोसायटी वर्करों को लाभ मिले भेल एम्प्लाइज को—आपरेटिव सोसायटी बनाई थी, लेकिन लूट सको तो लूट की तर्ज पर खुद संस्था के सदस्यों ने उसे बर्बादी की कगार पर लाकर खडा कर दिया। आज हालत यह है कि सोसायटी वर्करों को 10 माह से वेतन तक नहीं मिला। संस्था की स्थिति यह है कि करोडों रुपए के घाटे में पहुंच गई है। रही सही कसर भेल प्रबंधन ने उसके करीब 400 मजदूरों को छीनकर अपनी चहेती सोसायटियों को दे दिया। साफ जाहिर है कि आने वाले समय में यह सोसायटी पूरी तरह से बंद हो जाएगी।
भेल प्रबंधन ने कभी कोशिश ही नहीं की कि यह संस्था चले। संस्था अध्यक्ष आरएस ठाकुर स्थानीय प्रबंधन से लेकर चेयरमेन तक को गुहार लगा चुके हैं कि कम से कम 200 मजदूरों को संस्था को दे दें, लेकिन प्रबंधन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। आज मजदूर ही नहीं बल्कि संस्था के प्रबंधक श्री लाल का कहना है कि 10 माह से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारी भूखों मरने को मजबूर हैं। यही नहीं संस्था के कर्ताधर्ताओं ने यहां की सोसायटी वर्करों की ग्रेच्युएटी तक खा गए।
