बेरूत
इजरायल ने शुक्रवार को लेबनान की राजधानी बेरूत के दहीह में बड़ा हवाई हमला किया है। हमले में लेबनानी गुट हिजबुल्लाह का हेडक्वार्टर तबाह हो गया है। अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने एक इजरायली स्रोत का हवाला देते हुए दावा किया कि ये हमला हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को निशाना बनाकर किया गया था। हमले के बाद इजरायल के चैनल 12 ने कहा कि नसरल्लाह आईडीएफ की स्ट्राइक में घायल हुआ है।
नसरल्लाह की मौत का दावा भी कुछ रिपोर्ट में किया गया है। मोसाद से जुडे़ एक एक्स हैंडल से कहा गया है कि इजरायली अधिकारियों के बीच यह विश्वास बढ़ रहा है कि नसरल्लाह को खत्म कर दिया गया है। हालांकि नसरल्लाह की मौत से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद हिजबुल्लाह के करीबी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि उनका नेता हसन नसरल्लाह जिंदा है। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि नसरल्लाह पर हमले से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है।
कौन है हसन नसरल्लाह
हसन नसरल्लाह 1992 से हिजबुल्लाह का चीफ है, जो लेबनान की मजबूत राजनीतिक और सैन्य ताकत है। हसन नसरल्लाह को ना सिर्फ लेबनान बल्कि पश्चिम एशिया के प्रभावशाली लोगों में से एक माना जाता है। सैय्यद हसन नसरल्लाह का जन्म 1960 में बेरुत में एक गरीब शिया परिवार में हुआ था। बचपन से ही धर्म के प्रति झुकाव रखने वाले हसन को 1975 में शुरू हुए लेबनानी गृहयुद्ध ने बहुत प्रभावित किया। इजरायली कब्जे का विरोध करने के लिए वह शिया मिलिशिया अमल में शामिल हुआ और फिर हिजबुल्लाह में आया।
साल 1992 में इजरायली बलों ने हिजबुल्लाह के उस वक्त के नेता सैय्यद अब्बास मुसावी की हत्या कर दी। इसके बाद हसन नसरल्लाह ने इस गुट का नेतृत्व संभाला और हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं और राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाया। लेबनान में 2018 के संसदीय चुनावों में हिजबुल्लाह ने दमदार जीत दर्ज की थी। नसरल्लाह के नेतृत्व में हिजबुल्लाह की राजनीतिक और सैन्य ताकत काफी बढ़ी है।
हिजबुल्लाह के पास एक लाख लड़ाके!
साल 2021 के एक भाषण में नसरल्लाह ने दावा किया कि हिजबुल्लाह के पास 1,00,000 लड़ाके हैं, जो इसे विश्व स्तर पर सबसे शक्तिशाली गैर-राज्य सशस्त्र समूहों में से एक बनाता है। इस क्षेत्र में हिजबुल्लाह को ‘प्रतिरोध की धुरी’ के रूप में जाना जाता है। हिजबुल्लाह को अमेरिका, यूके, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, खाड़ी सहयोग परिषद और अधिकांश अरब लीग ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
नसरल्लाह का प्रभाव सैन्य संघर्ष से आगे तक है। उनके नेतृत्व में हिजबुल्लाह लेबनानी राजनीति में एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है। 1992 से लेबनान के संसदीय चुनावों में समूह की भागीदारी के बाद से उसने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत कर ली है। माना जाता है कि लेबनान के शिया समुदाय के बीच नसरल्लाह को काफी माना जाता है।
इजरायल के साथ लंबा संघर्ष
नसरल्लाह ने खुद इजरायल का बचपन से विरोध किया है और उसके नेतृत्व में हिजबुल्लाह भी लगातार इजरायल के साथ संघर्ष करता रहा है। इसमें कई बड़े टकराव भी शामिल है। इन संघर्षों के दौरान नसरल्लाह की लोकप्रियता को उसके समर्थकों में बढ़ाया है, खासकर उन लोगों के बीच जो हिजबुल्लाह को इजरायली कब्जे के खिलाफ प्रतिरोध के प्रतीक की तरह देखते हैं।
