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Wednesday, April 29, 2026
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खालिस्तानियों से बातचीत फिर पीएम मोदी का स्वागत, भारत को धोखा देकर उकसा रहा है अमेरिका? समझें

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वॉशिंगटन:

अमेरिका इन दिनों भारत के साथ डबल गेम खेलने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत विरोधी खालिस्तानियों के साथ बातचीत कर रहा है। बहुत कम लोगों को पता होगा कि जब अमेरिका के डेलावेयर में राष्ट्रपति जो बाइडन क्वाड शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ किए जा रहे थे, उसी समय व्हाइट हाउस के अधिकारी खालिस्तानी आतंकवादियों के साथ गुप्त बैठक कर रहे थे। इससे अमेरिका का दोहरा रवैया एक बार फिर सामने आ गया है। यह वही अमेरिका है, जो खुद को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का चैंपियन बताता है और दूसरी तरफ भारत के खालिस्तानी आतंकवादियों को पालता-पोसता है और रूसी न्यूज चैनलों पर प्रतिबंध लगाता है।

अमेरिका ने जानबूझकर लीक की रिपोर्ट
अमेरिका ने पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत के साथ सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट पर समझौता किया है। इसके लिए अमेरिका एक नेशनल सिक्योरिटी फैब की स्थापना करेगा, जो कथित तौर पर दोनों देशों के सिक्योरिटी फोर्सेज को चिप की आपूर्ति करेगी। वहीं दूसरी ओर, पीएम मोदी की यात्रा के ठीक पहले बाइडन-हैरिस प्रशासन के अंतर्गत काम करने वाले अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उच्च स्तरीय अधिकारियों ने खालिस्तानी आतंकवादियों के साथ बैठक की। उन्होंने इस बैठक की जानकारी मीडिया में उस दिन लीक कराई, जिस दिन मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने मोदी-बाइडन के मुलाकात की खुशनुमा तस्वीरें पोस्ट कीं, जिस पर लिखा था: “विश्वसनीय साझेदार।”

भारत ने साधी चुप्पी
अमेरिकी अधिकारियों के साथ खालिस्तानियों के बैठक पर भारत ने चुप्पी साध रखी है। भारत ऐसा जता रहा है, जैसे कुछ हुआ ही न हो। यह पहला मौका नहीं है, जब भारत आक्रामक विदेश नीति अपनाने की जगह अपने लॉन्ग टर्म के लक्ष्यों को देखकर शांत बैठा हुआ है। इसके पहले भी जब अमेरिका में खालिस्तानी आतंकवादियों ने भारतीय दूतावास और कांसुलेट पर हमला किया, तब भी भारत ने ऐसी प्रतिक्रिया दी, जैसे हम काफी मजबूर हों। वही अमेरिका घोषित खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू, जिसके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, उसकी कथित हत्या की साजिश को लेकर भारत पर हमलावर है।

खालिस्तानियों को क्यों पाल रहा अमेरिका
अमेरिका की रणनीति भारत को काबू में रखने की है। इसके लिए अमेरिका खालिस्तानियों को आश्रय मुहैया करवा रहा है। वह अमेरिका समर्थक देशों जैसे कनाडा में भी खालिस्तान आंदोलन को हवा दे रहा है। अमेरिका की कोशिश खालिस्तान कार्ड खेलकर भारत को अपने हिसाब से चलाने की है। हालांकि, अमेरिका शुरू से ही अपनी इस रणनीति में नाकाम रहा है और इसका प्रत्यक्ष उदाहरण रूस-यूक्रेन युद्ध है। भारत ने अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद कभी भी रूस के खिलाफ कोई काम नहीं किया। बल्कि, अपने हित में रूस के और ज्यादा करीब जरूर हो गया।

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