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Wednesday, April 29, 2026
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अमेरिका और फ्रांस के बाद अब ब्रिटेन का भी मिला साथ, तो UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता पक्की?

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नई दिल्ली

भारत लंब समय सेयूएनएससी में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। हालांकि, चीन के अड़ंगे की वजह से उसकी ये डिमांड पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, अब एक बार फिर भारत का सपोर्ट बढ़ रहा।अमेरिका और फ्रांस के बाद अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। उन्होंने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भी भारत को UNSC में शामिल करने की वकालत की थी।

ब्रिटेन के पीएम ने किया भारत का सपोर्ट
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सुरक्षा परिषद को और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बॉडी बनने के लिए बदलना होगा। ये ऐसा निकाय हो जो कार्रवाई करने के लिए तैयार रहे, न कि राजनीति की वजह से पंगु बना हो। उन्होंने कहा कि हम यूएनएससी में अफ्रीका को स्थायी प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके साथ ही भारत, जापान, ब्राजील और जर्मनी को भी स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही निर्वाचित सदस्यों के लिए और अधिक सीटें बढ़ाना चाहिए।

इससे एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भी भारत को UNSC में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने का समर्थन किया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस समय पांच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से दो साल के कार्यकाल के लिए किया जाता है। पांच स्थायी सदस्य- रूस, यूनाइटेड किंगडम, चीन, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं। उनके पास किसी भी प्रस्ताव को वीटो करने की शक्ति है।

अमेरिका-फ्रांस का भी मिला साथ
इससे पहले बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने की वकालत की थी। उन्होंने ब्राजील, जापान, जर्मनी और दो अफ्रीकी देशों की सदस्यता का भी समर्थन किया। UNSC को और अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मैक्रॉन ने कहा कि आइए UN को और अधिक कुशल बनाएं।

मैक्रॉन ने कहा कि हमें यूएनएससी को और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता है। यही कारण है कि फ्रांस सुरक्षा परिषद के विस्तार के पक्ष में है। जर्मनी, जापान, भारत और ब्राजील को दो ऐसे देशों के साथ स्थायी सदस्य होना चाहिए, जिन्हें अफ्रीका उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए तय करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने क्या कहा
पिछले हफ्ते, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया था। क्वाड लीडर्स समिट के दौरान, क्वाड (अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में संयुक्त राष्ट्र निकाय में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। यह 21 सितंबर को विलमिंगटन, डेलावेयर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन के बीच द्विपक्षीय बातचीत के बाद हुआ। जिसके बाद व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि बाइडेन ने सुरक्षा परिषद में भारत को शामिल करने के लिए अमेरिका के समर्थन की पुष्टि की।

भारत लंबे समय करता रहा डिमांड
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल और अति आवश्यक सुधारों की मांग करता रहा है। भारत का मानना है कि उसे संयुक्त राष्ट्र के इस महत्वपूर्ण मंच पर स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। भारत का तर्क है कि 1945 में स्थापित 15 सदस्यीय परिषद पुरातन है और 21वीं सदी के वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करने में विफल है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अभी कितने सदस्य
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य होते हैं। पांच स्थायी सदस्य जिनके पास वीटो पावर है, इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और यूनाइटेड किंगडम हैं। 10 अस्थायी सदस्य जो दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। सुरक्षा परिषद के प्राथमिक कार्यों में संघर्षों की जांच करना, शांति स्थापना अभियान स्थापित करना और आवश्यकता पड़ने पर प्रतिबंध लगाना शामिल है। वैश्विक संकटों और संघर्षों से निपटने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो इसे अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में एक अनिवार्य संस्था बनाता है।

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