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संसदीय समिति की अध्यक्षता के लिए TMC ने सुझाए दो नाम, केंद्र के प्रस्ताव के बावजूद कहां अटक रहा मामला?

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नई दिल्ली

तृणमूल कांग्रेस रसायन और उर्वरक विभाग से संबंधित संसद की स्थायी समिति की अध्यक्षता के लिए अपने सांसद कीर्ति आजाद को नामित कर सकती है। राज्यसभा सदस्य डोला सेन को वाणिज्य संबंधी समिति के प्रमुख के रूप में नामित किए जाने की संभावना है। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी। हालांकि, पार्टी सूत्रों ने यह भी कहा कि उन्हें एक दिन पहले शाम तक इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई संदेश नहीं मिला था।

सांसदों के नाम नहीं मिले- किरन रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को टीएमसी का नाम लिए बगैर कहा था कि जिस पार्टी के नेता समितियों के गठन में विलंब का आरोप लगा रहे हैं उसने अपने सांसदों के नाम नहीं दिए। टीएमसी सूत्रों ने कहा कि सरकार की ओर से समितियों के लिए नेताओं के नाम मांगने के लिए बुधवार शाम तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है और यह भी नहीं बताया गया कि पार्टी को कितनी समितियां आवंटित की गई हैं।

सूत्र के मुताबिक, टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता गुरुवार यानी 26 सितंबर को संसदीय कार्य मंत्री के पास पहुंचे थे। इसके बाद मंत्री ने उन्हें उन समितियों के बारे में जानकारी दी, जिनकी अध्यक्षता टीएमसी करेगी। टीएमसी के लोकसभा में 29 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं।

कीर्ति आजाद और डोला सेन को कौन सी जिम्मेदारी?
टीएमसी को राज्यसभा के तहत आने वाली वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति की अध्यक्षता करनी है। उसे लोकसभा के अंतर्गत आने वाली रसायन और उर्वरक संबंधी समिति की अध्यक्षता दी गई है। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद को रसायन और उर्वरक संबंधी समिति की अध्यक्षता के लिए तथा डोला सेन को वाणिज्य संबंधी समिति के प्रमुख के रूप में नामित किए जाने की संभावना है।

कहां फंस रहा पेच?
लोकसभा सचिवालय में शीर्ष सूत्रों के माध्यम से यह भी पता चला है कि लोकसभा अध्यक्ष का कार्यालय सदन के सदस्य और वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय से संपर्क स्थापित करने में असमर्थ रहा है। लोकसभा सचिवालय के एक सूत्र ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि बंद्योपाध्याय वर्तमान में देश से बाहर यात्रा कर रहे हैं, और यही संभवतः कारण है कि उन्होंने हमारी प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले, ओ’ब्रायन ने राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ को एक पत्र लिखकर समितियों के नामकरण में देरी पर असंतोष व्यक्त किया था।

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजीजू ने बुधवार को एक कार्यक्रम के मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि समितियों के गठन में कोई देरी नहीं है। हमें एक को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मिला है। सरकार के रूप में, हमारा काम लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा अध्यक्ष के कार्यालयों की सहायता करना है। हमने इन राजनीतिक दलों द्वारा हमें भेजे गए नामों को आगे बढ़ा दिया है। समितियों का गठन और उनके लिए अध्यक्ष का नामकरण पीठासीन अधिकारियों का क्षेत्र है।

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